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फलोदी जेल ब्रेक:जांच अधिकारी डीआईजी शेखावत के साथ जुड़ा है अनोखा संयोग, उनके कार्यकाल में तीन बार भाग चुके हैं बंदी

जोधपुर13 दिन पहले
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फलोदी जेल से भागे 16 बंदियों के मामले की जांच डीआईजी (कारागाह) सुरेन्द्र सिंह शेखावत को सौंपी गई है। - Dainik Bhaskar
फलोदी जेल से भागे 16 बंदियों के मामले की जांच डीआईजी (कारागाह) सुरेन्द्र सिंह शेखावत को सौंपी गई है।

एक साथ 16 बंदियों के भागने के बाद से जोधपुर जिले की फलोदी जेल सुर्खियों में है। जबरदस्त नाकाबंदी और सघन तलाशी अभियान के पुलिस दावे पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। पुलिस को अभी तक एक भी बंदी तक पहुंचने में सफलता हाथ नहीं लगी है। वहीं, इस पूरे मामले की जांच कर रहे जोधपुर रेंज (कारागाह) के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सुरेन्द्र सिंह शेखावत का मानना है कि जेल से भागने पर सजा का प्रावधान बहुत कम है। ऐसे में इसमें सुधार की गुंजाइश है। वहीं जांच पूरी होने पर कुछ और लोगों की संलिप्तता सामने आ जाएगी। ऐसे में उन पर भी गाज गिरेगी।

शेखावत के साथ एक बेहद रोचक प्रसंग अवश्य जुड़ा है जिसे वे शायद ही याद रखना चाहेंगे। प्रदेश में जेल से बंदियों के भागने की तीन बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। इन तीनों घटनाओं के समय शेखावत ही अधिकारी थे। साल 2010 में चित्तौड़गढ़ से एक साथ 23 बंदी भागने के समय वे वहां पुलिस अधीक्षक (कारागाह) थे। इसी तरह उनके इसी कार्यकाल में चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा से 14 बंदी भाग निकले। और अब उनके डीआईजी रहते फलोदी से 16 बंदी भाग निकले।

बंदियों के भागने के मामले में शेखावत ने कहते हैं- मैंने सामान्य तौर पर ऐसा देखा है कि जो अपराधी होते हैं उनको एक फोबिया होता है। नाम कमाने का। क्योंकि उन्हें अपराध की दुनिया में ही रहना है। उस तरह की मानसिकता होती है। ऐसे में वे भागने की फिराक में रहते हैं। कुछ लोग सिर्फ इसलिए चले जाते हैं कि चलो कुछ दिन बाहर रह लेंगे। क्योंकि ये लोग कभी अपने भविष्य के बारे में नहीं सोचते। इनकी सोच वर्तमान तक ही होती है। सजा बहुत कम है। यह सबसे बड़ा माइनस प्वाइंट है। सिर्फ दो साल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में उसे लगता है कि अभी वर्तमान मामले में मिली सजा या ट्रायल चल रही है। ऐसे में यदि मैं भाग जाऊंगा तो दो साल की ही सजा होगी। वो मेरे अपराध पर मिलने वाली सजा के साथ ही चलेगी। इस मानसिकता को लिए वे भाग निकलते हैं।

वर्तमान में पूरे मामले की जांच जारी है और हो सकता है कि जांच पूरी होने तक कुछ और लोगों पर भी गाज गिर सकती है। कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है। हमारी जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

चित्तौड़गढ़ से भागे 6 बंदी का अब तक पता नहीं चला
यह अजीब संयोग है कि राजस्थान में जेल से बंदियों के भागने की तीन बड़ी घटनाओं से शेखावत जुड़े रहे। वर्ष 2007 में चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा के जेल से एक साथ 14 बंदी भाग निकले थे। वहीं फरवरी 2010 में चित्तौड़ जेल से एक साथ 23 बंदी फरार हो गए थे। इनमें से छह बंदी आज तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए हैं।

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