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जोधपुर में ब्लैक फंगस का हमला:महिला की जान बचाने के लिए आंख निकालनी पड़ी; डॉक्टरों ने कहा- नाक और आंख पर सूजन आए तो तुरंत दिखाएं, पहली स्टेज पर ही इलाज संभव

जोधपुरएक वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

कोरोना से लड़ रहे राज्य के दूसरे बड़े शहर जोधपुर को ब्लैक फंगस ने अपना शिकार बना लिया है। यहां भी इस बीमारी से जुड़े कई केस आने लगे हैं। कोरोना की आड़ में होने वाले इस फंगस ने लोगों में खौफ पैदा कर दिया है। कोरोना का इलाज करा रहे लोगों में उपजे खौफ के बीच डॉक्टरों के सामने चुनौती है कि इससे कैसे निपटा जाए, ताकि ये लोगों में पनपे ही नहीं।

अब तक आए तीन मामले सामने
जोधपुर में अब तक ब्लैक फंगस के अब तक तीन जटिल मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से एक जोधपुर, दूसरा ओसियां व तीसरा बाड़मेर का है। कुछ सामान्य मामलों में समय रहते इलाज करवा लेने से मरीज इससे पूरी तरह से मुक्त भी हुए है। MDM अस्पताल में एक महिला के आंख तक फंगस पहुंचने का मामला सामने आया। इस मामले में महिला की एक आंख को पूरी तरह से निकालना पड़ा।

AIIMS में भी आया एक मामला
बाड़मेर में कोरोना संक्रमित होने के बाद ब्लैक फंगस की पुष्टि होने पर एक महिला को इलाज के लिए AIIMS लाया गया। चेहरे पर काफी सूजन के साथ महिला को तेज दर्द हो रहा था। इसके बाद डॉक्टरों ने 61 साल की इस महिला की एक आंख को बाहर निकाल दिया। साथ ही आंख से सटे कुछ हिस्से को भी हटाना पड़ा। इस महिला के घर में विवाह समारोह था। इस समारोह के बाद कुछ परिजन संक्रमित पाए गए। इसने भी कोरोना का इलाज लिया। इस दौरान उसके चेहरे पर सूजन बढ़ने के साथ तेज दर्द रहना शुरू हो गया।

अभी तक स्पष्ट नहीं है पनपने का कारण
कोरोना का इलाज कर रहे डॉक्टरों का मानना है कि यह पोस्ट कोविड इफैक्ट है। स्टेराइड युक्त दवा व ऑक्सीजन सप्लाई में लगे ह्यूमिडिफायर की बोतल का पानी इस फंगस को पनपा रहा है। विशेष रूप से डायबिटीज के मरीजों को इससे ज्यादा खतरा है।

डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. अरविन्द चौहान ने बताया कि अस्पतालों में अधिकांश कोरोना संक्रमितों को ऑक्सीजन दी जा रही है। सामान्य वार्ड में 40-50 मरीज तो ICU में 20-30 मरीज भर्ती हैं। उन पर एक या दो नर्सिंग स्टाफ ही है। इसके चलते कई कई-कई दिनों तक ऑक्सीजन सप्लाई में लगे ह्यूमिडिफायर की बोतल का पानी तक चेंज नहीं होता है। कभी हाेता है भी तो नल का पानी भरकर ही उपयोग लिया जाता है। इससे बोतल में फंगल बन जाती है।

ऑक्सीजन के साथ-साथ फंगल भी मरीज के शरीर में पहुंच जाती है। मरीजों में ब्लैक फंगल होने का बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोविड मरीजों को इलाज में दिया जा रहा स्टेराॅयड, बीमारी के कारण कम होती इम्यूनिटी इसके अन्य कारण हैँ।

शुरुआत में संभव है इलाज
डॉ. चाैहान ने बताया कि ब्लैक फंगस का पहला असर नाक में इसके पनपने के साथ नजर आना शुरू हो जाता है। नाक व आंख पर सूजन आ जाती है। साथ ही दर्द भी रहता है। इस स्टेज तक हालांकि सुधार नहीं आता है। ये लक्षण नजर आते ही यदि मरीज डॉक्टर के पास पहुंचा जाता है तो इसके आंख में प्रवेश करने से पहले ठीक किया जा सकता है। यदि एक बार आंख में यह पांव पसार लेता है तो फिर आंख को बचा पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। शुरुआत में डायबिटीज मरीजों को खास ध्यान रखना चाहिए यदि वो घर या अस्पताल में ऑक्सीजन ले रहे हैं तो हर 24 घंटे के भीतर ही ह्यूमिडिफायर को अच्छे से साफ कर उसका पानी बदलना चाहिए।