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आरटीई:प्रदेश की पौने दो लाख निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी में नहीं मिलेगा प्रवेश, स्टूडेंट्स को सीधा पहली कक्षा में मिलेगा दाखिला

जोधपुर10 महीने पहले
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  • निजी स्कूलों को सरकार से मिलने वाली 100 करोड़ से अधिक फीस का नुकसान होगा
  • बच्चों की नींव कमजोर होगी, वे अन्य बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे
  • आरटीई की धारा 12 का भी उल्लंघन, स्कूल संचालक बोले- आदेश अव्यवहारिक

राज्य सरकार ने निशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 और संशोधित नियम 2011 की धारा 12 का उल्लंघन करते हुए निजी स्कूलों में बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश की व्यवस्था समाप्त कर दी है। अब स्टूडेंट्स को सीधा पहली कक्षा में प्रवेश मिलेगा। प्रदेश में करीब पौने दो लाख निजी स्कूल हैं, जहां प्री-प्राइमरी से पढ़ाई शुरू होती है। सरकार अब इसकी आड़ में निजी स्कूलों को दी जाने वाली 100 करोड़ से अधिक की राशि बचा लेगी।

आरटीई नियमों के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के लिए अधिकतम आयु सीमा 6 से 14 वर्ष और प्री-प्राइमरी की कक्षा एलकेजी, प्रेप और नर्सरी के लिए 3 से 6 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, लेकिन बच्चा प्री-प्राइमरी स्टैंडर्ड में अपनी बुनियाद ही मजबूत नहीं करेगा तो वह प्राइमरी और मिडिल लेवल के बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा। इसके अलावा प्रदेश की सभी प्राइवेट स्कूलों को आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी की नर्सरी, केजी, प्रेप की तीनों कक्षाओं की फीस की राशि अब बंद हो जाएगी और सिर्फ पहली क्लास से आरटीई की फीस शुरू होगी।
क्या है धारा 12

आरटीई के अध्याय 4 की धारा 12 के तहत संबंधित स्कूल को निर्धारित सीटों की 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब व असहाय बच्चों को स्कूल की पूर्व प्राथमिक अथवा प्राथमिक की शुरुआती कक्षा में एडमिशन देना होगा।

आदेश तर्कसंगत नहीं, इसे वापस लें : गौड़
स्कूल शिक्षा परिवार के प्रदेश उपाध्यक्ष जोगेंद्र गौड़ ने कहा कि यह आदेश तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि जब बच्चा प्री-प्राइमरी कक्षा में प्रवेश लेने की बजाय सीधा पहली कक्षा में प्रवेश लेगा तो शैक्षणिक रूप से वह अन्य बच्चों से मुकाबला नहीं कर पाएगा।

बच्चों में भेदभाव उचित नहीं : गुर्जर
निजी स्कूल शिक्षण संस्थान संघ के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्रसिंह गुर्जर व महासचिव गौरीशंकर आचार्य ने कहा कि स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चे प्री-प्राइमरी पढ़कर आने वाले बच्चों पर भेदभाव का आरोप लगाएंगे। इससे अव्यवस्था का माहौल बनेगा।

  • सरकार को इस नियम को लेकर रिव्यू करना चाहिए, क्योंकि अधिकांश स्कूलों में प्री-प्राइमरी क्लास से पढ़ाई शुरू होती है। अगर बच्चा प्री प्राइमरी के बजाय सीधा पहली क्लास में एडमिशन लेगा तो उसका स्तर अन्य बच्चों की तरह नहीं होगा।  -गजरा चौधरी, पूर्व उप निदेशक माध्यमिक शिक्षा
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