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अधीनस्थ अदालतों का कैंपस छोटा पड़ने का मामला:अधीनस्थ अदालतों के लिए न्यू हाईकोर्ट के पास जगह देने एडवोकेट्स एसो. ने लगाई याचिका, छह सप्ताह बाद होगी सुनवाई

जोधपुरएक महीने पहले
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हाईकोर्ट प्रशासन व जेडीए से छह सप्ताह में जवाब मांगा है। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट प्रशासन व जेडीए से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।

अधीनस्थ अदालतों का कैंपस छोटा पड़ने लगा है। कई अधीनस्थ अदालतें कैंपस के बाहर किराए पर चल रही हैं। कॉमर्शियल कोर्ट व ट्रिब्यूनल की भी जगह नहीं है। ऐसे में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर अधीनस्थ अदालतों के कैंपस के लिए नए हाईकोर्ट के पास जगह देने की गुहार लगाई है। इस मामले की सुनवाई के लिए गठित जस्टिस अरुण भंसाली व जस्टिस दिनेश मेहता की खंडपीठ ने सरकार, हाईकोर्ट प्रशासन व जेडीए से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष नाथूसिंह राठौड़ की ओर से अधिवक्ता अंकुर माथुर ने जनहित याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि अधीनस्थ अदालतों के लिए कैंपस न केवल छोटा पड़ रहा है, बल्कि वहां सुविधाएं भी नहीं हैं। हालत यह है कि कॉमर्शियल कोर्ट स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इसके लिए जगह नहीं मिल रही है। यहां जो भी इन्फ्रास्ट्रक्चर है, वह भी 70 साल पुराना है।

अधिवक्ता माथुर ने कहा कि कोर्ट रूम के जो मापदंड है, उसके अनुसार भी नहीं बने हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2017 में अधीनस्थ अदालतों के लिए झालामंड में नई जगह आवंटित करने के लिए हाईकोर्ट प्रशासन को प्रस्ताव दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने सरकार को भेज दिया था। वहां से आवश्यक कार्रवाई के लिए जेडीए के पास भी आ गया था, लेकिन बाद में इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। खंडपीठ ने इस मामले में जेडीए व सरकार के नोटिस एएजी संदीप शाह व हाईकोर्ट प्रशासन के अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य को नोटिस दिए। इन्हें छह सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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