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  • After 7 Years, Dry Elephant Canal, People Are Digging 60 Feet Deep, So That Coins And Ornaments Shed With Ashes Can Be Found

काेराेनाकाल में यहां किए थे अस्थि विसर्जन:7 साल बाद सूखी हाथी नहर, 60 फीट गहरा तल खंगाल रहे लोग, ताकि अस्थियों संग बहाए सिक्के-आभूषण मिल जाएं

जोधपुर6 दिन पहले
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इंदिरा गांधी नहर - Dainik Bhaskar
इंदिरा गांधी नहर

कोरोनाकाल के भूतो ना भविष्यति दृश्यों में से यह भी एक तस्वीर है। इस महामारी काल में अपनों को खो चुके कई लोग लॉकडाउन व पाबंदियों के चलते अस्थि विसर्जन तक करने नहीं जा सके। ऐसे में कई लोगों ने शहर में पेयजल लेकर आ रही हाथी नहर में ही अस्थियों को विसर्जित किया।

इस दौरान चांदी व सोने के टुकड़े (तुस) आभूषण तथा कुछ परिजनों ने तो दिवंगतों के नाक-कान व पैरों में पहने आभूषण भी नहर में विसर्जित कर दिए। खूब सिक्के भी अर्पित किए गए। संयोग से इंदिरा गांधी कैनाल के रखरखाव के चलते 2 महीने का क्लोजर आया।

कैनाल से जुड़ी यह नहर भी क्लोजर का अंत आते-आते तकरीबन पूरी सूख गई। ऐसे में कई जरूरतमंद और खोजी प्रवृत्ति के लोग 60 फीट तक गहरी नहर में उतर गए। यहां पर पूरे-पूरे दिन छलनी, बाल्टी, डिब्बा आदि लेकर पैंदे और कीचड़ को खूब खंगाला।

इसमें से चंद के हाथ कीमती वस्तुएं भी लगीं। हालांकि 10, 5 एवं 2-2 के सिक्के काफी मात्रा में सभी के हाथ लगे। हालांकि रविवार शाम तक नहर का पानी यहां पहुंचने के साथ ही यह सिलसिला खत्म हो गया।

हाथी नहर
इंदिरा गांधी नहर जोधपुर से 40 किमी दूर नारवा इंद्रोका से गुजरती है। वहां से जोधपुर सरहद तक पानी राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल से आता है। शहर के किनारे बाडिया बालाजी से कायलाना तक पहाड़ों को काट बनाया हिस्सा हाथी नहर है। इसमें एक क पर एक तीन हाथी खड़े हों उतनी गहराई है।

7 साल बाद क्लोजर
पंजाब से पानी लाकर प. राजस्थान तक की प्यास बुझाने वाली इंदिरा गांधी नहर की मेंटेनेंस के लिए 7 साल बाद इतना लंबा क्लोजर लिया।

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