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वेबीनार: कोरोना महामारी से मुकाबला:पहली लहर से निपटने की सफलता के बाद अब भारत का कमजोर प्रदर्शन आश्चर्यजनक : प्रो एंजलिन चांग

जोधपुर2 महीने पहले
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क्वींसलैंड विश्वविद्यालय, अमेरिका की प्रो एंजलिन चांग ने कोरोना की पहली लहर में भारत की बढ़त को मिल का पत्थर बताते हुए दूसरी लहर में कमजोर प्रदर्शन को आश्चर्यजनक बतलाया। उनके अनुसार कोरोना संकट मानव सभ्यता पर संकट है। सभी देशों के सम्यक प्रयासों से इस महामारी से निदान संभव है।

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के लोक प्रशासन विभाग तथा अंतरराष्ट्रीय राजनीति विज्ञान संघ की रिसर्च कमेटी 18 के संयुक्त तत्वाधान में कोरोना महामारी से मुकाबला : प्रशासन तथा नागरिक समाज के समक्ष चुनौतियां विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। वे इस वेबीनार में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन दे रही थी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के प्रो संजय लोढ़ा ने शासन प्रक्रिया तथा नीति निर्माण में जन सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कोरोना संकट में सरकार की विफलता के कारणों को इंगित किया। उनके अनुसार पिछले 16 महीने से संसद गायब है तथा विचार विमर्श की संपूर्ण प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। विचार विमर्श के अभाव ने कोरोना संकट को अधिक बढ़ाया है। उनके अनुसार मजदूरों के पलायन के संदर्भ में सरकारों ने मुंह मोड़ा। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी चोट पहुंची है लेकिन नागरिक समाज के प्रयास इस संदर्भ में अनुकरणीय है। सरकारों द्वारा सामाजिक पूंजी की अवहेलना करना भारी पड़ रहा है।

दूसरे मुख्य वक्ता प्रो अशोक शर्मा ने अपने उद्बोधन में नीति निर्माताओं द्वारा स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देने को कोरोना की भयावहता का मुख्य कारण बताया। उनके अनुसार सभी जिम्मेदार लोगों ने मुसीबत की इस घड़ी में आमजन का खून चूसा। भारत पिछले 70 वर्षों से सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद भी जवाबदेहिता व उत्तरदायित्व का ऐसा अभाव पहली बार देखने को मिल रहा है। जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी के मामले भी यह स्पष्ट करते हैं कि नागरिक भी अपनी भूमिका का समुचित निर्वहन नहीं कर पाए। उनके अनुसार कोरोना संकट में स्थानीय निकायों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती थी।लेकिन सरकारों ने इसे नजरअंदाज किया। इस पूरी महामारी के दौरान स्थानीय निकायों से जुड़े मंत्रियों द्वारा किसी प्रकार की पहल नहीं करना अथवा चुप रहना आश्चर्यजनक है।

कुलपति प्रो पीसी त्रिवेदी ने सरकारों द्वारा अनुसंधान के क्षेत्र में कम व्यय करने को इस संकट का एक बड़ा कारण माना। उनके अनुसार वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव तथा दकियानूसी बातों से वैक्सीनेशन अभियान में बाधा उत्पन्न की है। कोरोना की पहली लहर में सफल रहने के बावजूद भी आत्म संतोष के भाव के कारण दूसरी लहर भारत में हावी होती जा रही है। नीति निर्माण की प्रक्रिया में अयोग्य लोगों के कारण नीति विकलांगता की स्थिति पैदा हुई है।

विभाग अध्यक्ष प्रो जेएस शेखावत ने सरकार की सीमाओं को उल्लेखित करते हुए नागरिक समाज की भूमिका को रेखांकित किया। उनके अनुसार कोरोना संकट में नागरिक समाज के प्रयास आशा की किरण है। मुंबई के अनिल सुरेंद्र मोदी स्कूल की सहायक आचार्य तथा सहसमन्यवक डॉ चारू भरूत ने कार्यक्रम संचालन किया। जबकि समन्वयक डॉ दिनेश गहलोत ने आभार व्यक्त किया। तकनीकी सहयोग डॉ सतीश अग्रवाल का रहा। कार्यक्रम के प्रारंभ में वेबिनार की कन्वीनर प्रो मीना बरडिया ने अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया तथा वेबीनार की थीम पर प्रकाश डाला। वेबिनार में लगभग 1100 पंजीकरण हुए।

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