अब तक 80 लोगों में पाई गइ यह बीमारी:AIIMS के डॉक्टर की टीम ने पहले मोर्चरी में ऑपरेशन की प्रेक्टिस की फिर 8 घंटे ऑपरेशन किया

जोधपुरएक महीने पहले
  • एम्स जोधपुर के डाक्टरों ने किया 10 वर्षीय बच्चे में अत्यंत दुर्लभ बीमारी के लिए पोर्टकिवल शंट का जटिल ऑपरेशन

जोधपुर एम्स ने दुर्लभ बीमारी पोटकिवल शंट का जटिल ऑपरेशन कर 10 वर्षीय बच्चे की जान बचाई। डॉक्टर के अनुसार अब तक दुनिया भर में इस बीमारी के 80 केस आए है। जटिल ऑपरेशन के कारण डॉक्टर्स ने मोर्चरी में बॉडी पर प्रेक्टिस की। उसके बाद बच्चे का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन करीब 8 घंटे चला। 31 जून को ऑपरेशन के बाद बच्चा अब बिल्कुल स्वस्थ है।

एम्स के बाल शल्य चिकित्सा सर्जरी विभागध्यक्ष डॉ अरविंद सिन्हा ने बताया कि 10 वर्षीय विष्णु अब बिल्कुल स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि विष्णु को इंट्राहेपेटिक पोर्टकिवल शंट से पीड़ित था। इसमें लीवर की खून की नलिया व शरीर की मुख्य नली उसके बीच एक फिस्टूला होता है। इस केस में यह फिस्टूला लीवर के थ्रू जा रहा था। आम तौर पर इस बीमारी का इलाज रेडियोलोजी डिपार्टमेंट में स्टेंट लगा कर ब्लॉक करते है। लेकिन इस केस में फिस्युला ढाई सेंटीमीटर का था। ऐसे में स्टैंट से इलाज संभव नहीं था। इसका ऑपरेशन के अलावा चारा नहीं था। उन्होंने बताया कि 5 डिपार्टमेंट की टीम बनाकर मोर्चरी में प्रेक्टिस की। जिसमें पिडियाट्रिक सर्जरी, कार्डियों वैस्क्युलर सर्जरी व एनिस्थिसिया की टीम, रेडियोलॉजी टीम इनवोल्व थी।

जान का खतरा

इस बीमारी के कारण बच्चे का वजन ठीक से नहीं बढ़ रहा था। इसके अलावा पल्मोनरी आर्टरी हाइपरटेंशन, एन्सेफलोपथी, हेपटोपुल्मोनरी सिंड्रोम, ग्लोमेरुलोपथी, खून में अमोनिया के बढ़ाव जैसे जटिलताओं के कारण बच्चे को जान का ख़तरा था।

कई अस्पताल घूमें बीमारी का पता नहीं चला

जब कई अस्पतालों का दौरा करने के बाद भी इस दुर्लभ बीमारी का पता नहीं चला, बच्चे को अंततः एम्स में लाया गया, जहाँ डॉ अरविंद सिन्हा के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम द्वारा उसका सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के बाद बच्चा अब एम्स में बाल चिकित्सा आईसीयू में भर्ती है जहां उसकी रिकवरी जारी है।

डॉक्टर्स के अनुसार यह देश का पहला मामला है जहां छोटी उम्र में इस तरह का जटिल ऑपरेशन हुआ है। रिसर्च में पता लगा कि इस बीमारी से ग्रसित दुनिया भर में ऐसे केवल अस्सी रोगियों को यह बीमारी होने की सूचना मिली है, जिनमें से कुछ ही जीवित बचे हैं। इनमें से कई रोगियों का इलाज इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग द्वारा एंडोवास्कुलर विधियों द्वारा किया जा सकता है। लेकिन चूंकि यह एक बहुत बड़ा शंट था, इसलिए बच्चे को ऑपरेशन से ही ठीक किया जा सकता था। ्र

डॉक्टर की टीम

बाल शल्य चिकित्सा सर्जरी विभागध्यक्ष डॉ अरविंद सिन्हा के नेतृत्व में एक टीम बनायीं गयी थी जिसमें, डॉ कीर्तिकुमार राठौड़, डॉ शुभलक्ष्मी नायक, डॉ श्रेयस, डॉ सौम्या भट्ट (बाल शल्य चिकित्सा विभाग), डॉ मधुसूदन कट्टी, डॉ सुरेन्द्र पटेल (सीटीवीएस विभाग), डॉ पुष्पिंदर खेरा, डॉ पवन गर्ग (रेडियोलॉजी विभाग), डॉ सादिक एवं टीम (एनेस्थीसिया विभाग) एवं डॉ दुष्यंत अग्रवाल (एनाटॉमी विभाग) शामिल थे।

क्या है पोटकिवल शंट बीमारी

पोटकिवल शंट एक ऐसी बीमारी है जहां पोर्टल वीन (आंतों से अशुद्ध खून लिवर तक ले जाने वाली रक्त वाहिनि) और इन्फीरियर वेनाकावा (शरीर की प्रमुख शिरा जो शरीर के विभिन्न भागों से रक्त ले जाती है और उसे सीधे हृदय में प्रवाहित करती है) के बीच असामान्य संचार होता है। यदि यह यकृत के भीतर होता है, यह रोग और भी दुर्लभ और खतरनाक है।