शो पीस सुविधा:अस्पताल में लोकार्पण के 5 महीने बाद भी नहीं चल रही एंबुलेंस, रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया

जोधपुर11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
मेडिकल रिलीफ सोसायटी की बैठक तय नहीं। - Dainik Bhaskar
मेडिकल रिलीफ सोसायटी की बैठक तय नहीं।

विधायक पब्बाराम विश्नोई ने कोरोना काल में मरीजों व ग्रामीणों की सुविधा के लिए सीएचसी को आधुनिक सुविधा युक्त एंबुलेंस उपलब्ध करवाई थी। विधायक विश्नोई ने ही एंबुलेंस का 16 जून 2021 को एसडीएम, तहसीलदार, सरपंच सहित गणमान्य लोगों की उपस्थिति में लोकार्पण भी किया। मगर तब से एंबुलेंस एक कदम आगे पीछे नहीं हुई। वहीं के वहीं पड़ी है।

इसकी मुख्य वजह एंबुलेंस वाहन का पंजीकरण भी नहीं है। पंजीकरण के अभाव में एंबुलेंस सीएचसी के मुहाने पर शोपीस की भांति खड़ी धूल फांक रही है। जानकारी के अनुसार विधायक कोष से तकरीबन 20 लाख रुपए की लागत से इस एंबुलेंस की खरीदारी की गई थी। एंबुलेंस में सभी आवश्यक अत्याधुनिक उपकरण लगे हुए हैं। यह विडंबना ही है कि निबंधन और बीमा नहीं कराए जाने के कारण इस एंबुलेंस का उपयोग नहीं हो रहा है।

अभी आवश्यकता पड़ने पर 108 उपलब्ध नहीं होने पर लोगों को निजी वाहन किराए पर लेकर रेफर किये जाने वाले मरीज को अन्यंत्र लेना पड़ रहा है। जिससे मरीज के परिवारजनों पर अनाश्वयक रूप से आर्थिक बोझ़ पड़ता है। साथ ही समय पर उपचार भी नहीं मिल पाता।

एक दशक पुरानी एंबुलेंस हो रही कबाड़
स्थानीय अस्पताल प्रशासन आमजन की सुविधाओं को लेकर संवेदनहीन है। इसकी बानगी लाखों रुपए का कबाड़ में तब्दील बन रहा एंबुलेंस वाहन है। अस्पताल परिसर के पास बने आवासीय क्वार्टर कैंपस में बबूल झाड़ियों से एंबुलेंस वाहन ढक सा गया है। पिछले पहियों पर मिट्टी आ गई है। करीब दस साल से यह एंबुलेंस भी उस समय के विधायक ने दी थी। लेकिन इसका सही तरीके से उपयोग नहीं लेने की वजह से यह कबाड़ बन रहा है।

एंबुलेंस वाहन की आरसी बन जाने के बाद भी सड़क पर आने में काफी वक्त लगेगा। सीएचसी प्रशासन ने अभी तक एंबुलेंस के लिए चालक भी तय नहीं किया है। न ही इसके लिए ईंधन को लेकर कोई कार्ययोजना बनाई है। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस पर चालक रखने व ईंधन आदि की व्यवस्था मेडिकल रिलीफ सोसायटी की बैठक में निर्णय होगा।

एंबुलेंस आमजन के लिए किस प्रकार उपलब्ध रहेगी इसका भी निर्धारण किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन द्वारा मेडिकल रिलीफ सोसायटी की बैठक बुलाने का एजेंडा भी अभी तक तय नहीं किया है।

जैसलमेर-बीकानेर के बीच कस्बा, एंबुलेंस का फायदा नहीं
बाप कस्बा जैसलमेर व बीकानेर के बीच स्थित है। इस हाइवे से पंजाब-गुजरात जुड़े हुए हैं। ऐसे में यहां दिन भर वाहनों का आवागमन चलता है। जैसलमेर जाने वाले सैलानी व रामदेवरा जाने वाले श्रद्धालुओं की तादाद भी कम नहीं। वाहनों के आवागमन ज्यादा होने से कई बार हादसे होते हैं। ऐसे में घायलों को भी एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल रही। ज्यादा घायल होने पर आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों से एंबुलेंस बुलानी पड़ रही है।

रजिस्ट्रेशन के कागजात नहीं आए
एंबुलेंस वाहन का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इस वजह से उसका संचालन नहीं किया जा रहा है। सारे दस्तावेज आरटीओ कार्यालय में जमा है। जल्द ही उसका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। मेडिकल रिलीफ सोसायटी बैठक में चालक रखने, ईंधन का बजट निर्धारित किया जाएगा। एंबुलेंस न्यूनतम किमी दर से आमजन के लिए उपलब्ध होगी। यह दर भी तय की जाएगी।
- डॉ. ताराचंद पालीवाल, इंचार्ज, सीएचसी

मैंने बात की थी, कहा कि हम चला लेंगे
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। मैंने अस्पताल प्रशासन से पहले बात की थी तब उन्होंने कहा कि वे मेडिकल रिलीफ सोसायटी से एंबुलेंस को चला लेंगे। अगर इसके संचालन को लेकर कहीं अड़चन आई तो उसकी जानकारी भी नहीं दी गई। अब जो भी समस्या आ रही है उसे दूर करवा जल्द उपयोग में लिया जाएगा। बीसीएमएचओ व सीएचसी इंजार्च से बात करता हूं।

पब्बाराम विश्नोई, विधायक, फलोदी

खबरें और भी हैं...