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जोधपुर का मामला, जो आजकल चर्चा में:एक इंजीनियर का ट्रांसफर कैंसिल होते ही झुक गई एक रसूखदार नेता के सामर्थ्य पर उठने वाली अंगुलियां

जोधपुरएक महीने पहले
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जोधपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय। - Dainik Bhaskar
जोधपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय।
  • भाजपा के शासन में कांग्रेस नेता की गिरफ्तारी की पटकथा का लेखक था यह इंजीनियर

एक सुपरिटेंडेंट इंजीनियर का तबादला निरस्त होने से शहर के एक रसूखदार नेता के सामर्थ्य पर उठने वाली अंगुलियां झुक गई। इंजीनियर ज्ञानेश्वर व्यास के बीकानेर से जोधपुर तबादले की सूचना मंगलवार को आई थी। तबादले का आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। राजनीति में थोड़ी भी रुचि रखने वाले लोग इस सूचना से चौंक गए। जिसने भी यह सुना वह हैरत में पड़ गया।

यह मामला शहर के लिए कितना चर्चित है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जोधपुर के सोशल मीडिया में कुछ इस तरह के मैसेज वायरल हो गए। इनमें- पुराने शहर के हथाई बाजों को तो हथाई का नया टॉपिक मिल गया। 'ओ कीकर होय गियो..?', '..सरकार तो पोची निकळी..', 'हमकी तो लागतो हो कै ज्ञानजी पूरा पांच साल जोधपुर नई आ सके...', 'भासा.. थे हाल ज्ञानजी नै जाणो कोनी... ओ जिती पोंच बीजेपी में राके, उती कांग्रेस में बी राके...'। ऐसी ही बातचीत हथाइयों पर हो रही थी।

24 घंटे बाद ही माहौल बदल गया। बुधवार को जब यह तबादला निरस्त करने का आदेश आया तो इसकी कॉपी भी वायरल हो गई। हथाइयों पर कुछ इस तरह की बातचीत सुनाई देने लगी- 'भासा.. सरकार इती बी पोची कोनी...', 'पेली सरकार रै ध्यान में आया बिना ट्रांसपर करा लियो होवेला, पछै ठा पड़ता ई कैंसिल कर दियो सरकार...'।

पटकथा लेखक की भूमिका में थे

इस मुद्दे को ढंग से समझाने के लिए हम आपको थोड़ा पीछे ले जाना चाहेंगे। इस मामले की शुरुआत पिछली भाजपा सरकार के समय हुई थी। अचानक एन्टी करप्शन डिपार्टमेंट ने जोधपुर विकास प्राधिकरण के अफसरों की गिरफ्तारियां शुरू कर दीं। इससे पहले की कांग्रेस सरकार में जेडीए चेयरमैन रहे राजेंद्र सिंह सोलंकी को भी भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

कई इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी भी गिरफ्तार किया गया। इन सब के खिलाफ भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे। उस समय की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया। उस समय माना जा रहा था कि इस सब के पीछे बीजेपी की एक एमएलए के खासुल-खास इंजीनियर का दिमाग है। इस शातिर इंजीनियर ने ही कांग्रेस सरकार में प्रभावशाली रहे नेताओं और अफसरों को फंसाने का जाल बुना है। पूरी पटकथा का लेखक इसी इंजीनियर को माना गया था। राजेंद्र सिंह सोलंकी जब एसीबी की हिरासत में थे तो उनसे मिलने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आए थे।

सरकार बनते की कर दिया तबादला

विधानसभा चुनाव के बाद जब कांग्रेस सत्ता में लौटी तो इस इंजीनियर का तबादला जोधपुर से बाहर हो गया। यह पहले से तय माना जा रहा था। कहा जा रहा था कि कांग्रेस सरकार के पूरे 5 साल के दौरान इंजीनियर जोधपुर नहीं लौट सकेगा।

सोलंकी से सामर्थ्य पर उठने लगी थी अंगुलियां

माना तो यह भी जा रहा था कि इंजीनियर के खिलाफ भी कई तरह की जांच शुरू सकती है। इसलिए इंजीनियर के मंगलवार को सामने आए जोधपुर तबादले के आदेश से लोग हैरत में पड़ गए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नजदीकी लोगों में शुमार कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह सोलंकी के सामर्थ्य पर अंगुलियां उठने लगीं।

यह भी कहा जाने लगा कि क्या सोलंकी ने इंजीनियर को उसकी कथित कारस्तानियों के लिए माफ के दिया है? फिर अगले ही दिन आया तबादला निरस्त होने का आदेश। लोगों ने मान लिया कि न तो सरकार 'पोची' है और न ही सोलंकी कम असरदार हुए हैं।

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