मूर्ति की जगह मां दुर्गा का बैनर लगाकर पूजा:कारीगर नहीं आने से मूर्तियों की कमी हुई, पांडाल भी नजर आए खाली; 200 लोगों के लिए ही रखा जा रहा आयोजन

जोधपुर2 महीने पहले
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बंगाली समाज द्वारा दुर्गावाडी में दूर्गा पूजा। - Dainik Bhaskar
बंगाली समाज द्वारा दुर्गावाडी में दूर्गा पूजा।

जोधपुर में नेहरु पार्क स्थित दूर्गावाड़ी में बंगाली समाज इन दिनों मां देवी की मूर्ति की नहीं बैनर की पूजा कर रहे हैं। क्योंकि कोविड के चलते इस बार भी मूर्ति बनाने वाले कलाकार नहीं आए। ऐसे में पांडाल खाली नजर ना आए इसलिए मां दूर्गा के चित्र का बैनर लगा दिया। बंगाली समाज छठ से पूजा शुरु कर दशमी पर खत्म करता है। आज नवमी की पूजा और कल सिंदूर खेला के बाद पूजा का समापन होता है।

इस बार भी कोविड गाइडलाइन के कारण पूजा समारोह का आयोजन नहीं होना था। ऐसे में दुर्गावाड़ी में घट स्थापित कर घट की पूजा हो रही थी। लेकिन नवरात्रा के बीच में ही जैसे ही 200 लोगों की उपस्थिति के साथ आयोजन की अनुमति मिली वैसे ही पांडाल सजाया गया। लेकिन मूर्ति की कमी रही। पांडाल खाली ना लगे इसलिए बैनर लगा कर पूजा अर्चना शुरु कर दी।

बंगाल के कलाकार बनाते है मूर्ति

बंगाली समाज द्वारा दुर्गावाडी में देवी पूजन का मुख्य आकर्षण यहां की स्थापित देवी की मूर्ति रहती है। यहां स्थापित मूर्ति विशेष रुप से बंगाली कलाकार ही बंगाल से आकर बनाते है। और उसी मूर्ति की पूजा होती है। पिछले साल कोविड के चलते पंडाल नहीं सजा और मूर्ति की स्थापना नहीं हुई। इस बार भी कोविड गाइड लाइन के चलते बड़े आयोजन पर रोक लगी थी ऐसे में मूर्ति के कारीगर आए ही नहीं।

दशहरे पर सिंदूर खेला

दशहरे पर बंगाली समाज की महिलाएं सिंदूर खेला करती है। इस आयोजन में परिवार की खुशहाली के लिए एक दूसरे के ललाट पर सिंदूर लगाया जाता है। दशहरे पर सिंदूर खेला के आयोजन के बाद देवी पूजन का समापन होता है। हर वर्ष सिंदूर खेला का आयोजन बड़े स्तर पर होता है।

नेहरु पार्क दुर्गावाडी समिति के अध्यक्ष मिलन सेन गुप्ता, उपाध्यक्ष चंदन बैनर्जी ने बताया कि घट स्थापना के बाद से घट की पूजा हो रही है। आयोजन की नई गाइडलाइन के बाद दुर्गावाडी में सजावट की गई। अष्टमी की पूजा हुई और आज नवमी पर पूजा अर्चना होगी।