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रीट अभ्यर्थियों की मदद में ऐसी भी पहल:भामाशाह देवेंद्र बूड़िया ने जयपुर में अपनी पूरी बिल्डिंग युवाओं के ठहरने के लिए दी, भोजन व्यवस्था भी खुद कराएंगे

जोधपुरएक महीने पहले
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धर्मशाला में पर्याप्त स्थान नहीं होने पर की पहल, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में विश्नोई समाज के छात्र रुक सकेंगे। - Dainik Bhaskar
धर्मशाला में पर्याप्त स्थान नहीं होने पर की पहल, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में विश्नोई समाज के छात्र रुक सकेंगे।

26 सितंबर को प्रदेश में हो रही रीट परीक्षा को लेकर सरकार से लेकर अभ्यर्थियों के परिजन भी चिंतित है। सरकार इसके सफल आयोजन को लेकर व्यवस्थाओं में जुटी है। इसमें एक साथ 26.51 लाख अभ्यर्थी एक ही दिन में परीक्षा में बैठेंगे। ऐसे में आने जाने के संसाधनों से लेकर ठहरने व भोजन व्यवस्था के लिए हर समाज, स्वयंसेवी संस्थाएं जुटी हुई है। बहुत से समाजों ने अपने-अपने समाज के युवाओं के लिए हर जिले में बगीची, धर्मशालाओं में व्यवस्थाएं की है।

ताकि एक से दूसरे जिले में जाकर परीक्षा देने वाले युवाओं को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े। इसी कड़ी में अखिल भारतीय विश्नोई महासभा के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष व भामाशाह देवेंद्र बूड़िया ने विश्नोई समाज के छात्र-छात्राओं के लिए जयपुर स्थित अपनी पूरी बिल्डिंग ही समर्पित कर दी है। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में बेसमेंट से लेकर ऊपरी माले तक अलग-अलग जिलों के हिसाब से फ्लोर रिजर्व कर दिए हैं। किसी जिले से कम ज्यादा अभ्यर्थी हुए तो एक से दूसरे फ्लोर में एडजस्ट कर दिए जाएंगे।

बूड़िया ने बताया कि रीट अभ्यर्थियों के ठहरने व भोजन की व्यवस्था रहेगी। हालांकि विश्नोई समाज की धर्मशाला व अन्य जगहों पर भी समाज की लोग अभ्यर्थियों के ठहरने की व्यवस्था कर रहे हैं। मगर अभ्यर्थियों की संख्या का अनुमान किसी को नहीं है। ऐसे में सैकड़ों युवा परीक्षा देने पहुंच सकते हैं। इसलिए पूर्व तैयारियां रखी गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपील जारी कर समाज के अन्य सक्षम लोगों से कहा है कि ऐसे समय में अभ्यर्थियों का सहयोग किया जाए।

कोरोनाकाल में एक करोड़ से ज्यादा की मदद
भामाशाह बूड़िया समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण व गो सेवा में हर समय योगदान दे रहे हैं। अपना एक कृषि फार्म हिरणों व गायों के लिए समर्पित कर रखा है। हर साल लाखों रुपए वन्यजीवों व गोवंश के चारे पानी के लिए देते हैं। राजस्थान हरियाणा की कई गोशालाओं में सहयोग किया। कोरोनाकाल में दोनों लहर में एक करोड़ से ज्यादा की मदद की। पहली लहर में जहां 25 लाख रुपये मुख्यमंत्री सहायता कोष में दिए।

साथ ही 2000 हजार जरूरतमंद परिवारों को राशन व नकद सहायता दी। दूसरी लहर में सहयोगियों के साथ सबसे पहले कलेक्टर के माध्यम से ऑक्सीजन प्लांट के लिए कंपनी को 50 लाख का चेक सौंपा। इसके अलावा मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, भोजन, दवा व आर्थिक सहायता की।

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