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टैक्स में छूट देने का सुझाव:मेडिकल उपकरणों के दान पर जीएसटी से राहत मिले तो और भामाशाह हों प्रेरित

जोधपुरएक महीने पहले
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शहर सहित पूरे प्रदेश में कोरोना महामारी के दौर में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार के आह्वान पर भामाशाह दिल खोलकर दान कर रहे हैं। इसमें कोई ऑक्सीजन प्लांट लगवा रहे हैं, तो कोई कंसंट्रेटर या छोटे स्तर पर ऑक्सीमीटर, मास्क या अन्य उपकरण खरीदकर अस्पतालों या प्रशासन को दे रहे हैं, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार इन पर भी जीएसटी के रूप में कमाई कर रही है। ऐसी स्थिति को देखते हुए शहर के भामाशाहों ने एक सुझाव राज्य सरकार को भी दिया है कि यदि इन उपकरणों पर टैक्स छूट मिले, तो उस अतिरिक्त राशि से कई अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं।

आशापूर्णा रिसर्च एंड टेक्निकल सेंटर के संचालक करणसिंह उचियारड़ा ने इस संबंध में मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से चर्चा की और बताया कि लाइफ सेविंग इक्यूपमेंट व अन्य संसाधन सरकारी अस्पतालों में दान किए जा रहे हैं, लेकिन इन पर औसतन 12 से 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगता है। यदि सरकार इस पर छूट दे तो सरकारी अस्पतालों को ही इसका सीधा फायदा अतिरिक्त उपकरण मिलने के रूप में हो सकता है।

उचियारड़ा ने बताया कि मौजूदा हालात में जहां लगातार कोविड संक्रमण और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा भयावह रूप ले रहा है, ऐसे में भामाशाहों के सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। चूंकि, सभी भामाशाह अपनी व्यक्तिगत कमाई में से हर स्तर पर दान कर रहे हैं। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आशापूर्णा रिसर्च एंड टेक्निकल सेंटर द्वारा भी ऑक्सीजन प्लांट ऑर्डर किया गया है।

40 लाख कीमत के इस प्लांट पर साढ़े सात लाख रुपए जीएसटी के रूप में लग रहे हैं। इसी तरह जोधपुर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स एसोसिएशन की ओर से भी 25 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी सीधे चीन से आयात करने का ऑर्डर दिया गया है। इसी तरह, कई अन्य संस्थाओं-भामाशाहों ने विभिन्न स्तर पर करीब 6 करोड़ के लाइफ सेविंग इक्यूपमेंट ऑर्डर किए हैं और इन पर करीब 1.08 करोड़ रुपए बतौर जीएसटी का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। उचियारड़ा ने इसके लिए सरकार को एक प्रतिवेदन भी भेजा है।

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