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जेएनवीयू एकेडमिक काउंसिल की बैठक में हंगामा:ऑर्डिनेंस 317 बिना एकेडमिक काउंसिल में रखे राज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजना बड़ी गलती : प्रो. खींची

जोधपुर10 दिन पहले
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कई मुद्दों पर वीसी व पूर्व सिंडिकेट सदस्य के बीच तकरार, यूजीसी के ऑर्डिनेंस अनुसार शोधार्थियों की सॉफ्टकाॅपी शोधगंगा पर अपलोड नहीं, विवि में खुलेगा उर्दू विभाग। - Dainik Bhaskar
कई मुद्दों पर वीसी व पूर्व सिंडिकेट सदस्य के बीच तकरार, यूजीसी के ऑर्डिनेंस अनुसार शोधार्थियों की सॉफ्टकाॅपी शोधगंगा पर अपलोड नहीं, विवि में खुलेगा उर्दू विभाग।

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की मंगलवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक हंगामेदार रही। आरोपों के बीच विवि प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हुए कई बिंदुओं पर आईना दिखाया गया। बैठक में कुलपति और एक प्रोफेसर के बीच मुद्दों को लेकर तकरार हुई।

कुछ मुद्दों पर तनातनी और कुछ पर सहमति प्रदान करते हुए पास किया गया। इसमें नए सत्र से उर्दू विभाग शुरू करने पर सहमति प्रदान की गई। दरअसल जेएनवीयू की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में जो मुद्दे आए, उन पर विवि प्रशासन की तैयारी पूरी नहीं थी। ऐसे में कई चूक हुई।

बैठक शुरू होने के पश्चात पूर्व सिंडिकेट सदस्य प्रो. डीएस खींची ने ब्रिज कोर्स से पीएचडी करने वाले अभ्यर्थियों के संदर्भ में एकेडमिक काउंसिल के निर्णय को सिंडिकेट में बदलने को नियम विरुद्ध बताया और अपना विरोध जाहिर किया। कुछ अन्य मुद्दों पर भी खींची ने लगातार विरोध जताया। इसके चलते कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी खफा हो गए और खींची को बैठक से बाहर जाने के लिए कह दिया।

इस पर खींची ने आपत्ति जताते हुए कुलपति को खरी-खोटी सुनाई और नियमों का हवाला दिया तो कुलपति खुद बैठक से जाने लगे। बाद में कुलपति फिर सीट पर बैठ गए। खींची ने कुलपति को नियमों का हवाला दर हवाला दिया तो कुलपति ने तैश में आकर कह दिया कि मैं कुछ भी कर सकता हूं, मेरे पास सारे अधिकार हैं। खींची ने कहा कि ऑर्डिनेंस को बिना एकेडमिक काउंसिल की बैठक में रखे सीधे राज्यपाल के पास भेज कर बड़ी लापरवाही की गई है।

पीएचडी डिग्री के अनुमोदन मुद्दे सहित तीन प्रमुख बिंदुओं पर हुई तकरार
1. गत 27 जनवरी को हुई एकेडमी काउंसिल के मिनट्स कन्फर्मेशन के समय प्रो. खींची ने मुद्दा उठाया कि एकेडमिक काउंसिल द्वारा लिए गए निर्णय को सिंडिकेट ने बदल दिया। इसका उनको अधिकार नहीं है। एक्ट के अनुसार एकेडमिक काउंसिल एकेडमिक मैटर की सुप्रीम बॉडी है और वही एकेडमिक संबंधी निर्णय लेने के लिए अधिकृत है।

एकेडमिक निर्णय को सिंडिकेट किसी भी सूरत में नहीं बदल सकती। यदि सिंडिकेट ऐसे निर्णय से सहमत नहीं है तो कारण सहित रेफर बैक कर सकती है। इस मुद्दे पर कुलपति ने व्यवस्था दी कि सिंडिकेट एकेडमी काउंसिल की सुप्रीम बॉडी है और वह निर्णय बदल सकती है, जिस पर प्रो. खींची ने नोट ऑफ डिसेंट दिया।

2. प्रो. खींची ने इस पर आश्चर्य जाहिर किया कि विवि ने यूजीसी रेगुलेशन 2018 पर आधारित ऑर्डिनेंस 317 को बिना एकेडमिक काउंसिल से पास कराए गवर्नर के पास उनके अनुमोदन के लिए कैसे भेज दिया? कुलपति के पास उसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। इस पर भी प्रो. खींची ने नोट ऑफ डिसेंट दिया।

3. शोधार्थियों की पीएचडी डिग्री के अनुमोदन के मुद्दे पर एकेडमी काउंसिल ने निर्णय लिया कि इन शोधार्थियों में से ज्यादातर ने यूजीसी पीएचडी रेगुलेशन व विवि के पीएचडी ऑर्डिनेंस के अनुसार अपनी पीएचडी की सॉफ्ट कॉपी यूजीसी को भेजने के साथ शोधगंगा पर अपलोड करने की अनिवार्यता पूर्ण नहीं की है। जब तक यह कार्रवाई पूर्ण न हो तब तक इन डिग्री को आगे अनुमोदन के लिए न भेजा जाए।

कुछ सदस्यों सहित प्रो. खींची ने यह तथ्य उजागर किया कि विवि में यूजीसी पीएचडी रेगुलेशंस व पीएचडी ऑर्डिनेंस के कई प्रावधानों का लगातार उल्लंघन हो रहा है। यह गंभीर मामला है। विवि द्वारा दी जाने वाली हर पीएचडी की डिग्री की जांच होनी चाहिए कि इन्होंने यूजीसी के पीएचडी रेगुलेशंस व विवि के पीएचडी ऑर्डिनेंस के प्रावधानों की पूर्ण पालना की है या नहीं।

इन पर लगी मुहर
प्रो. अयूब खान ने विवि में उर्दू विभाग खोलने का प्रस्ताव रखा, जिसे पास किया गया।

विवि में समाज शास्त्र विभाग के अधीन स्नातक स्तर पर एनसीसी कोर्स स्ववित्त पोषित के आधार प्रारंभ करने पर मुहर लगी।

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