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1993 में विसर्जन विवाद के बाद उपद्रव का मामला:भाजपा नेता लोहिया की चिंता बढ़ी एफआईआर रद्द करवाने पहुंचे कोर्ट

जोधपुरएक महीने पहले
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  • हाईकोर्ट में लोहिया सहित अन्य आरोपियों की याचिका पर आज होगी सुनवाई

गणेश प्रतिमा विसर्जन मार्ग के विवाद को लेकर हुए उपद्रव के मामले में भाजपा नेता प्रसन्नचंद मेहता व मेघराज लोहिया सहित तीन जनों के विरूद्ध पुलिस 28 साल बाद भी नोटिस तामील नहीं करवा पाई। अब जब इस मामले में अन्य 23 जनों के विरूद्ध कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई और इन भाजपा नेताओं से अनुसंधान कर नतीजा रिपोर्ट पेश करने के संबंध में अधीनस्थ कोर्ट को पुलिस ने आश्वस्त किया तो भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ गई। भाजपा नेता लोहिया सहित कुछ अन्य आरोपी अब एफआईआर को ही अपास्त कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं।

इस मामले में शुक्रवार को जस्टिस पीएस भाटी की बैंच में सुनवाई होगी। गणेश प्रतिमा विसर्जन मार्ग को लेकर तीन दशक पहले हुए मामले में चार्जशीट पेश होते ही यह मामला एक बार फिर शहर में चर्चा में है। यह भी चर्चा है कि 28 साल में 14 अलग-अलग अनुसंधान अधिकारियों ने इस मामले की जांच की। लेकिन एक भी इस मामले में आरोपी मेहता, लोहिया व महेशचंद को पूछताछ के लिए हाजिर होने के नोटिस तामील नहीं करवा पाए।
वह सब कुछ जो आप कानून की नजर से जानना चाहते हैं
पुलिस ने कुल 26 आरोपियों में से 23 आरोपियों से जांच कर उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी। पुलिस ने जिन आईपीसी की धारा 147, 109, 336, 353, 332 व पीडीपी एक्ट की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया है, इसमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान है। ऐसे में मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ नहीं की जा सकती है।
नोटिस तामील होने के बाद उपस्थित होना जरूरी, नहीं तो गिरफ्तारी संभव
पुलिस पहले आरोपी को सीआरपीसी धारा 41 (क) के तहत नोटिस जारी कर उसे आरोपी से तामील करवाती है। अगर नोटिस तामील हो जाता है और आरोपी जांच के लिए पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं होता है तो गिरफ्तार कर पुलिस पूछताछ कर सकती है।
पुलिस पर पूछताछ का रहेगा दबाव

28 साल बाद भी पूछताछ के लिए जारी नोटिस तामील नहीं होने तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश होने पर अब पुलिस पर नोटिस तामील करवाने का दबाव रहेगा। पुलिस नोटिस जारी कर तामील करवाती है तो भाजपा नेता मेहता व लोहिया को उपस्थित होना पड़ेगा तथा नहीं होने की स्थिति में गिरफ्तारी भी हो सकती है।
ना अरेस्ट हो ना केस चले, इसलिए पहुंचे कोर्ट
लोहिया न तो पुलिस के समक्ष उपस्थित होना चाहते हैं ना केस लंबा चलाने के पक्ष में है। इसलिए उनके विरूद्ध दर्ज इस एफआईआर को ही अपास्त कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे। शुक्रवार को जस्टिस पीएस भाटी की बैंच में सुनवाई होगी। लोहिया की ओर से पूर्व एएजी व अधिवक्ता कांतिलाल ठाकुर पैरवी करेंगे।

इस मामले की जांच सीआईडी सीबी व पुलिस के करीब 14 अफसरों ने जांच की । इनमें सीआईडी के निरीक्षक गोपाल रामावत, विष्णुदेव, गोमसिंह, भंवरसिंह, नरेंद्र शर्मा, पुलिस निरीक्षक बृजलाल, रामाकिशन, माधोसिंह, गौतम जैन, हरजीराम, राजूराम, मदन बेनिवाल, प्रदीप कुमार व राजेश यादव ने जांच की। यादव ने ही चार्जशीट पेश की है।

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