राजस्थान और अफ्रीका का ये शहर देखने में एक जैसे:तंग गलियां, दीवारों का रंग, बाजार सब कुछ हूबहू

जोधपुरएक वर्ष पहलेलेखक: पूर्णिमा बोहरा
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दुनिया में एक जैसे दिखने वाले 2 इंसानों के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन क्या कभी किसी शहर का हमशक्ल देखा है। ऐसा ही शहर है मोरक्को का शेफचैओएन। वहां का रंग, गलियां और मौसम सबकुछ जोधपुर जैसा है। जोधपुर के स्थापना दिवस पर आज जानिए शेफचैओएन शहर के बारे में जो राजस्थान की ब्लू सिटी से 10 हजार किलोमीटर दूर अफ्रीका के देश मोरक्को में मौजूद है।

शैफचैओएन सिटी में भी जोधपुर की तरह तंग नीली गलियां और नीले मकान हैं। गलियों से लेकर घरों का रंग नीला होने की वजह भी एक जैसी है-तेज गर्मी। जाेधपुर और शैफचैओएन में गर्मी के सीजन में दीवारों को ठंडा रखने के लिए नीला पेंट कराया जाता है। इसके अलावा नीले रंग की एक वजह यह भी है कि इससे मच्छर नहीं होते। यह भी मान्यता है कि आसमान और मकान दोनों का रंग नीला होने से भगवान की कृपा बनी रहती है। इसके अलावा भी दोनों शहरों में कई समानताएं हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

जोधपुर और शेफचैओएन के घरों में नीले रंग का उपयोग करने का एक ही कारण है। दरअसल, गर्मी से बचने के लिए यहां घरों पर नीला रंग पोता जाता है।
जोधपुर और शेफचैओएन के घरों में नीले रंग का उपयोग करने का एक ही कारण है। दरअसल, गर्मी से बचने के लिए यहां घरों पर नीला रंग पोता जाता है।

दोनों शहरों में हैंडीक्राफ्ट का बिजनेस
शेफचैओएन में 200 होटल हैं तो जोधपुर में करीब 300 होटल। शेफचैओएन से लकड़ी, लोहे व चमड़े के हैंडीक्राफ्ट आइटम एक्सपोर्ट होते हैं। भारत में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट के मामले में जोधपुर प्रमुख शहर है। यहां भी लकड़ी व लोहे के आइटम सर्वाधिक एक्सपोर्ट होते हैं।

जोधपुर और शैफचैओएन, दोनों ही शहर पर्यटकों की पसंद है। जोधपुर में पूरे भारत से और विदेशी पर्यटक खूब आते हैं तो शैफचैओएन घूमना यूरोपियंस काफी पसंद करते हैं।
जोधपुर और शैफचैओएन, दोनों ही शहर पर्यटकों की पसंद है। जोधपुर में पूरे भारत से और विदेशी पर्यटक खूब आते हैं तो शैफचैओएन घूमना यूरोपियंस काफी पसंद करते हैं।
जोधपुर की गलियों में दीवारों को भी नीले रंग से रंगा गया है, यह कलाकारी पर्यटकों को खूब भाती है।
जोधपुर की गलियों में दीवारों को भी नीले रंग से रंगा गया है, यह कलाकारी पर्यटकों को खूब भाती है।

जोधपुर से 12 साल छोटा है शेफचैओएन
राव जोधा ने 1459 में जोधपुर की स्थापना की थी। इससे ठीक 12 साल बाद 1471 में मोरक्को के शेफचैओएन शहर की खोज हुई। जोधपुर में लोगों ने गर्मी से बचने के लिए चूने में नील मिलाकर मकानों को रंगना शुरू किया था। शेफचैओएन में 1930 के करीब स्पेन से निकले यहूदियों ने गहरे नीले रंग का उपयोग शुरू किया था।

मोरक्को के शैफचैओएन शहर में भी कई टूरिस्ट यहां की खूबसूरती देखने आते हैं। यहां भी जोधपुर की तरह दीवारों को नीले रंग से रंगा गया है।
मोरक्को के शैफचैओएन शहर में भी कई टूरिस्ट यहां की खूबसूरती देखने आते हैं। यहां भी जोधपुर की तरह दीवारों को नीले रंग से रंगा गया है।
शैफचैओएन शहर की हर गलियां और घर जोधपुर की तरह ही नीले रंग से रंगे गए हैं। यहां भी हैंडिक्राफ्ट का अच्छा बिजनेस होता है।
शैफचैओएन शहर की हर गलियां और घर जोधपुर की तरह ही नीले रंग से रंगे गए हैं। यहां भी हैंडिक्राफ्ट का अच्छा बिजनेस होता है।

भीतरी जोधपुर जैसा शेफचैओएन का मेडिना एरिया
जोधपुर के ब्रह्मपुरी, नवचौकिया, गुंदी मोहल्ला समेत कई भीतरी इलाकों में नीले रंग के मकान हैं। यहां के मकानों की बनावट भी शेफचैओएन के मेडिना इलाके से हू-ब-हू मिलती है। इन दोनों शहरों के साथ स्थानीय लोगों की पसंद भी एक-दूसरे से काफी मिलती-जुलती है। जोधपुर टूरिज्म के लिए पहचाना जाता है। शेफचैओएन भी यूरोपियन टूरिस्ट की मनपसंद जगह है।

जोधपुर की इन्हीं गलियों और खूबसूरती को देखने के लिए हर साल कई टूरिस्ट यहां पहुंचते हैं।
जोधपुर की इन्हीं गलियों और खूबसूरती को देखने के लिए हर साल कई टूरिस्ट यहां पहुंचते हैं।
यह जोधपुर की गलियां नहीं बल्कि शैफचैओएन शहर की गलियां है। पहली बार देखने पर जोधपुर जैसी ही लगती हैं।
यह जोधपुर की गलियां नहीं बल्कि शैफचैओएन शहर की गलियां है। पहली बार देखने पर जोधपुर जैसी ही लगती हैं।

जोधपुर की सजता है मार्केट
दोनों शहरोें के बाजार भी एक जैसे हैं। शेफचैओएन की पतली गलियों में छोटे-छोटे मार्केट हैं। स्थानीय स्तर पर बनने वाले कपड़े, रंगाई-छपाई, चमड़े के उत्पाद और वूलन गारमेंट पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। जोधपुर में भी घंटाघर, आडा बाजार और खांडा फलसा जैसे लोकल और संकरी गलियों के मार्केट शेफचैओएन जैसे ही हैं।

मोरक्को के इस शहर में कई यूरोपियंस वैकेशन मनाने यहां आते हैं। उनके लिए इस तरह के बाजार वहां सजते हैं। जोधपुर के भीतरी शहर की गलियों में भी ऐसे बाजार लगते हैं।
मोरक्को के इस शहर में कई यूरोपियंस वैकेशन मनाने यहां आते हैं। उनके लिए इस तरह के बाजार वहां सजते हैं। जोधपुर के भीतरी शहर की गलियों में भी ऐसे बाजार लगते हैं।
जोधपुर शहर गर्मी की वजह से खूब तपता है। यही कारण है कि इस यहां घरों को ठंडा रखने के लिए नील और चूने से मकान को रंगा जाता है।
जोधपुर शहर गर्मी की वजह से खूब तपता है। यही कारण है कि इस यहां घरों को ठंडा रखने के लिए नील और चूने से मकान को रंगा जाता है।
जोधपुर का नीला रंग उसकी पहचान बन चुका है। यहां की हर पेंटिंग में नीला रंग जरूर दिखता है।
जोधपुर का नीला रंग उसकी पहचान बन चुका है। यहां की हर पेंटिंग में नीला रंग जरूर दिखता है।
जोधपुर ओल्ड सिटी का हिस्सा कुछ पहाड़ी पर भी बसा है। इसी परकोटे में लोग नीले रंग का इस्तेमाल करते हैं।
जोधपुर ओल्ड सिटी का हिस्सा कुछ पहाड़ी पर भी बसा है। इसी परकोटे में लोग नीले रंग का इस्तेमाल करते हैं।
शैफचैओएन शहर जोधपुर से 12 साल पुराना है, लेकिन रंग से लेकर यहां का कल्चर और बाजार जोधपुर से मिलते-जुलते हैं।
शैफचैओएन शहर जोधपुर से 12 साल पुराना है, लेकिन रंग से लेकर यहां का कल्चर और बाजार जोधपुर से मिलते-जुलते हैं।

पहाड़ी पर बसे
जोधपुर की ओल्ड सिटी का एक हिस्सा और शेफचैओएन, दोनों ही पहाड़ी पर बसे हैं। दोनों शहरों का विहंगम दृश्य देखने पर एक जैसा लगता है। जितने मकान जोधपुर में नीले हैं, लगभग उतने ही शेफचैओएन में। जोधपुर पर्यटकों की पसंद है तो शेफचैओएन भी यूरोपियन टूरिस्ट की मनपसंद जगह है।

ड्रोन पर्सन: अक्की सिंह