पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

डूंगरपुर उपद्रव:मुकदमों के खिलाफ बीटीपी की याचिका खारिज कर्मचारी को गिरफ्तारी से पहले नोटिस देना होगा

जोधपुर7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • कार्यकर्ताओं के खिलाफ हो रहे मुकदमों के विरोध में बीटीपी ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका, जनहित याचिका दायर करने की दी नसीहत

डूंगरपुर में पिछले दिनों हुए उपद्रव को लेकर भारतीय ट्रायबल पार्टी बीटीपी के कार्यकर्ताओं के विरुद्ध पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसके अलावा कुछ सरकारी शिक्षक व नर्स-डॉक्टर आदि भी उनके खिलाफ होने वाली कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे। जस्टिस देवेंद्र कच्छवाह ने बीटीपी की याचिका को स्वीकार करने योग्य नहीं बताते हुए खारिज कर दी और उन्हें यथोचित बैंच के समक्ष जनहित याचिका दायर करने की नसीहत दी। हालांकि पार्टी ने इसी याचिका को जनहित याचिका के रूप में रैफर करने का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने नहीं माना। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को जांच में सहयोग करने तथा जांच अधिकारी के समक्ष अगले सात दिन में उपस्थित होने के निर्देश दिए। अगर उनके विरुद्ध कोई एविडेंस मिलते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, लेकिन इससे पहले पुलिस को उन्हें दस दिन का कारण बताओ नोटिस देना होगा।

बीटीपी की ओर से क्रिमिनल रिट पिटीशन पेश कर कोर्ट को बताया था कि पिछले दिनों हुए उपद्रव में अब पुलिस द्वारा याचिकाकर्ता पार्टी के राज्य स्तर के नेता से लेकर वार्ड स्तर तक के कार्यकर्ताओं को इस मामले में आरोपी बना लिया गया, जबकि पार्टी व उसके कार्यकर्ताओं का उपद्रव से कोई सरोकार नहीं हैं। आंदोलन को उनकी पार्टी ने प्रायोजित नहीं किया था और यह न ही राजनीतिक आंदोलन था। पार्टी के करीब 1000 रजिस्टर्ड पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं पर 37 मुकदमे दर्ज किए गए व निर्दोष लोगों को जेल भेजा जा रहा है। एएजी फर्जंद अली ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

इसका नेतृत्व एएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी कर रहे हैं। उन्होंने इस पर सहमति भी जताई कि बिना पर्याप्त एविडेंस के कोई भी गिरफ्तार नहीं हो सकता है। पार्टी के खिलाफ किसी तरह के आरोप नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार याचिकाकर्ता इस याचिका की बजाय यथोचित बैंच के समक्ष जनहित याचिका दायर कर सकते हैं। इस पर पार्टी के अधिवक्ता ने कोर्ट से आग्रह किया कि वे रजिस्ट्री को निर्देश दे कि इस याचिका को ही डिवीजन बैंच को जनहित याचिका के लिए रेफर कर दें। कोर्ट ने उनका यह आग्रह नहीं मानते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सभी आवश्यक संशोधन कर नए सिरे से यथोचित बैंच के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश करें और याचिका को खारिज कर दिया।

शिक्षक, नर्स-डॉक्टर को राहत,सात दिन में पेश होना होगा, साक्ष्य मिले तो होंगे गिरफ्तार

याचिकाकर्ता प्रमोद ननोमा सहित अन्य की ओर से बताया गया कि वे सभी शिक्षा विभाग में सरकारी कर्मचारी हैं। वे जांच में सहयोग करने तथा जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने को भी तैयार है। अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाए। जबकि दीपक घोघरा की ओर से कहा गया कि वे एक चिकित्सक है तथा उनकी पत्नी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थीं और उदयपुर के अस्पताल में भर्ती थी। वह उनके पास था, घटनास्थल पर नहीं था। एएजी ने कहा कि केवल दो या तीन एफआईआर राज्य सरकार ने दर्ज करवाई है बाकी अन्य एफआईआर पीड़ित या निजी व्यक्तियों द्वारा दर्ज करवाई है।

उन्होंने यह भी आश्वस्त किया है कि बिना पर्याप्त एविडेंस के उनको गिरफ्तार नहीं हो सकते हैं। जस्टिस देवेंद्र कच्छवाह ने याचिकाकर्ताओं का आग्रह मानते हुए इन सभी को जरूरी दस्तावेज के साथ जांच अधिकारी के समक्ष अगले सात दिन में उपस्थित होने के निर्देश दिए। अगर उनके खिलाफ एविडेंस मिलते हैं तो वे गिरफ्तार हो सकते हैं, लेकिन जांच एजेंसी द्वारा दस दिन पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आप अपने विश्वास तथा कार्य क्षमता द्वारा स्थितियों को और अधिक बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। और सफलता भी हासिल होगी। किसी प्रकार का प्रॉपर्टी संबंधी अगर कोई मामला रुका हुआ है तो आज उस पर अपना ध...

और पढ़ें