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एम्स के दो विभागों ने की सर्जरी:युवती के पैर से निकाली कैंसर गांठ; ब्रेकीथैरेपी कैथेटर से रेडियाेथैरेपी दी, बचाया पांव

जोधपुर14 दिन पहले
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सर्जिकल ऑन्कॉलॉजी व रेडिएशन ऑन्कॉलाॅजी विभाग ने मिलकर 20 साल की युवती के पैर में से कैंसर की गांठ निकालकर ब्रेकीथैरेपी कैथेटर तकनीक से रेडियोथैरेपी देकर पांव बचाया। एम्स डायरेक्टर डॉ. संजीव मिश्रा ने बताया कि भोपालगढ़ निवासी 20 वर्षीय युवती के पैर में कैंसर की गांठ थी। दूसरे अस्पताल में एक बार पहले ऑपरेशन होने के बाद यह गांठ फिर से बन गई थी।

उन्होंने बताया, ब्रेकीथैरेपी तकनीक इस प्रकार के ट्यूमर में ज्यादा कारगर साबित होती है क्योंकि यह रेडियोथैरेपी बैड पर दी जा सकती है। इसके साथ ही एक्सर्टनल बीम रेडियोथैरेपी भी दी जाती है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि मरीज के दाएं पैर के घुटने के नीचे काफी बड़ी कैंसर की गांठ फिबुला बोन से शुरू होकर आसपास के टिशू में फैलकर करीब दो तिहाई हिस्से को करीब 20 सेंटीमीटर तक घेरे हुए थी। ऑपरेशन गंभीर इसलिए था कि पैर में खून व तंत्रिका नसों से चिपकी हुई थी।

इस वजह से कैंसर पूरी तरह से निकालना व पैर को बचाना चुनौतीपूर्ण था। बायोप्सी कराने पर पता चला कि मरीज को ड्रोसार्कोमा नामक कैंसर की बीमारी थी। इसके बाद मरीज को सर्जिकल ऑन्कॉलोजी विभाग में डॉ. जीवन राम विश्नोई की देखरेख में भर्ती किया।

2 विभागों ने मिलकर किया ऑपरेशन
मरीज की सीटी स्केन और बोन स्केन करवाकर पहले यह देखा गया कि कैंसर दूसरे अंगों में तो नहीं फैला हुआ है। उसके बाद डॉ. संजीव मिश्रा के नेतृत्व में डॉ. जीवनराम विश्नोई, डॉ. पुनीत पारीक, डॉ. भारती देवनानी ने मिलकर इलाज निर्धारित किया। इलाज में पैर को घुटने के ऊपर से काटने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं था।

मरीज की एमआरआई और सीटी स्कैन देखने के बाद पैर बचाने की सर्जरी प्लान कर सर्जरी के दौरान ब्रेकीथैरेपी कैथेटर लगाने का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान पैर के फिबुला बोन के साथ में पैर के साइड व पीछे की मांसपेशियां व सॉफ्ट टिशू, स्किन व कुछ नसें भी निकाली गई। ऑपरेशन के दौरान ही रेडियोथैरेपी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. भारती देवनानी की टीम ने ब्रेकीथैरेपी कैथेटर लगाए। उनके साथ डॉ. अमित व डॉ. सुजोय थे।

सर्जरी के बाद रेडियोथैरेपी विभाग में डॉ. पुनीत पारीक, डॉ. भारती देवनानी, डॉ. आकांक्षा सोलंकी व फिजिसिस्ट सुमंता व जॉस्मीन ने सीटी सिम्युलेशन करके बारीकी से ट्यूमर बेड के लिए उपयुक्त प्लान की संरचना की। इसमें अत्याधुनिक मशीन से रेडियम रेडियो एक्टिव सोर्स से इंटर्स्टिशल ब्रेकीथैरेपी कैथेटर तकनीक से रेडियोथैरेपी दी गयी।

सर्जरी के पांच दिन बाद लगातार तीन दिन तक सुबह व शाम को मिलाकर 16 ग्रे मात्रा की रेडियोथैरेपी दी। उसके बाद कैथेटर निकालकर डिस्चार्ज कर दिया गया। घाव भरने व टांके निकलने के बाद लगभग एक महीने बाद बाह्य रेडियोथैरेपी का प्लान किया गया है।

इन्होंने किया ऑपरेशन
ऑपरेशन डॉ. जीवनराम विश्नोई के साथ सहायक आचार्य डाॅ. निवेदिता शर्मा, सहायक आचार्य डॉ. धर्माराम पुनिया, सीनियर रेजिडेंट डॉ. राजेंदर, डॉ. अल्केश, डॉ. अरविंद, एनेस्थेसिया से सहायक आचार्य डॉ. प्रियंका सेठी, सीनियर रेजिडेंट डॉ. वैष्णवी, नर्सिंगकर्मियों में तीजो चौधरी, इबा खरनीयोर व राजेंद्र थे।

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