बंद करो गांव के स्कूल:गांवों के बच्चों को एक खतरा यह भी, शिक्षकों को कोरोना पॉजिटिव होने पर नहीं मिलती क्वारेंटाइन लीव

जोधपुर4 दिन पहले
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हे सरकार! ये दोहरापन क्यों, शहर में कोरोना को गंभीर मान स्कूलें बंद कर दी, पर जो शहर से गांव जाकर पढ़ा रहे उनका क्या? - Dainik Bhaskar
हे सरकार! ये दोहरापन क्यों, शहर में कोरोना को गंभीर मान स्कूलें बंद कर दी, पर जो शहर से गांव जाकर पढ़ा रहे उनका क्या?

कोरोना की चपेट में शिक्षक भी आ रहे हैं। पिछले 11 दिनों में 17 टीचर और 16 स्टूडेंट्स पॉजिटिव आ चुके हैं, लेकिन दोहरे नियमों के चलते अधिकतर शिक्षक कोरोना पॉजिटिव आने के बाद भी स्कूल में महज इसलिए सूचना नहीं दे रहे, क्योंकि उनको कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर की तरह क्वारेंटाइन लीव नहीं मिलती। कोई टीचर पॉजिटिव आता है और वह संबंधित स्कूल में इसकी सूचना देता है तो उसको मेडिकल लीव लेनी या कैजुअल लीव लेनी पड़ेगी।

ऐसे में शिक्षकों के अकाउंट में पड़ी छुट्टियां कम होती हैं। छुटि्टयां खराब ना हों और नियमों में दोहरापन के कारण शिक्षक अपने ही विभाग को सही स्थिति की सूचना नहीं देते। वहीं इससे स्टूडेंट्स के भी खतरे में पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

शिक्षा विभाग में पौने 4 लाख कर्मचारी, इनमें पौने 3 लाख ग्रामीण क्षेत्र में
प्रदेश में सर्वाधिक पौने चार लाख कर्मचारियों का स्टाफ शिक्षा विभाग में है। इनमें से करीब पौने तीन लाख स्कूल स्टाफ तो ऐसा है जो रोजाना ग्रामीण क्षेत्र में स्थित स्कूलों में शहर से अप-डाउन करता है। इधर, राज्य सरकार ने शहर में कोरोना को गंभीर मानते हुए स्कूलों की छुट्टियां करने के आदेश दे रखे हैं, लेकिन जो शहर से गांव में बच्चों को पढ़ाने जाते हैं, उनके लिए कोई आदेश नहीं निकाला है।

गांवों में हो रहे विकट हालात
बालेसर ब्लॉक की राउमावि बेलवा में शहर से स्कूल स्टाफ क्रूजर से जाता है। यहां नौ कर्मचारी एक साथ पॉजिटिव आए, जबकि इस स्कूल में 750 स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इधर, स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में 5 स्टाफ व 15 बच्चे पॉजिटिव आ चुके हैं। गुरुवार को राउमावि तिंवरी में एक सैकंड ग्रेड टीचर और स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल बड़ली में एक छात्रा पॉजिटिव आई है, लेकिन इसको लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहा।

शिक्षक नेता बोले- दोहरी नीति क्यों?

  • राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री शंभूसिंह मेड़तिया का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में एक टीचर कोरोनाकाल में भी फ्रंटलाइन वर्कर की तरह काम कर रहा है, जबकि मेडिकल या पुलिस का कर्मचारी पॉजिटिव आता है तो उसको क्वारेंटाइन लीव दी जाती है, तो एक शिक्षक से मेडिकल लीव या सीएल क्यों कटवाई जा रही है?
  • राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश चौधरी का कहना है कि फिजिकल टीचर्स भी कोरोनाकाल में बेहतरीन सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन कोई शिक्षक कोरोना पॉजिटिव आता है तो उसको मेडिकल लीव या सीएल ही क्यों कटवानी पड़ रही है? यह दोहरा नियम गलत है।
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