ऑनलाइन का ऑफलाइन इफेक्ट:स्कूल आते हुए उत्साह दिख रहा, क्लास में लिखने-समझने में आ रही दिक्कतें

जोधपुर2 महीने पहले
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  • 18 माह बाद स्कूल लौटे बच्चों का बदला व्यवहार

करीब 18 महीनों के बाद छोटे बच्चों के लिए स्कूल खुले करीब एक हफ्ता हो गया है और इस दौरान कई टीचर्स और प्रिंसिपल्स ने बच्चों के व्यवहार में बदलाव महसूस किया है। हालांकि लंबे समय तक घर पर ऑनलाइन पढ़ाई चलती रही लेकिन हाल ही जब वे स्कूल में अपनी-अपनी क्लासेज में पहुंचे तो उनमें उत्साह के साथ आश्चर्य भी दिख रहा था।

टीचर्स-प्रिंसिपल्स बच्चों के बदले हुए व्यवहार को नॉर्मल करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने शहर की 10 स्कूलों के टीचर्स-प्रिंसिपल्स से बात की तो पता चला कि स्कूल आने का उत्साह तो बच्चों में खूब झलक रहा है लेकिन कुछ हद तक उनके बैठने, लिखने-पढ़ने और समझने की क्षमता पर असर पड़ा है।

लंबे समय बाद स्कूल आए बच्चे दिख रहे हैं उत्साहित

ऐस इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल मंजू भाटी ने बताया कि लंबे समय बाद स्कूल आ रहे बच्चों का उत्साह गजब का है। हालांकि नर्सरी में जिस बच्चे को स्कूल आना था, वह प्रेप में आ रहा है। करीब दो साल तक घर पर ही पढ़ा और ज्यादातर वक्त दो या तीन टीचर्स ही देखे थे तो स्कूल में वे यह नहीं समझ पा रहे कि प्रिंसिपल कौन हैं, वहां के नियम-कायदे क्या हैं और स्कूल में कैसे पढ़ाई होती है।

हालांकि बैग-बॉटल उठाए स्कूल आने से उत्साहित हैं। पैरेंट्स भी चाहते हैं कि बच्चे ऑफलाइन पढ़ाई करें। दिल्ली पब्लिक प्राइमरी स्कूल की प्रिंसिपल विजयलक्ष्मी राठौड़ ने बताया कि इतने लंबे समय तक घर में रहने, ऑनलाइन पढ़ने का असर निश्चित रूप से बच्चों पर पड़ा है। अब तो पांचवी-छठी के बच्चे भी स्कूल आते समय ऐसे उत्साहित हैं जैसे पहली बार स्कूल आ रहे हों। हालांकि पैरेंट्स भी ज्यादातर बच्चों का स्कूल भेजना चाह रहे हैं लेकिन थोड़ा सा घबरा रहे हैं।

अभी एक हफ्ता ही हुआ तो जल्द ही सब नॉर्मल हो जाएगा। स्कूल में टीचर और सेकंड क्लास में पढ़ रही बच्ची की मां बरखा कुंपावत ने बताया कि स्कूल में बच्चों का व्यवहार तो ज्यादा बदला नहीं दिखा है बल्कि मेरी बेटी भी स्कूल जाने के लिए उत्साहित दिख रही है। अभी हम बच्चों को अल्टरनेटिव डे बुला रहे हैं, लेकिन पैरेंट्स चाहते हैं कि हम बच्चों को रोज बुलाएं। बच्चे भी रोज स्कूल आने की जिद कर रहे हैं।

चौथी के बच्चों को नर्सरी-प्रैप जैसे सिखाना पड़ रहा

लक्की इंटरनेशनल की प्रिंसिपल रागिनी कच्छवाह का कहना है कि चूंकि ऑनलाइन स्टडी के दौरान होमवर्क मिल रहा था तो लिखने की आदत इतनी प्रभावित नहीं हुई लेकिन पढ़ने की आदत छूट गई है। बच्चों का अटेंशन भी पहले की बजाय काफी कम दिख रहा है। हालांकि अभी शुरुआती दिन है तो टीचर्स बच्चों को इस माहौल में ढालने के लिए किस्से-कहानियां सुना रहे हैं और उनसे करीब होने की कोशिश कर रहे हैं।

बीडीआरके स्कूल में वाइस प्रिंसिपल कपिल व्यास ने बताया कि बच्चों की लिखने की क्षमता पर असर दिख रहा है। लगातार बैठने में भी थोड़ा असर दिख रहा है। सबसे ज्यादा असर तो बच्चों के समझने की क्षमता पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि पांचवीं में पढ़ रही मेरी बेटी का भी ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से व्यवहार बदल-सा गया है।

वाइब्रेंट स्कूल की स्वरा शर्मा ने बताया कि दो साल बाद बच्चे स्कूल आए तो काफी बच्चों की याददाश्त में कमी दिखी। वे पिछली क्लास में जो स्कूल में पढ़े थे, वे भी भूल चुके हैं। कुछ बच्चों की याददाश्त तो इतनी प्रभावित हुई कि चौथी-पांचवीं के बच्चों को भी नर्सरी-प्रैप वालों की तरह सिखाना पड़ रहा है।

निजी स्कूल की टीचर वंदना शर्मा ने बताया कि अभी बच्चे स्कूल में तीन-चार घंटे ही बैठ रहे हैं और ज्यादा लंबा वक्त नहीं है। कई बच्चों के फ्रेंड्स नहीं है और डर की वजह से भी बच्चों का व्यवहार बदला हो।

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