संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर अधिवक्ता परिषद का आयोजन:गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है भारत का संविधान-जस्टिस भाटी

जोधपुर11 दिन पहले
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न्यायाधीश डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्रसिंह भाटी। - Dainik Bhaskar
न्यायाधीश डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्रसिंह भाटी।

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्रसिंह भाटी ने कहा कि भारतीय संविधान दुनिया के समस्त देशों के संविधान की तुलना में सर्वश्रेष्ठ है। संविधान देश के नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है। वे गुरुवार को संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर अधिवक्ता परिषद जोधपुर इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की तुलना प्राणवायु से की जा सकती है। जैसे बिना ऑक्सीजन के कोई व्यक्ति ज़िंदा नहीं रह सकता, वैसे ही बगैर संविधान के भी व्यक्ति का जीवन असंभव है।

उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और संवर्द्धन में न्यायपालिका की भूमिका पर भी विस्तार से विचार व्यक्त किए। जस्टिस भाटी ने कहा कि संविधान सभी को समानता से जीवन यापन करने का अधिकार देता है। इसी से सामाजिक उत्थान की नींव पड़ती है। उन्होंने बबीता पूनिया बनाम भारत सरकार के प्रकरण का उदाहरण देते हुए भारतीय सेना में महिलाओं को समान अवसर दिए जाने को संविधान की उदारता और सफलता बताया। साथ ही अधिवक्ता समुदाय को राष्ट्र की शक्ति करार देते हुए संविधान के नैतिक मूल्यों को बचाए रखने के लिए युवा अधिवक्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघ चालक हरदयाल वर्मा व बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष राजेश पंवार ने भी विचार व्यक्त किए। शुरुआत में अतिथियों ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया। अंत में अधिवक्ता परिषद के प्रांत संयोजक दीपक चौधरी ने आभार व्यक्त किया। संचालन परिषद के सह संयोजक श्याम पालीवाल ने किया। इस अवसर पर पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता कांतिलाल ठाकुर, श्यामसुंदर लदरेचा, केंद्र सरकार के पूर्व एएसजी अनिल राजवंशी, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नाथूसिंह राठौड़, हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल मुकेश राजपुरोहित, हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील जोशी, पूर्व राजकीय अधिवक्ता ओपी बूब, बंशीलाल भाटी, अधिवक्ता परिषद के अजय व्यास, कमलेश रावल, देवकीनंदन व्यास, अल्केश अग्रवाल एवं पीएस चूंडावत सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे।

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