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जलदाय विभाग:कर्मचारियों पर कोरोना की मार, जलापूर्ति पर मंडराने लगे संकट के बादल, विभाग को पता ही नहीं कितने हुए संक्रमित

जोधपुर3 महीने पहले
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  • इंजीनियरों की संस्था ने फिलहाल योजनाओं पर रोक लगाने की रखी मांग

पूरे प्रदेश में शहरी सीमा लांग गांव-ढाणी तक पांव पसार चुके कोरोना की मार से जलदाय विभाग भी अछूता नहीं रह पाया है। बड़ी संख्या में विभाग के अधिकारी व तकनीकी कर्मचारी कोरोना की चपेट में आते जा रहे है। शेष कर्मचारियों को भीषण गर्मी के मौसम में जलापूर्ति बरकरार रखने में जोर आ रहा है। ऊपर से आला अधिकारी जल जीवन मिशन की योजनाओं के प्रोजेक्ट तैयार करने का दबाव बना रहे है। विभाग के पास फिलहाल कोई आंकड़ा नहीं है कि प्रदेश में उसके कितने कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ चुके है। ऐसे में विभाग ने अब सभी स्थानों से रिपोर्ट मांगी है। इन विषम परिस्थितियों में जलापूर्ति बरकरार रखने में जुटे सभी इंजीनियरों में विरोध के स्वर खदबदाने लगे है।

जोधपुर में जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहले से इंदिरा गांधी नहर में अब तक का सबसे बड़ा 70 दिन का क्लोजर चल रहा है। इस कारण सामान्य जलापूर्ति बनाए रखने में जोर आ रहा है। ऊपर से अधिकारी लक्ष्य आधारित परियोजनाओं को पूरा करने का दबाव बना रहे है। रही-सही कसर कोरोना ने पूरी कर रख दी है। जोधपुर में इंजीनियरों व तकनीकी कर्मचारियों में बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित हो चुके है। यदि कर्मचारी ठीक है तो उसके परिवार का कोई सदस्य पॉजिटिव आ चुका है। ऐसे में उसे भी आइसोलेशन में रहना पड़ रहा है। वहीं, बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से सभी कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ा हुआ है।

दिनों दिन विकट होते हालात के बीच जलदाय विभाग के ग्रेजुएट इंजीनियर एसोसिएशन(गीयर) ने विभाग के सचिव को पत्र भेज हालात से अवगत कराते हुए सहयोग मांगा है। पत्र में कहा गया है कि इस महामारी में गत कुछ दिन में हमने अपने कुच अभियंताओं व तकनीकी कर्मचारियों के साथ ही कुछेक के परिजनों को खोया है। हालात ऐसे है कि विभाग के पास संक्रमित होने वाले अपने कर्मचारियों की सूची तक उपलब्ध नहीं है। गीयर ने साफ कहा कि वर्तमान में चल रही विषम परिस्थितियों में जलापूर्ति व्यवस्था बरकरार रखने में ही दिक्कतें आ रही है। इसके बावजूद हमारे साथी पूरे प्रयास कर रहे है। ऐसे में सभी कर्मचारियों के वैक्सीनेशन के साथ ही संक्रमित होने पर इलाज की समुचित व्यवस्था कराई जाए। ऐसे में फिलहाल सिर्फ जलापूर्ति व्यवस्था बरकरार रखने पर फोकस किया जाए। योजनाओं के कार्यों पर विराम लगाया जाए। ताकि अभियंताओं पर दबाव कम हो सके और वे अपना पूरा ध्यान जलापूर्ति पर केन्द्रित कर सके।

अभियंता संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश बाफना का कहना है कि हम विभिन्न स्तर पर अपना पक्ष रख चुके है और सहयोग मांग रहे है। लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में हमें मजबूरी में असहयोग की राह पकड़नी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि तकनीकी व मंत्रालियक कर्मचारियों को जलापूर्ति के अतिरिक्त अन्य कार्यों में ना लगाया जाए। उनको कोरोना वारियर मानते हुए टीकाकरण किया जाय और बीमारी की अवस्था में पूर्ण उपचार और सुविधा उपलब्ध कराई जाए।