भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:कोरोना टला नहीं फिर भी टीके को लेकर लोगों में टिप्पणियां-भ्रांतियां, विभाग की उदासीनता

जोधपुर9 महीने पहले
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एमडीएम हॉस्पिटल में शनिवार को खाली पड़ा वैक्सीनेशन सेंटर। - Dainik Bhaskar
एमडीएम हॉस्पिटल में शनिवार को खाली पड़ा वैक्सीनेशन सेंटर।
  • बुजुर्ग समझ लें कि वैक्सीन से ही बचाव
  • बड़ों काे टीका लगवाने का जिम्मा उठाएं युवा

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जोधपुर समेत पूरे प्रदेश में 1 मार्च से बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से ग्रस्ति आमजन के लिए कोरोना वैक्सीनेशन अभियान शुरू हुआ। 11 दिनों में जोधपुर में केवल 11.1 प्रतिशत बुजुर्गों ने ही वैक्सीनेशन करवाया है। जबकि दूसरी ओर महाराष्ट्र, केरल, पंजाब सहित कई प्रदेशों में कोरोना तेजी से फैल रहा है। शहर में भी कोरोना संक्रमित बढ़ने लगे हैं।

यानी खतरा अभी तक टला नहीं है, इसके बावजूद 60 वर्षी से अधिक के बुजुर्ग एवं 45 से 59 वर्ष के गंभीर बीमारियों वाले नागरिक टीकाकरण करवाने आगे नहीं आ रहे हैं। भास्कर ने इसके कारण जानने के लिए विभिन्न वैक्सीनेशन सेंटर्स पर जाकर वहां आए बुजुर्गों से पूछा कि- वे टीका लगवाने में इतना लेट क्यों हो गए? साथ ही उनसे पूछा कि उनके हमउम्र परिचिताें में किसने और क्याें टीका नहीं लगवाया।

इसके साथ ही भास्कर ने टीकाकरण में लगे स्टाफ से भी लोगों के सुस्त रुझान का कारण जाना। सामने आया कि वैक्सीनेशन को लेकर भ्रांतियों के साथ हिचकिचाहट है। साथ ही विभाग ने भी जितनी मेहनत कोरोना संक्रमितों का पता लगाने एवं होम आइसोलेशन के वक्त की थी, वैसी अब नहीं हो रही। ना तो प्रचार-प्रसार किया जा रहा है और ना ही प्रोत्साहित। इसके साथ ही युवा भी अपनी वरिष्ठ पीढ़ी को टीकाकरण के लिए समझाकर नहीं ले जा रहे।

जानिए: कैसी गलतफहमियों में लोग कोरोना को इतने हल्के में ले रहे हैं...

1. भ्रांतियां-भय व्याप्त हैं

लोगों में भ्रांति है कि टीका उनको बीमार कर रहा है। एमडीएम, एमजीएच, उम्मेद और रेजिडेंसी सीएचसी पर वैक्सीन लगाने वाले नर्सिग स्टाफ, कार्यरत डॉक्टर और लगाने आने वाले बुजुर्गों से जब वैक्सीन अभियान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बुजुर्गों में वैक्सीन लगाने को लेकर बीमार होने, बुखार आने, उल्टी आदि का डर है। कुछ लोगों को लगता है कि वैक्सीन लगाने से साइड इफेक्ट हो सकते हैं। यह भी सामने आया कि कि प्रचार प्रसार और जागरुकता के कमी से बुजुर्गों में कोविड वैक्सीन को लेकर भय है।

2. सोचते हैं, स्वस्थ हैं तो क्यों लगवाए?

एमडीएम में महामंदिर से वैक्सीन लगवाने आए महेन्द्र सिंह ने बताया कि वैक्सीन को लेकर आसपास और बुजुर्गों का ग्रुप कहता है कि हम स्वस्थ हैं तो वैक्सीन लगवाने क्यों जाएं। जब अभी तक कुछ नहीं हुआ तो आगे भी कुछ नहीं होगा। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि कोरोना अब है ही नही तो फिर वैक्सीन क्यों लगाएं।

3. प्रचार-प्रसार व प्रयासों में कमी

विभाग के टीकाकरण के प्रचार-प्रसार में कमी एवं जागरुकता फैलाने के प्रयासों में कमी भी कारण है। साथ ही एक कारण बढ़ती गर्मी भी है। सुबह के पहले कुछ घंटों में 100 से 130 लोग आते हैं। दोपहर में गर्मी के वक्त सेंटर खाली होते हैं।

विभाग को पोलियो अभियान की तरह ड्राइव करना होगा

विभाग की ओर से वैक्सीन का प्रचार प्रसार धरातल पर कहीं नहीं दिखाई दे रहा है। वैक्सीन लगाने आए बुजुर्गों और डॉक्टरों का कहना है कि पोलियो की वैक्सीन आने से लेकर अब तक वैक्सीन का प्रचार टीवी, प्रिंट, रेडियो के माध्यम से आक्रामक तरीके से किया जाता है। वैसा ही आक्रामक प्रचार कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर करना भी जरूरी है।

वैक्सीन लगाने के लिए यूथ अपने घर के बुजुर्गों को साथ लेकर जाएं

यूथ बुजुर्गो को साथ लेकर वैक्सीन लगाने जाएं। यूथ बचपन याद करें, चोट लगने पर माता-पिता इलाज के लिए लेकर जाते थे और मनाकर या समझाकर टीका या दवाई देते थे। अब यूथ भी जिम्मेदारी समझें। माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी को वैक्सीन लगवाने साथ लेकर जाएं।

भास्कर एक्सपर्ट : डॉ. पंकज भारद्वाज, वयस्क टीकाकरण इंचार्ज

वैक्सीनेशन से नहीं घबराएं, लगवाने के लिए आगे आएं

वैक्सीन अभियान कोई भी हो कम होने के दो बड़े कारण होते हैं। पहला लोगों में वैक्सीन को लेकर भय। दूसरा बड़ा कारण होता है कि स्वस्थ व्यक्ति मानता है कि उसे वैक्सीन की क्या जरूरत, जबकि वैक्सीन स्वस्थ व्यक्ति को बीमारी से बचाने के लिए ही लगाई जाती है। कोविड वैक्सीन को लेकर लोगों में जो भी भ्रांति हैं, उन्हें खत्म करने की जरूरत है। 50 प्रतिशत बुजुर्ग तो इसलिए नहीं जा रहे कि वे स्वस्थ हैं।

उन्हें यह भ्रांति है कि वैक्सीन केवल बच्चों के लिए होती है। लोगो में यह भी भ्रांति है कि वैक्सीन नए स्टेन के लिए कारगर नहीं है। जबकि ऐसा नही है, वैक्सीन ही कोविड से बचाएगी। हर्ड इम्युनिटी बनने काे लेकर भी गलतफहमियां हैं। सबको समझने की जरूरत है कि वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है, इससे घबराएं नहीं, लगवाने आगे आएं।

काेराेना: 14 नए राेगी मिले, 19 डिस्चार्ज

जोधपुर. शहर में शनिवार काे काेराेना के 14 नए राेगी मिले, 19 काे डिस्चार्ज किया। माैत नहीं हुई। 11 व 12 मार्च को एक-एक संक्रमित महिला की मौत हुई थी, जिसकी जानकारी चिकित्सा विभाग ने नहीं दी। इसके मार्च के 13 दिनों में 217 रोगी मिल चुके हैं और 182 रोगी ठीक हो चुके हैं। इस दौरान तीन मौतें हुई है। अब तक कुल संक्रमितों का आंकड़ा 60,996 पहुंच चुका है। इनमें से 56,393 रोगी ठीक हुए हैं और 878 मौतें हो चुकी हैं।

दो मौतें हुई, विभाग ने नहीं बताई: एम्स में गुरुवार व शुक्रवार को कोरोना से लगातार दो दिन दो महिलाओं की मौत हुई। ये जानकारी चिकित्सा विभाग ने नहीं दी। गुरुवार को आनंद कंवर (53) ने दम ताेड़ा था। उन्हें 8 मार्च काे भर्ती किया था। उन्हें डायबिटीज, बीपी व थाइराइड की बीमारी थी। अगले दिन शुक्रवार काे धवा की विश्नाेई मोहन देवी (45) की मौत हुई। वे 9 मार्च को एम्स में भर्ती हुई थी और टाइप टू डायबिटीज से भी पीड़ित थी।

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