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मौसम:निगम बरसाती पानी निकासी पर हर साल 4 कराेड़ खर्च रहा, फिर भी सिर्फ 8.3 मिमी बारिश में बह निकली सड़कें

जोधपुर5 महीने पहले
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ड्रेनेज है नहीं, पानी यूं ही बाहर निकलता है - Dainik Bhaskar
ड्रेनेज है नहीं, पानी यूं ही बाहर निकलता है
  • बारिश के लिए फाइलाें में तैयार है निगम, बारिश में हर साल 31 से ज्यादा जगह होता है जलभराव

शहर में शुक्रवार दोपहर तेज बारिश हुई, जाे 8.3 एमएम दर्ज हुई। शहर के लाेगाें काे गर्मी और उमस से राहत मिली, लेकिन सड़कें बह निकलीं। कारण- शहर में पूरी ड्रेनेज लाइन ही नहीं बिछी हुई है। नगर निगम का दावा है कि वह बरसाती पानी की निकासी के लिए रह साल तीन से चार कराेड़ रुपए खर्च करता है।

इसके बावजूद थाेड़ी की बारिश में सड़कें जलमग्न हाे गईं। ऐसे में शहर के लाेग सहमे हुए हैं कि मूसलाधार बारिश हुई ताे कैसे काबू पाएंगे। शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए 95.6 किमी लंबे ड्रेनेज की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 63.9 किमी लंबी लाइन ही बिछी हुई है।

अगर, शासन-प्रशासन शहर में 31 किमी लंबा ड्रेनेज विकसित कर देता तो जलभराव की स्थिति ही नहीं बनती। यह तब की बात थी जब जोधपुर में एक ही नगर निगम था, लेकिन अब निगम उत्तर-दक्षिण में बंट गया है, ऐसे में अफसर उत्तर-दक्षिण की बात कहकर बचते नजर आएंगे और इसके गंभीर परिणाम शहर काे भुगतने पड़ेंगे।

ऐसा नहीं है कि निगम के पास पैसों की कमी है, निगम इन बरसाती नालों की सफाई के दावे करते हुए हर साल तीन से चार करोड़ रुपए खर्च करता है, लेकिन बारिश हर साल दावों की पोल खोलकर रख देती है। पिछले साल हुई तेज बारिश से मुख्य सड़कें जलमग्न हाे गई थीं और बड़े-बड़े गड्ढे हाे गए थे।

15 साल पहले बना ड्रेनेज का मास्टर प्लान
निगम ने ताेड़-मराेड़ कर लागू कर लिया

2002-05 में शहर के ड्रेनेज का मास्टर प्लान तैयार करने का काम हैदराबाद की कंसल्टेंट कंपनी पीबीएस को सौंपा था। इस पर करीब 50 लाख रुपए खर्च भी हुए थे। इसमें शहर के 13 बड़े बरसाती नालों काे जोजरी से जोड़ना था, लेकिन जमीन विवाद, अवाप्ति का झंझट और पैसों की कमी के चलते निगम ने यह लागू ही नहीं हुआ।

इसके बाद निगम ने इसे ताेड़-मराेड़ कर अपने हिसाब से सिर्फ छह प्रमुख नालों को जोजरी से जोड़ने का प्लान बनाया, लेकिन इनमें से सिर्फ नेहरू पार्क नाले के निर्माण का ही काम शुरू हो पाया। शेष काम अभी भी या तो अटके हुए हैं या चालू नहीं हो पाए हैं।

इस मामले में कई बार हाईकोर्ट भी शासन-प्रशासन को फटकार लगा चुका है, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। हालांकि निगम ने 30 किमी लंबे कच्चे नालाें के हिस्साें पर पक्का निर्माण जरूर करवाया, जिस पर 12-15 करोड़ खर्च हुए थे।
जिस दिन सारे नाले जोजरी से जुड़ जाएंगे जलभराव समस्या खत्म हाे जाएगी

  • ड्रेनेज के मास्टर प्लान के मुताबिक शहर के प्रमुख बरसाती नालों को जोजरी से जोड़ने का काम जिस दिन पूरा कर लिया जाएगा, उसी दिन जलभराव की स्थिति लगभग समाप्त हो जाएगी। इसके लिए शासन-प्रशासन को इनके रास्ते में आ रही अड़चनों को दूर करना होगा। - महेश शर्मा, रिटायर्ड एसई, नगर निगम जोधपुर (बरसाती नालों पर लंबे समय तक काम किया और ड्रेनेज के मास्टर प्लान तैयार करने में महती भूमिका निभा चुके हैं)

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