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बदलाव:लाखों खर्च कर वापस निगम दक्षिण में शिफ्ट हाेगा उत्तर का ऑफिस

जोधपुर2 महीने पहले
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  • लौट के उत्तर निगम पॉलीटेक्निक परिसर आया
  • कारण : पुराने भवन में सीमित जगह, पार्किंग का अभाव समस्या
  • हकीकत: आलीशान भवन की जगह पुराना ऑफिस रास नहीं आया

लाखों रुपए खर्च कर पांच माह पहले ही सोजती गेट स्थित पुराने भवन में शिफ्ट हुए उत्तर नगर निगम ऑफिस को एक बार फिर पॉलीटेक्निक कॉलेज परिसर में स्थित निगम के नए भवन में शिफ्ट करने की राज्य सरकार ने देर रात को इजाजत दे दी है। इसके बाद नगर निगम ने भी इसका प्लान तैयार कर लिया हैैं।

पांच माह पहले ही नए भवन से पुराने भवन में शिफ्ट हुए उत्तर निगम को दुबारा पॉलीटेक्निक कॉलेज में शिफ्ट करने के पीछे जनप्रतिनिधियों, अफसरों व कर्मचारियों के बैठने की सीमित जगह व पार्किंग की समस्या को बड़ा कारण माना जा रहा है, लेकिन हकीकत में जनप्रतिनिधि व अफसरों को आलीशान भवन की जगह पुराना व जर्जर ऑफिस रास नहीं आ रहा था।

हालांकि राज्य सरकार की ओर से दो निगम-दो मेयर के फैसले के दस माह बाद उत्तर निगम के कार्यालय को तत्कालीन आयुक्त एसके ओला ने आनन-फानन में सोजती गेट स्थित पुराने भवन में शिफ्ट कर दिया गया था। तब इसका कुछ अफसरों व कर्मचारियों ने दबे स्वर में विरोध भी किया, इसका कारण यह था कि इस भवन के आधे हिस्से पर सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी का कब्जा हैं, ऐसे में निगम के हिस्से में सिर्फ 21 कमरे ही आए।

15 से 17 कमरे लाइब्रेरी के पास ही रहे। ऐसे हालात में महापौर, उप महापौर, आयुक्त व उपायुक्तों के पीए कक्ष की भी डिमांड होने लगी थी। जबकि महापौर-उप महापौर, नेता प्रतिपक्ष और सत्तापक्ष व विपक्षी पार्षदों के बैठने के साथ-साथ तीन उपायुक्त, मुख्य अभियंता, एसटीपी, एटीपी, एसई, एक्सईएन, एईएन व जेईएन के अलावा लेखा शाखा, विधि शाखा, अतिक्रमण, संस्थापन, सामान्य शाखा, जन्म-मृत्यु व मैरिज पंजीयन शाखा के साथ-साथ बाबुओं के बैठने की कमी पहले से ही खल रही हैं।

साथ ही भीड़-भाड़ वाले इलाके में होने से जनप्रतिनिधियों, अफसरों व कर्मचारियों के साथ आने वाले फरियादियों के चार पहिया व दुपहिया वाहनों की पॉर्किंग को लेकर भी माथापच्ची होने लगी थी। कमरों में अटैच बॉथरूम नहीं होना भी अफसरों को अखरने लगा है। इसके कारण ही आयुक्त रोहिताश्वसिंह तोमर ने अपने कमरे में अटैच बॉथरूम का निर्माण करवाना पड़ा।

डीएलबी के इस फैसले के बाद राजनीतिक विरोध के स्वर भी उभरना शुरू हो गए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र जोशी ने कहा कि हम तो पहले से ही इस व्यवस्था का विरोध कर रहे थे, लेकिन सरकार अपने फायदे के लिए जोधपुर को गर्त में डालने पर आमादा थी। जब दो निगम के लिए भवन ही नहीं है तो फिर उसे बांटने का क्या मतलब? इधर महापौर वनिता सेठ ने कहा कि यह फैसला काफी मायने में कंफ्यूज करने वाला हैं। आगामी दिनों में इसकी असली तस्वीर सामने आएंगी।

पॉलीटेक्निक कॉलेज स्थित निगम के नए भवन में आलीशान सभा हॉल, सुसज्जित कक्ष भी
नए भवन में बी+जी+थ्री फ्लोर है, इसमें कुल 45 कमरे हैं। इस भवन को बनाते समय इसकी डिजाइन में ही महापौर, उप महापौर, नेता प्रतिपक्ष के साथ-साथ उपायुक्तों के कमरों का निर्धारण कर दिया था, क्योंकि महापौर, उप महापौर, नेता प्रतिपक्ष कक्ष में पीए कक्ष के साथ दो-दो अटैच बॉथरूम व रेस्टरूम भी बनाया गया था। वहीं उपायुक्तों को भी पीए कक्ष के साथ बड़े कमरे आवंटित किए थे।

अफसर व जनप्रतिनिधि इस आलीशान भवन, सभा हॉल व सुसज्जित कक्ष का मोह नहीं छोड़ पाए। आयुक्त, उपायुक्त सहित सिविल विंग के अधिकारी आखिर तक अपने कमरे का मोह नहीं छोड़ पाए। इसके लिए इसके लिए कांग्रेस के दिग्गज मानसिंह देवड़ा के भतीजे मयंक देवड़ा को आगे किया।

दो दिन पहले उन्होंने पूरे निगम का निरीक्षण कर इसकी संभावना तलाशी और अफसरों ने मैप तैयार कर सरकार को भिजवा दिया। डीएलबी डायरेक्टर दीपक नंदी ने शनिवार रात इस पर सहमति दे दी। इसके बाद उपायुक्त के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई जो यह तय करेगी, भवन को दो हिस्सों में किस तरह बांटा जाए? फ्लोर वाइज या आधा-आधा।

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