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जोधपुर में रावजी की गेर:कोरोना की सख्ती के बावजूद जारी रही बरसों पुरानी परम्परा, केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने ढोल बजा गाए फाग गीत

जोधपुरएक महीने पहले
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रावजी की गेर में जमकर नाचे केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत। - Dainik Bhaskar
रावजी की गेर में जमकर नाचे केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत।

राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी सूर्यनगरी जोधपुर में परंपरागत तरीके से पीढ़ियों से होली के अवसर पर निकलती आई रावजी की गेर आज भी अपने परवान पर दिखाई दी। जोधपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित 8 बेरों से निकलकर यह गेर मंडोर पहुंची। गेर में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया।

जोधपुर के सांसद व केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत भी हमेशा की तरह इसमें शामिल हुए और उन्होंने स्वयं ढोल बजा फाग गीतों के साथ लोगों में जोश का संचार किया।

गेर में एक युवक को राव बनाते लोग।
गेर में एक युवक को राव बनाते लोग।

राजस्थान सरकार की कोरोना को रोकने के लिए जारी सख्त गाइडलाइन के कारण इस बार गेर के आयोजन पर संकट के बाद मंडरा रहा था। प्रशासन अनुमति देने को लेकर दुविधा में था। लेकिन, आयोजकों ने विश्वास दिलाया कि गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, गेर के दौरान कई बार गाइडलाइन की धज्जियां उड़ती नजर आई। स्वयं केन्द्रीय मंत्री शेखावत भी बगैर मास्क पहने इसमें शामिल होने पहुंच गए। बाद में लोगों ने उन्हें मास्क उपलब्ध कराया।

जोधपुर के मंडोर क्षेत्र में आयोजित होने वाली रावजी की गेर का अलग ही आकर्षण रहा है। लोगों के कदम स्वत: ही इस गेर की तरफ बढ़ना शुरू हो जाते हैं। यहीं कारण है कि इस गेर में सबसे अधिक लोग उमड़ते हैं। चंग और ढोल की थाप पर फाग गीतों की स्वर लहरियों पर गेरियों का नाचते हुए आगे बढ़ना अलग ही आकर्षण पैदा करता है। अश्लील गालियां गाते हुए गेर में शामिल युवकों ने होली के इस परंपरा का निर्वहन किया। क्षेत्र के आठ अलग-अलग स्थान से शुरू होकर इन क्षेत्रों की गेर मंडोर में पहुंच कर एकत्र हो जाती है। इस गेर में दादा से लेकर पोता तक भाग लेते हैं। रावजी की गेर में कांग्रेस व भाजपा के सभी नेता दिल खोलकर हिस्सा लेते हैं।

गेर की अनूठी पहचान
होली पर जोधपुर के मंडोर क्षेत्र में निकलने वाली पारम्परिक रावजी की गेर यात्रा आज भी अपनी अनूठी पहचान रखती है। देश और दुनिया का यह पहला आयोजन है जिसमें महिलाओं का प्रवेश वर्जित होता है। यहां गेर में शामिल लोग की मस्ती में चूर होकर अश्लील गायन करते हैं। इसमें खास बात यह होती है कि दादा और पोता, चाचा और भतीजा तथा बाप और बेटा एक साथ मिलकर होली मनाते हैं और आपसी मनमुटाव भुलाकर रंगो की मस्ती में सराबोर होकर होली का जश्न मनाते हैं।

एक युवक को बनाते है राव
पुरानी परम्परा के अनुसार एक युवक राव बना हुआ नाचता चलता है। राव का चयन शारीरिक रूप से मजबूत कद काठी वाले शादीशुदा व्यक्तियों में से किया जाता है। राव की पहचान के लिए उसकी पीठ पर छापा मांड दिया जाता है। उसे रंगों से सराबोर कर सजा धजाकर फूलमालाएं पहनाकर हाथ में मूसल दिया जाता है। उसे घेरे हुए बड़ी संख्या में बुजुर्ग, युवक और बच्चे होली के गीत गाते और अश्लील नारे लगाते चलते हैं। कई लोग पारम्परिक वेशभूषा में सज-धज कर आते हैं। इस गेर को देखने के लिए भी हजारों लोग उमड़ते हैं। रावजी की गेर मंडोर के अलग-अलग मोहल्ले से होती हुई मंडोर उद्यान में प्राचीन नाग गंगा तालाब पहुंचती है। वहां सबसे पहले राव बना युवक तालाब में कूदता है और फिर दूसरे युवक भी धड़ाधड़ पानी में कूद पड़ते है। इस तालाब में नहाने के बाद गेर सम्पन्न होती है। इस गैर में श्लील गायन के कारण महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।

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