सीएमएचओ चूरू के स्थानांतरण का मामला:ट्रिब्यूनल के निर्देश निरस्त; हाईकोर्ट ने कहा - ट्रिब्यूनल को आदेश देने और सरकार को सलाह देने का अधिकार नहीं

जोधपुरएक महीने पहले
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हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा याचिकाकर्ता पर लगाई दो लाख की कॉस्ट सहित ट्रिब्यूनल के अन्य निर्देशों को निरस्त कर दिया। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा याचिकाकर्ता पर लगाई दो लाख की कॉस्ट सहित ट्रिब्यूनल के अन्य निर्देशों को निरस्त कर दिया। (फाइल फोटो)

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश मेहता की एकलपीठ ने सीएमएचओ चूरू के स्थानांतरण के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित कर कहा कि राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल कानून में प्रदत्त अधिकारों और कर्त्तव्य से बाहर जाकर आदेश नहीं कर सकती है। ट्रिब्यूनल को अपील में प्रस्तुत तथ्यों, विषय विवाद व वर्णित आधारों के अनुरूप ही अपील को निर्णीत करने का अधिकार है।

न्यायालय ने कहा कि ट्रिब्यूनल को परमादेश जारी करने और सरकार को सलाह देने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा याचिकाकर्ता पर लगाई दो लाख की कॉस्ट सहित ट्रिब्यूनल के अन्य निर्देशों को निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ता डॉ. अजय चौधरी की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने रिट याचिकाएं पेश कर बताया कि याचिकाकर्ता वर्तमान में सीएमएचओ सीकर पद पर पदस्थापित है और ऑल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिसदा) का अध्यक्ष है।

सीएमएचओ चूरू पद पर रहते हुए उनका स्थानांतरण चूरू से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हिंडौन सिटी, जिला करौली कर देने पर उनके द्वारा ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित होकर 21 दिसंबर 2017 को प्रार्थना पत्र पेश कर ट्रांसफर आदेश पर रोक लगाने की प्रार्थना की गई, लेकिन ट्रिब्यूनल ने 26 दिसंबर 2017 को निर्णय देते हुए स्थानांतरित जगह पर 29 दिसंबर से पहले जॉइन करने आदेश दिया।

जॉइन नहीं करने की स्थिति में राज्य सरकार को अनुशासनात्मक कार्यवाही करने, हड़ताल के दौरान स्वेच्छा से अनुपस्थित होने पर उसे राज्य सेवा से इस्तीफा मानने का नियम बनाने, हड़ताल के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के कारण अस्पतालों में हुई मरीजों की मौत के लिए डॉक्टरों के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने सहित याचिकाकर्ता पर 2 लाख का जुर्माना लगाते हुए छह माह में वेतन से वसूल करने के आदेश दिए।

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