कंटेनर्स की कमी के बाद हस्तशिल्पियों को नया झटका:इंटरेस्ट इंसेंटिव स्कीम बंद की, नए निर्यातकों को 3.5% ब्याज पर लोन का सहारा भी खत्म किया

जोधपुर16 दिन पहलेलेखक: मनोज कुमार पुरोहित
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आंकड़ों के अनुसार इन 3 सालों में एक्सपोर्टर्स की संख्या भी बढ़ी है। काफी नए एक्सपोर्टर्स भी फील्ड में आए हैं। - Dainik Bhaskar
आंकड़ों के अनुसार इन 3 सालों में एक्सपोर्टर्स की संख्या भी बढ़ी है। काफी नए एक्सपोर्टर्स भी फील्ड में आए हैं।

शहर के हैंडीक्राफ्ट व्यवसायियों के लिए एक नई चुनौती सामने आई है। कोरोनाकाल में ऑर्डर्स कैंसिल होने व पेमेंट अटकने, बाद में कंटेनर्स की समस्या से जूझने जैसी समस्याओं के बाद अब हस्तशिल्पियों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने हस्तशिल्प निर्यातकों को दी जाने वाली इंटरेस्ट इन्सेंटिव स्कीम बंद कर दी है।

इस स्कीम में ऑर्डर्स के डॉक्यूमेंट्स के आधार पर निर्यातक को महज 3.5 प्रतिशत ब्याज पर जरूरत अनुसार राशि उपलब्ध हो जाती थी। इससे वे शुरूआती दौर में आसानी से अपने ऑर्डर्स पूरे कर लेते थे। यह स्कीम बंद होने से नए एक्सपोर्टर्स को अपने ऑर्डर पूरे करने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

हालांकि इस संबंध में एक्सपोर्टर्स से जुड़ी संस्थाएं इन प्रयासों में जुटी हैं कि स्कीम जारी रहे। जोधपुर से सालाना 3 हजार करोड़ का हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट होता है। एक्सपोर्ट 3 साल में 1 हजार करोड़ रुपए बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार इन 3 सालों में एक्सपोर्टर्स की संख्या भी बढ़ी है। काफी नए एक्सपोर्टर्स भी फील्ड में आए हैं।

एक्सपोर्टर्स के लिए इंटरेस्ट इन्सेंटिव स्कीम एक मददगार योजना थी। इसकी सहायता से उन्हें ऑर्डर्स पूरा करने में काफी आसानी रहती थी। योजना बंद करने का एक्सपोर्टर्स विरोध भी कर रहे हैं। एक्सपोर्टर्स ने जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन व एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट को भी अवगत करवाया है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत को भी जानकारी दी है।

} विदेश से ऑर्डर मिलने के बाद यदि किसी हस्तशिल्पी के पास पैसा नहीं होता तो वह अपने ऑर्डर के आधार पर बैंक से लोन ले सकता था। } यह लोन उन्हें सिर्फ 3.5 प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध होता था। } हस्तशिल्पी के अकाउंट में बायर का भुगतान आने पर बैंक अपना मूल व ब्याज काटकर शेष भुगतान निर्यातक को देती थी। ^ इस योजना के बंद होने से शहर के निर्यातकों को 200 करोड़ रु का झटका लगा है। एसोसिएशन ने इस सुविधा को चालू करने की गुहार लगाई है। - डॉ. भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ^ इस योजना के बंद होने का असर शहर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, क्योंकि बड़ी संख्या में हस्तशिल्प कलाकार और श्रमिकाें का रोजगार भी हैंडीक्राफ्ट से जुड़ा है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय को पत्र भेजकर इस योजना को 30 सितंबर तक जारी रखने का अनुरोध किया है। राजेंद्र मेहता, सचिव, जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसो.

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