किस्त नहीं चुकाई तो बेच दिया थ्री व्हीलर:उपभोक्ता संरक्षण आयोग द्वितीय ने लगाया बैंक पर दो लाख रुपए हर्जाना

5 महीने पहले
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डेमो फाेटो। - Dainik Bhaskar
डेमो फाेटो।

जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग द्वितीय ने इंडसइंड बैंक पर दो लाख रुपए हर्जाना लगाया है। बैंक से फाइनेंस किए एक वाहन की किस्त नहीं चुकाने पर नोटिस दिए बिना जब्त कर बेच दिया। इस पर वाहन मालिक ने उपभोक्ता संरक्षण आयोग की शरण ली। उसने बताया कि बैंक ने नोटिस नहीं दिया और वाहन जब्त कर बेच दिया। सुनवाई के बाद आयोग ने बैंक पर जुर्माना के आदेश दिए।

मामले के अनुसार उदय मंदिर, जोधपुर निवासी मोबिना बानो ने जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग द्वितीय में परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि उसने अपने जीवनयापन हेतु तीन पहिया वाहन अतुल जैमिनी मार्च, 2017 में खरीदकर इंडसइंड बैंक, इंडस्ट्रीयल एरिया, द्वितीय चरण, बासनी शाखा से 1 लाख 30 हजार रुपये की ऋण सुविधा प्राप्त की थी। बैंक ने कुछ किश्तें बकाया बतलाकर 27 फ़रवरी,2018 को कुछ बाहुबलियों के द्वारा उससे यह वाहन छिन लिया तथा इसे नीलामी में कौड़ियों के भाव बेच दिया गया है ।

विपक्षी बैंक ने ज़बाब प्रस्तुत कर बताया कि परिवादी में 20734 रुपए की ऋण किश्तें बकाया होने से करार की शर्तों के अनुसार उसे वाहन जब्त करने का पूर्ण अधिकार है तथा नोटिस दिए जाकर जब्ती व नीलामी की नियमानुसार कार्यवाही की गई है ।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने यह पाया कि विपक्षी बैंक द्वारा जब्ती व नीलामी कार्यवाही में अनेक अनियमितताएं एवं अवैधता बरती गई है । मात्र सात दिन का नोटिस दिया गया है तथा उक्त नोटिस की भी अवधि पूरी होने से पहले ही वाहन को परिवादीनी से जब्त कर लिया गया । परिवादी ने आजीविका कमाकर बकाया किश्तें जमा कराने का निवेदन किया किंतु इसे दरकिनार कर दिया। वाहन को बेचने हेतु सैल लैटर का स्टांप पेपर 11अप्रेल को खरीद किया गया है, जबकि इस पर सैल लैटर पूर्व तिथि 21 मार्च में तैयार किया गया है।

आयोग के अध्यक्ष डॉ श्याम सुन्दर लाटा, सदस्य डॉ अनुराधा व्यास, आनंद सिंह सोलंकी ने अपने निर्णय में कहा कि विपक्षी बैंक के कर्मचारियों की खराब कार्यशैली व सेवा में कमी के कारण परिवादीनी को ना केवल एकाएक रोजगार के साधन से वंचित होना पड़ा है। बल्कि नये खरीद किये गये वाहन को कुछ माह बाद ही जानबूझकर आधी कीमत पर बेचकर परिवादी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

आयोग ने विपक्षी बैंक की सेवा में कमी मानते हुए आर्थिक नुक्सान व मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति के निमित्त दो लाख रुपए की राशि विपक्षी बैंक द्वारा परिवादीनी को भुगतान करने का आदेश दिया है।