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नगर निगम में बाबुओं और दलालों का नेक्सस:डीएलबी ने सीज मुक्त करने के दिए आदेश, फिर भी नहीं खोल रहे

जोधपुर12 दिन पहले
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  • ऐसा एक पीड़ित भी पहुंचा एसीबी अफसरों के पास, बोला- जिसे अरेस्ट किया, उसके जैसे और भी बैठे हैं निगम में

शहर में निर्माणाधीन बिल्डिंग्स चाहे आवासीय हो या कॉमर्शियल, हर एक पर नजर रखने की जिम्मेदारी तो निगम या जेडीए की होती है, लेकिन उस निर्माण के लिए अनुमति ली गई है या नहीं, हकीकत इससे कुछ अलग है। निगम कर्मचारियों के लिए दलाल की तरह काम करने वाले चंद लोगों के कुछ गिरोह शहर में सक्रिय हैं, जो रोजाना शहर में चल रहे किसी न किसी निर्माण कार्य पर नजर रखकर अवैध वसूली का खेल शुरू कर देते हैं।

इन्हीं से जुड़े निगम कर्मचारी उनके इशारों पर नोटिस भेजने से लेकर तमाम अन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाते हैं। इन गिरोहों की तरह निगम में भी कुछ बाबू ऐसे हैं, जो अपने स्तर पर भी ऐसे काम कर रहे हैं और जो इन्हें रिश्वत नहीं देता, उसके काम को अटकाने से नहीं चूकते। ऐसा ही एक और पीड़ित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास पहुंचा, जिसने जयपुर डीएलबी से भी अनुमति ले ली, लेकिन वहां के आदेश को भी स्थानीय जिम्मेदार नहीं मान रहे हैं।

दरअसल, रातानाडा सुभाष चौक निवासी रिटायर्ड फॉरमैन मोहम्मद असलम अंसारी ने निगम के डीओ बाबू चंद्रजीत हंस के एसीबी द्वारा अरेस्ट होने का पता चलने पर एक परिवाद एसीबी में पेश किया। अंसारी ने बताया कि उनका सुभाष चौक स्थित मकान 7 जनवरी 2019 को निगम टीम ने सीज कर दिया था। उस वक्त वे परिवार सहित बाहर थे। कुछ दिन बाद लौटने पर इसका पता चला।

इसे सीज मुक्त कराने के लिए 21 जनवरी 2019 को वे तत्कालीन लिपिक गुलाम मोहम्मद से मिले। कई चक्कर लगवाने के बाद बाबू ने कागजात गुम होने की बात कही, तो परिवादी ने 7 फरवरी 2019 को दुबारा कागजात दिए। कई महीने चक्कर लगवाने के बाद अंसारी को 19 सितंबर 2019 को जारी एक पत्र देकर जयपुर स्वायत्त शासन विभाग के संयुक्त सचिव के समक्ष अपील करने को कहा गया।

अंसारी ने अपील की और वहां से लंबे संघर्ष के बाद गत 24 अगस्त को परिवादी के भवन को 7 दिन के भीतर सीज मुक्त करने के आदेश जारी कर दिए। अंसारी इस आदेश का हवाला देते हुए वापस निगम पहुंचे, तो इस बार गुलाम मोहम्मद की जगह चंद्रजीत मिला।

9 सितंबर को प्रार्थना पत्र भी दिया, लेकिन अब तक उसे चक्कर ही लगवाए जा रहे थे। अंसारी का आरोप है कि पूर्व बाबू गुलाम मोहम्मद और उसके बाद यहां लगे चंद्रजीत रिश्वत नहीं मिलने की वजह से टालमटोल करते रहे। चंद्रजीत के गिरफ्तार होने के बाद वे निगम पहुंचे, लेकिन कोई बात तक नहीं सुन रहा है।

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