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डॉ. नृसिंह राजपुरोहित राजस्थानी साहित्य पुरस्कार 2020:डॉ. गजेसिंह निम्बोल को राजस्थानी काव्य कृति के लिए किया गया सम्मानित , 'पळकती प्रीत' के लिए मिला पुरस्कार

जोधपुर13 दिन पहले
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डाॅ. नृसिंह राजपुरोहित राजस्थानी साहित्य पुरस्कार 2020 प्राप्त करते डाॅ. गजेसिंह निम्बोल। - Dainik Bhaskar
डाॅ. नृसिंह राजपुरोहित राजस्थानी साहित्य पुरस्कार 2020 प्राप्त करते डाॅ. गजेसिंह निम्बोल।

राजस्थानी भाषा साहित्य के कवि एवं आलोचक डॉ. गजेसिंह निम्बोल को उनकी राजस्थानी काव्य कृति ' पळकती प्रीत ' के लिए सम्मानित किया गया है। साहित्य संस्थान सिटीजन्स सोसाइटी फॉर एज्युकेशन जोधपुर द्वारा प्रतिष्ठित राजस्थानी पुरस्कार ' डॉ. नृसिंह राजपुरोहित राजस्थानी साहित्य पुरस्कार 2020 ' प्रदान किया गया।

सिटीजन्स सोसाइटी पॉर एज्युकेशन द्वारा 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर आयोजित ' व्यास अभिनंदन समारोह ' में यह पुरस्कार प्रदान किया। समारोह ख्यातनाम वैज्ञानिक एवं इसरो के पूर्व निदेशक डॉ.ओ.पी.एन. कल्ला की अध्यक्षता एवं जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ( डॉ.) पी. सी. त्रिवेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। इस अवसर पर समाजसेवी सुरेश राठी विशिष्ट अतिथि थे। पुरस्कार के अंतर्गत संस्था द्वारा डॉ. गजेसिंह निम्बोल को शॉल, शाफा, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं चेक प्रदान किया गया। इस अवसर पर राजस्थानी रचनाकार वाजिद हसन काजी ने डॉ. निम्बोल की काव्य कृति पळकती प्रीत पर आलोचनात्मक पत्र प्रस्तुत किया। समारोह में राजस्थानी, हिंदी एवं ऊर्दू भाषा के अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार मौजूद थे ।

बाबा रामदेव शोधपीठ में निदेशक

बता दें कि यह प्रतिष्ठित राजस्थानी पुरस्कार विगत पन्द्रह वर्षों से राजस्थानी साहित्य के श्रेत्र में सृजन के लिए प्रदान किया जा रहा है । डॉ. गजेसिंह निम्बोल जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग के साथ ही विश्वविद्यालय के बाबा रामदेव शोधपीठ में निदेशक के पद पर अपनी सराहनीय सेवाएं दे रहे हैं ।

राजस्थानी साहित्य के प्रसिद्ध प्रेमाख्यानों पर आधारित है

कवि गजेसिंह निम्बोल द्वारा रचित राजस्थानी काव्य कृति ' पळकती प्रीत ' राजस्थानी साहित्य के प्रसिद्ध प्रेमाख्यानों पर आधारित है जिसमें ढोला - मारु, जेठवा - ऊजळी, सैणी - बीझाणंद, बाघौ - भारमली, नरबद - सुपियार, आभळ - खींवजी, केहर - कंवळ, मूमल- महेन्द्रा, नागजी - नागवती, जलाल - बूबना आद इग्यारै प्रेमाख्यान सम्मिलित हैं ।

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