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स्मृति शेष:राजस्थानी साहित्य की धरोहर थे डाॅ. शक्तिदान कविया जेएनवीयू राजस्थानी विभाग के 3 बार अध्यक्ष रहे

जोधपुर13 दिन पहले
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  • 80 की उम्र में जोधपुर में ली अंतिम सांस, कुछ समय से बीमार चल रहे थे

राजस्थानी भाषा और साहित्य के रचनाकार डिंगल काव्य के हस्ताक्षर डॉ. शक्तिदान कविया का बुधवार को काेरोना से निधन हो गया। महाकवि पृथ्वीराज राठौड़ व सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार सहित साहित्य अकादेमी नई दिल्ली, राजस्थान साहित्य अकादमी और ब्रजभाषा अकादमी के अनेक पुरस्कारों से सम्मानित डॉ. कविया व्यक्तित्व विरल पहचान रखने वाले रचनाकार थे।

डॉ. कविया अस्सी वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे। जोधपुर के निकट बिराई गांव के मूल निवासी डॉ. कविया जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय राजस्थानी विभाग के 3 बार विभागाध्यक्ष रहे। वैसे तो डॉ. कविया के साहित्य सृजन में विविध विषयों का समावेश रहा, लेकिन विशेष रूप से राजस्थानी डिंगल व पिंगल साहित्य उनके सृजन के आधार रहे।

उनकी प्रमुख पुस्तकें संस्कृति री सोरम, राजस्थानी साहित्य का अनुशीलन, डिंगल के ऐतिहासिक प्रबंध काव्य, राजस्थानी काव्य में सांस्कृतिक गौरव, सपूतां री धरती, दारू-दूषण, प्रस्तावना री पीलजोत, पद्मश्री डॉ. लक्ष्मी कुमारी चूंडावत धरा सुरंगी धाट, धोरां री धरोहर, रूंख रसायण, संबोध सतसई, सोनगिर साकौ व गीत गुणमाल इत्यादि रहीं। उन्हें विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी बोराणा, डाॅ. आईदानसिंह भाटी, डाॅ. गजेसिंह राजपुरोहित, डाॅ. गजादान चारण, मोहन सिंह रतनू, डाॅ. सुखदेव राव, डाॅ. भंवरलाल सुथार, डाॅ. इंद्रदान चारण ने श्रदांजलि दी।

साहित्यकारों ने कहा- डिंगळ भाषा का सूर्य अस्त हो गया, शोक की लहर छाई
जोधपुर। राजस्थानी भाषा के डिंगळ कवि एवं जेएनवीयू राजस्थानी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शक्तिदान कविया के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर छाई। जेएनवीयू बाबा रामदेव शोधपीठ के निदेशक डाॅ. गजेसिंह राजपुरोहित ने कहा कि आज डिंगळ साहित्य का सूर्य अस्त हो गया।

राजस्थानी के मूर्धन्य विद्वान के रूप में डाॅ. कविया हम सब के लिए श्रद्धेय तो थे ही मगर वो अपने साहित्यिक अवदान के लिए सदैव याद किए जाएंगे। राजस्थानी भाषा साहित्य में उनका अतुलनीय योगदान संपूर्ण मानव समाज के लिए गर्व की बात है एवं उनकी साहित्यिक उपादेयता निर्विवाद है।

यद्यपि डाॅ. कविया आज हमारे बीच में नहीं रहे मगर उनके साहित्य की सौरभ सदैव हम सब के मध्य विद्यमान रहेंगी। अनेक साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित, अनूठे व्यक्तित्व के धनी डाॅ. शक्तिदान कविया के जीवन से प्रेरणा लेकर आज की युवा पीढ़ी निश्चित रूप से राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति के लिए अवश्य ही आगे आकर रचनात्मक कार्य करेंगी।

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