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जोधपुर लीला मदेरणा बनीं जिला प्रमुख:25 साल तक जिला परिषद सदस्य रहीं, वोटिंग  से पहले क्राॅस वोटिंग के मुद्दे को सुलझा सभी 21 सदस्यों ने दिया समर्थन

जोधपुरएक महीने पहले
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चुनाव जीतने के बाद लीला मदेरणा के साथ दिव्या मदेरणा। - Dainik Bhaskar
चुनाव जीतने के बाद लीला मदेरणा के साथ दिव्या मदेरणा।

जोधपुर जिला प्रमुख चुनाव में लीला मदेरणा जिला प्रमुख बन चुकी हैं। इससे पहले सुबह कांग्रेस की ओर से लीला मदेरणा का नाम सामने आने के बाद मुन्नी देवी गोदारा, नेहा चौधरी और लीला देवी ने निर्दलीय नामांकन भरा था। हालांकि चुनाव प्रभारी की ओर से यह तय कर दिया गया था कि सभी को समर्थन लीला मदेरणा को ही मिलेगा। इधर, 1 बजे तक नामांकन वापस लेने के बाद क्राॅस वोटिंग से बचने के लिए समझाइश का दौर जारी रहा। पार्टी पदाधिकारियों को यह डर था कि क्रॉस वोटिंग खेल नहीं बिगाड़ दे। लेकिन इस चुनाव में सभी 21 सदस्यों के वोट लीला मदेरणा को मिले। यहां तक की मुन्नी और नेहा ने भी लीला मदेरणा को समर्थन दिया।

बिगड़ गई थी पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ की तबीयत

कांग्रेस नेता पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ को तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में उनकी जांच की जा रही है। बेटी मुन्नी देवी गोदारा को जिला प्रमुख का टिकट दिलाने में नाकाम रहने वाले जाखड़ गत कुछ दिन से लगातार सक्रिय रहे। उनका शुगर लेवल यकायक काफी कम हो गया साथ ही ब्लड प्रेशर(बीपी) भी बढ़ गया। जिला परिषद सदस्यों के चुनाव का नतीजा आने के बाद उनकी सक्रियता काफी बढ़ गई। पर्याप्त आराम नहीं कर पाने के कारण आज दोपहर उनकी तबीयत गड़बड़ाना शुरू हो गई। करीब चार बजे वे कुछ असहज लगे तो परिजन उन्हें कमला नगर अस्पताल ले गए। उनकी ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया है और शुगर लेवल भी कम है। डॉक्टरों ने कहा कि इलाज के साथ आराम करने से उनकी तबीयत में सुधार हो जाएगा।

लीला मदेरणा के चुनाव जीतने के बाद खुशी मनाते समर्थक।
लीला मदेरणा के चुनाव जीतने के बाद खुशी मनाते समर्थक।

25 साल तक जिला परिषद सदस्य रहीं

लीला मदेरणा पिछले 25 साल से जिला परिषद सदस्य है। 1994 में पंचायत राज व्यस्था के दौरान जिला परिषद का गठन होने के बाद से ही वे जिला परिषद सदस्य रही। पति जिला प्रमुख रहते हुए भी वे सदस्य के रूप में रही। इस बार उन्होंने जिला प्रमुख के लिए दावेदारी जताई। हालांकि कांग्रेस से ही उम्मीदवार मुन्नी देवी और नेहा चौधरी ने निर्दलीय नामांकन भरा था। ऐसे में क्रॉस वोटिंग का भी डर था। लेकिन वोटिंग से पहले मुन्नी देवी व नेहा चौधरी ने लीला को समर्थन देते हुए उनके पक्ष में वोट किया। लीला देवी मदेरणा को 21 सदस्यों का समर्थन मिला।

यह रहे 21 प्रधान

21 प्रधान में से रालोपा ने दो पर बाजी मारी।भाजपा से सात प्रधान रहे और कांग्रेस से 12 प्रधान रहे। घंटियाली से कांग्रेस से परमेश्वरी देवी लॉटरी से जीती

भाजपा के 7 प्रधान

केरू से अनुश्री पुनिया

धवा से गोविंदराम

तिंवरी से नीलम मेघवाल

ओसियां से मदनकंवर

बाप से मौन कंवर

देचू से सिमराथराम

बिलाड़ा से प्रगति कुमारी

कांग्रेस के 12 प्रधान

घंटियाली से परमेश्वरी देवी (लॉटरी से जीती)

शेखाला से रावलराम सुथार

मंडोर से कानाराम चौधरी

लूणी से वाटिका राजपुरोहित

पीपाड़ से सोनिया

भोपालगढ़ से शांति जाखड़

लोहावट से गीता

आऊ से आशी

फलोदी से उमरदीन

बापिणी से बस्तीराम

शेरगढ़ से श्रवणसिंह

बालेसर से पुष्पा कंवर

रालोपा के 2 प्रधान

बावड़ी सेअनिता चौधरी

चौमू से गुड्डी

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