इलाज का ‘आपातकाल’:रेजिडेंट्स की हड़ताल से 75% ऑपरेशन टले भर्ती मरीजाें की संख्या भी 36% तक घटी

जोधपुर2 महीने पहले
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एमडीएम अस्पताल के इमरजेंसी में रेजिडेंट हड़ताल के कारण सर्जन डॉ. अखिलेश गुप्ता ने भी मरीजों को परामर्श दिया। - Dainik Bhaskar
एमडीएम अस्पताल के इमरजेंसी में रेजिडेंट हड़ताल के कारण सर्जन डॉ. अखिलेश गुप्ता ने भी मरीजों को परामर्श दिया।
  • उम्मेद, एमडीएमएच व एमजीएच में सीनियर्स ने संभाला काम, ऑपरेशन और आईपीडी की व्यवस्था अब इमरजेंसी होने पर ही

नीट पीजी काउंसलिंग में हो रही देरी व अन्य मांगों को लेकर हुई रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल का असर मंगलवार को दिखने लगा। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में सोमवार देर शाम 8 बजे रेजिडेंट्स ने कामकाज छोड़ दिया था। ओपीडी, इमरजेंसी व वार्डों में सीनियर डॉक्टरों ने कामकाज संभाला।

हड़ताल के पहले ही दिन अस्पतालों में केवल इमरजेंसी ऑपरेशन और बहुत जरूरी होने पर मरीजों को भर्ती किया गया। इससे 75% ऑपरेशन टाल दिए गए और भर्ती मरीजों की संख्या भी 36% तक गिर गई। ओपीडी में सीनियर डॉक्टर्स और सीनियर रेजिडेंट्स मरीजों को देखते मिले।

मथुरादास माथुर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में डॉ. हरीश अग्रवाल, डॉ. वीरम परमार के साथ सीनियर रेजिडेंट्स मरीजों को देख रहे थे। आर्थोपेडिक विभाग में एमडीएम अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी, नेत्र विभाग में डॉ. अरविन्द चौहान ने व्यवस्था संभाली।

एमडीएम अस्पताल में मंगलवार को 9, एमजीएच में 4 और उम्मेद अस्पताल में 4 (सिजेरियन डिलीवरी के अलावा) मेजर व माइनर ऑपरेशन हुए। जबकि सामान्य दिनों में एमडीएमएच में प्रतिदिन 30-40, एमजीएच में 12-15 व उम्मेद अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के अलावा 15-20 ऑपरेशन हाेते हैं। इतना ही नहीं साेमवार रात 8 बजे से मंगलवार दाेपहर 3 बजे तक तीनाें अस्पतालाें में महज 388 राेगी ही भर्ती हुए। जबकि सामान्य दिनों में उम्मेद अस्पताल रोजाना करीब 300, एमडीएमएच में 200 व एमजीएच में 100 रोगी भर्ती होते हैं। उम्मेद अस्पताल की ओपीडी में 1,002 मरीज अाए, इनमें से 199 काे भर्ती किया। यहां कुल 66 डिलीवरी हुई, इसमें 45 नाॅर्मल व 21 सिजेरियन की गई। इनके अलावा एक माइनर और 3 मेजर ऑपरेशन हुए। एमजीएच में 460 की ओपीडी रही व 34 मरीजों काे भर्ती किया गया। यहां केवल चार मरीजों के ऑपरेशन हुए। वहीं एमडीएम अस्पताल में 1,632 मरीज ओपीडी में आए व इनमें से 159 मरीजों को भर्ती किया गया। यहां 6 मरीजों के मेजर व तीन के माइनर ऑपरेशन किए गए। नेत्र विभाग में 16 ऑपरेशन हुए। इस ‘मां’ से सीखें फर्ज : 11 माह के बेटे को गोद में सुला इलाज कर रहीं डॉक्टर हड़ताल के बीच एमडीएमएच में एक डॉक्टर मां कर्तव्य की मिसाल पेश करती नजर आईं। मनोविकार केंद्र में कार्यरत डॉ. लक्ष्मी प्रजापत अपने महज 11 माह के बेटे को गोद में सुलाकर मरीजों का उपचार कर रही थीं। डॉ. लक्ष्मी ने बताया कि बच्चा छोटा होने के कारण उसे घंटों तक अपने से दूर रखना संभव नहीं है अाैर अस्पताल से इतनी लंबी छुट्‌टी भी नहीं मिल सकती, इसलिए मैंने बेटे को साथ लाकर ड्यूटी करना ही सही समझा। वे मूलत: जिरिएट्रिक (वृद्धजन) विभाग में कार्यरत हैं, लेकिन अभी कार्य व्यवस्था के तहत मनोविकार केन्द्र में लगाया गया है।

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