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जैसलमेर में 10 दिन में उठे 3 रेतीले बवंडर:आसमान से बरसती है धूल, हर तरफ हो जाता है धूल का साम्राज्य; जानिए कैसे उठते हैं रेगिस्तान में बवंडर, वीडियो भी देखिए

जोधपुर13 दिन पहले
थार के रेगिस्तान में इस तरह आगे बढ़ते है रेतीले बवंडर।

पश्चिमी राजस्थान में इन दिनों आंधियों का दौर चल रहा है। कई जगह रेतीले बवंडर उठ रहे हैं। रेतीले बवंडर के कारण सूरज के तेवर ढ़ीले पड़ जाते हैं। वहीं बवंडर के साथ ऊपर चढ़ी धूल के कारण आसमान से धूल की बारिश शुरू हो जाती है। हर तरफ धूल का साम्राज्य हो जाता है। कुछ दूरी तक भी साफ देख पाना मुश्किल हो जाता है। इस मौसम में धूल भरे बवंडर उठना सामान्य बात है, लेकिन इस बार जैसलमेर का रामगढ़ इनका हॉट स्पॉट बना हुआ है। महज दस दिन में तीन पर रेतीले बवंडर रामगढ़ से उठ चुके हैं। आइये जानते हैं कि रेगिस्तान में धूल भरे बवंडर कैसे उठते हैं...

  • समुद्र में तेज हवा के कारण लहरे ऊपर उठना शुरू कर देती है। हवा की गति बढ़ने पर ऊपर उठने वाली लहरें तूफान बन जाती है। इसी तर्ज पर रेगिस्तान में चलने वाली हवा यहां फैले रेत के समन्दर में लहरें बना देती है।
  • रेगिस्तानी क्षेत्र में चलने वाली हवा की गति जब रफ्तार पकड़ती है तो यह अपने साथ जमीन की सतह से ढीली धूल कणों को उड़ाना शुरू कर देती है। हवा की रफ्तार का यह क्रम बरकरार रहने पर धूल कणों की मात्रा बढ़ती जाती है और यह धूल आसमान में छा जाती है।
  • तेज हवा के साथ आगे बढ़ती ये धूल एक बवंडर का रूप धारण कर लेती है। रेगिस्तान में उठने वाले ये बवंडर कई बार मीलों लम्बे होते हैं। ये बवंडर जिस तरफ से होकर गुजरते हैं वहां पर सिर्फ धूल का सामाज्य ही नजर आता है। इस कारण कुछ दूरी तक देख पाना भी मुश्किल हो जाता है। चेहरे व कपड़ों से लेकर प्रत्येक वस्तु पर धूल जम जाती है। बहुत हल्की इस धूल की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह आसानी से झड़ जाती है। रेगिस्तान में मिट्‌टी की जमीन पर पकड़ मजबूत नहीं होने के कारण धूल भरी आंधियों का दौर चलता रहता है।

इस कारण आते हैं बवंडर
ज्यादातर रेगिस्तान भूमध्य रेखा के इर्द गिर्द हैं। इस क्षेत्र में वायुमंडलीय दबाव बहुत अधिक होता है। यह दबाव ऊंचाई पर मौजूद ठंडी शुष्क हवा को जमीन तक लाता है। इस दौरान सूरज की सीधी किरणें इस हवा की नमी समाप्त कर देती है। नमी समाप्त होने से यह हवा बहुत गर्म हो जाती है। इस कारण बारिश नहीं हो पाती है और जमीन शुष्क व गर्म हो जाती है।

जमीन गर्म होने के कारण नमी के अभाव में धूल के कणों की आपस में पकड़ नहीं रह पाती है। ऐसे में ये हवा के साथ बहुत आसानी से ऊपर उठना शुरू कर देते हैं। हवा की गति 40 किलोमीटर से अधिक होने पर ये धूल कण एक बवंडर का रूप धारण कर लेते हैं। बवंडर के साथ धूल कण 10 से 50 फीट की ऊंचाई तक उठते हैं। कई बार ये इससे भी अधिक ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं।

ऐसा है थार का रेगिस्तान
थार के रेगिस्तान से प्रसिद्ध ग्रेट इंडियन डेजर्ट भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है। यह प्राकृतिक रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा का काम करता है। थार रेगिस्तान 3 लाख 20 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका 85 फीसदी हिस्सा भारत में व शेष पाकिस्तान में हैं। देश में रेगिस्तान के कुल हिस्से का 60 फीसदी राजस्थान में फैला हुआ है।

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