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रियल वॉरियर:रिटायर होने के बाद भी कोविड सेंटर की हेल्प डेस्क पर मोर्चा संभाला, 15 माह से संक्रमितों-परिजनों की मदद कर रहे

जोधपुर16 दिन पहले
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  • } महामारी को हराने को महामानवों की ऐसी निडरता और जज्बे की जरूरत

मथुरादास माथुर अस्पताल के जनाना विंग में 64 वर्षीय कुसुम कुमार आचार्य कोरोनाकाल में पिछले 15 महीने से लगातार अपनी सेवाएं हेल्प डेस्क के माध्यम से दे रहे हैं। जहां मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों ने अपनी उम्र 60 से अधिक बताकर कोरोना में ड्यूटी से दूर रहने के बात कही थी, वहीं आचार्य संक्रमितों के बीच बैठकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मंडोर सेटेलाइट अस्पताल में नर्सिंगकर्मी के रूप में आचार्य का कार्यकाल 2017 में पूरा हो गया, लेकिन वे जब तक हाथ-पांव चल रहे हैं, तब तक काम करना चाहते थे। इसके चलते वे लगातार प्रयास करते रहे। एमडीएम अस्पताल में 2018 में हेल्प डेस्क की सुविधा शुरू की, तब से वे एमडीएमएच से जुड़ गए। 2018 और 2019 में स्वाइन फ्लू के समय भी वे मरीजों की सहायता में जुटे रहे।

2020 में कोरोना आने के बाद जनाना विंग को खाली कराकर कोविड सेंटर बनाया गया। शुरुआत में यहां आने से सब डरते थे, लेकिन आचार्य ने कभी भी यहां काम करने से मना नहीं किया। वे हेल्प डेस्क का पूरा काम देखते हैं। वार्डों से खाली बेड की सूचना, बाहर से जांच कराने या इलाज के लिए आ रहे मरीजों और डॉक्टरों के बीच तारतम्य बैठाने का काम कर रहे हैं। आने वाले मरीज को तुरंत बेड मिल जाए, इसके लिए वे ओपीडी में डॉक्टर को बेड संबंधी जानकारी भी देते हैं।

बहुत खराब बीमारी आई है, रिश्तों का भी पता चल रहा

आचार्य कहते हैं कि बहुत ही खराब बीमारी आई है। इसमें रिश्तों का भी पता चल रहा है। पिता बेटे के लिए तो बेटा पिता के लिए अस्पताल में रुकने को तैयार नहीं है। 75 साल की दादी को लेकर पोता आया। स्थिति खराब थी, उसने पूछा कि बेड खाली है क्या? तब मैंने बताया कि कुछ देर में हो जाएगा।

तब तक इंतजार कर लो। इस पर उसने कहा कि ये मेरी दादी है और ये मेरा मोबाइल नंबर है। आप इन्हें भर्ती करवा देना और यदि कुछ हाे जाए तो फोन कर देना। मैं उसे देखता रहा और वह चला गया।

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