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डीआरएम की पशुधन बचाने की मुहिम:हर माह 100 पशु ट्रेन की चपेट में आ रहे, इन्हें बचाने अब सरकार बनाएगी मास्टर प्लान

जोधपुर2 महीने पहले
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  • कैटल रन ऑवर , मुख्य सचिव के साथ ट्रेन से जा रहीं डीआरएम ने इमरजेंसी ब्रेक लगवा 5 गायों को बचाया

कैटल रन ऑवर। रेलवे की भाषा में आम घटना यानि ट्रेन के सामने पशु आया, कट गया और ट्रेन आगे बढ़ गई। कई बार पशु के शरीर के हिस्से इंजन में फंस जाते हैं तो ट्रेन रुक जाती है और देरी होना तय। रेलवे की इस दिक्कत के साथ के दूसरे पहलू, पशुधन के नुकसान को लेकर मंडल रेल प्रबंधक गीतिका पांडेय ने एक अलग सोच रेलवे के सामने रखी। पशुधन बचाओ जागरूकता अभियान शुरू किया। आरपीएफ के माध्यम से पशुपालकों, रेल पटरी के आसपास रहने वाले लोगों से समझाइश की कि वे अपने पशु पटरी पर न आने दें। मुख्यमंत्री से मिलीं और उन्हें अपनी पहल की जानकारी दी।

नतीजा राज्य के मुख्य सचिव के साथ बैठक तय हुई और इस बैठक में सरकार ने डीआरएम के इस अभियान पर मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश अपने अधिकारियों को दे दिया। यही नहीं, इस बैठक में शामिल होने के लिए इंटरसिटी से जयपुर जा रही डीआरएम ने जब पटरी पर गायों का झुंड आता देखा तो इमरजेंसी ब्रेक लगवा ट्रेन रूकवा दी और गायों के साइड में होने पर ट्रेन रवाना हुई। दरअसल, जोधपुर मंडल में अप्रेल से दिसंबर के दौरान ट्रेनों से पशु टकराने की करीब एक हजार घटनाएं हुई। डीआरएम पाण्डेय ने जब यह आंकड़ा देखा तो उन्होंने इसे रोकने व टालने के लिए मंडल के अधिकारियों व विभागाध्यक्षों के बीच अपना एक विचार रखा, क्यों न जागरूकता अभियान चलाया जाए। अभियान तो चल ही रहा है, अब राज्य सरकार से भी इस अभियान में जुड़ने का आग्रह किया जो सफल होता दिख रहा है।

मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने इस मुद्दे पर हुई बैठक में कहा कि रेलवे ट्रैक पर पशु दुर्घटनाएं रोकने के लिए ट्रैक के किनारों पर ट्रेंचेज खोदने या फेंसिंग लगवाने जैसे उपाय अपनाए जाएंगे तथा नरेगा के माध्यम से यह काम कराने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पालतू गाय, भैंसों, बकरियों तथा ऊंटों को चरने के लिए खुला छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोकथाम के लिए गांवों में राज्य सरकार की ओर से भी अभियान चलाया जाएगा।

डीआरएम ने सुझाव दिया कि गोशालाओं की गायों में टैग लगे तो पटरी पर आने वाली गायाें से उनकी पहचान कर समझाइश की जा सके। इस पर तय हुआ कि गोशालाओं को भी इसके लिए पाबंद किया जाएगा। मुख्य सचिव ने जोधपुर, जैसलमेर, पाली, बाड़मेर, जालौर, नागौर, बीकानेर तथा चूरू जिलों में लगभग 200 किलोमीटर लम्बा रेल्वे ट्रेक क्षेत्र को पशु दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए इन जिलों के कलेक्टर्स से भी इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए सुझाव मांगे हैं।

अब बनेंगे पशु दुर्घटना के हॉट स्पॉट
डीआरएम पाण्डेय ने बताया कि रेल पटरियों पर जहां आए दिन पशु हादसे होते हैं, उन्हें अब चिह्नित किया जाएगा। ऐसे हॉट स्पॉट तय कर वहां पशुधन बचाने पर ज्यादा फाेकस हो सकेगा। इसके लिए राज्य सरकार रेलवे की मदद लेगी। जिन ग्राम पंचायतों में ये क्षेत्र आएंगे, वहां के लोगों में जागरूकता के साथ जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और ट्रैक के किनारों पर सुरक्षात्मक उपाय किए जाएंगे।

इसके लिए जिला कलेक्टर्स से अपने जिले के ऐसे हॉट स्पॉट चिह्नित करने के लिए कहा तथा कृषि विभाग, पंचायती राज विभाग, परिवहन विभाग तथा पशुपालन विभाग को आपसी समन्वय से इस समस्या के समाधान के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाने के लिए कहा।

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