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‘विश्व लिंफोमा (रक्त कैंसर) दिवस’ पर विशेष:जोधपुर में हर साल 500 मरीज आ रहे, बच्चे व वयस्क भी शामिल

जोधपुर5 दिन पहले
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रक्त कैंसर लिंफोमा एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसका नाम सुनकर ही भय लगने लगता है। बीमारी का समय पर इलाज नहीं हो तो यह जानलेवा हो सकती है। समय रहते इसके लक्षण पहचानकर उपचार करवाया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। यह कहना है एमडीएमएच के हिमेटोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. गोविंद पटेल का। वे विश्व लिंफोमा दिवस पर शहरवासियों को जागरूक कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि रक्त कैंसर के कई प्रकार है जिसमें ल्यूकेमिया, लिंफोमा, मल्टीपल मायलोमा आदि है। देश में लिंफोमा के लाखों मरीज है। इसके मामले 5 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहे हैं। जोधपुर में हर साल लिंफोमा के अनुमानित 500 नए मामले आते हैं। इनमें से करीब दो-तिहाई से अधिक पुरुष होते हैं।

ये सभी मरीज जोधपुर व इसके समीपवर्ती क्षेत्रों से उपचार के लिए आते हैं। इनमें बच्चे और वयस्क भी शामिल हैं। लिंफोमा के लक्षण आसानी से नजर नहीं आते, लेकिन कुछ संकेत हैं, जिनकी मदद से इसके बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता हैं।

लिम्फ नोड्स में सूजन या गांठें (आमतौर पर गर्दन, बगल एवं कमर में) तिल्ली व यकृत (लिवर) का बढ़ना, लंबे समय से या बार-बार बुखार, भीषण पसीना, अनायास ही वजन कम होना, भूख में कमी, खांसी और सांस लेने में दिक्कत या सांस का फूलना, खुजली और लगातार थकान महसूस करना आदि शामिल है। लिम्फ नोड्स की गांठें आमतौर पर दर्द रहित होती है।

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