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हाईकोर्ट सुनवाई:राजारामजी महाराज मंदिर और शिक्षण सेवा संस्थान को बेशकीमती जमीन नियम के विरुद्ध आवंटन करने पर सरकार से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट

जोधपुर9 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • बेशकीमती भूखंड नियम विरुद्ध आवंटन करने को हाईकोर्ट में चुनौती
  • जालोर नगर परिषद से जुड़ा मामला, अगली सुनवाई 17 को

जालोर नगर परिषद द्वारा राजारामजी महाराज मंदिर व शिक्षण सेवा संस्थान को बेशकीमती जमीन नियम विरुद्ध आवंटन करने को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इंद्रजीत महांति व जस्टिस विजय विश्नोई की खंडपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव, स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक, कलेक्टर जालोर, नगर परिषद जालोर के आयुक्त व संस्थान को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में सरकार को तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने आदेश दिए हैं।

अगली सुनवाई 17 अगस्त को मुकर्रर की है। याचिकाकर्ता गणपत की ओर से अधिवक्ता विवेक श्रीमाली ने जनहित याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि जालोर रेलवे स्टेशन रोड पर सुंदेलाव तालाब से जुड़ी नहर के पास सरकारी जमीन पर बहुत छोटे भाग में वर्ष 1990 में राजारामजी महाराज की मूर्ति लगाई थी।

मूर्ति लगाने के बाद धीरे-धीरे आसपास खाली जमीन पर भी अतिक्रमण कर लिया गया। बाद में नगर परिषद जालोर ने इस जमीन को नियमों के विरुद्ध जाकर राजारामजी महाराज मंदिर व शिक्षण सेवा संस्थान को आवंटित कर दिया गया। अधिवक्ता ने कहा कि यह जमीन स्टेट के समय कैचमेट एरिया में थी।

सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णय के अनुसार कैचमेट एरिया की जमीन को आवंटित नहीं किया जा सकता है। श्रीमाली ने कोर्ट से यह भी कहा कि पूर्व में संस्थान ने आवंटन के लिए आवेदन किया था, इस पर राज्य सरकार ने कहा था कि इस मामले में नगर परिषद की बजाय स्थानीय निकाय विभाग ही अंतिम निर्णय कर सकता है।

करीब 2200 वर्ग मीटर जमीन के आसपास ही पॉश कॉलोनी शिवाजी नगर है। इस लिहाज से यहां की डीएलसी रेट काफी ऊंची है और जमीन की कीमत करोड़ों में है, लेकिन नगर परिषद के तत्कालीन अफसरों ने इसे कौड़ियों में वर्ष 2018 में आवंटित कर दिया।

उन्होंने कोर्ट के यह भी ध्यान में लाया कि इस संबंध में नगर परिषद ने वरिष्ठ नगर नियोजक से भी मार्गदर्शन मांगा था, नियोजक ने भी बगैर भू-उपयोग परिवर्तन के आवंटन नहीं करने के लिए कहा था। राजनीतिज्ञ दबाव में सब नियमों की अनदेखी कर दी गई।

अधिवक्ता ने कहा कि इस जमीन को लेकर स्थानीय न्यायालय जालोर में भी एक वाद लंबित है और उपखंड अधिकारी स्तर पर हुई जांच में भी गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट करवाया गया, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने एएजी सुनील बेनीवाल को इस मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए।

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