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कोरोना संकट:खान मजदूर कल्याण बोर्ड नहीं बनने से पत्थर तोड़कर गुजारा करने वालों की हालत खराब

जोधपुर4 महीने पहले
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  • श्रमिक रोजी-रोटी के लिए तोड़ते थे पत्थर, अब बेरोजगार
  • लगभग पूरे प्रदेश में 25 लाख लोग खनन से रोजगार पाते थे

कोरोना संकट काल में देश के प्रमुख चार राज्यों में शामिल राजस्थान कोविड-19 संक्रमण से जूझ रहा है। प्रदेश में सारे कामकाज ठप पड़े हैं। प्रदेश में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा जरिया है खनन। राज्य में लगभग 33 हजार खनन लीज और क्वारी लाइसेंस हैं, जो फिलहाल बंद हैं।

इन खानियों में काम करने वाले हजारों मजदूर बेकार बैठे हैं। इन्हें ना तो राशन मिल रहा है और ना ही इनके खातों में सरकारी सहायता राशि आ रही है।

दो साल पूर्व जब प्रदेश में चुनाव हुए थे, तब वर्तमान सत्तारूढ़ दल कांग्रेस ने खनन मजदूरों के लिए खान मजदूर कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा की थी। दो वर्ष पश्चात भी इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई। इधर, कोरोना संकट से कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया।

ऐसे में सबसे प्रभावित वर्ग में खनन मजदूर शामिल हैं। ज्यादातर दूसरे राज्यों, जिलों से आकर खनन कार्य में लगे हुए हैं। इनके पास ना राशन कार्ड है और ना ही दस्तावेज। ऐसे में सरकार की ओर से मिल रहा निशुल्क गेहूं भी इन्हें नहीं मिल रहा है।

ना इनके खाते में कोई सहायता राशि आ रही है। जबकि खनन क्षेत्र के विकास के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट बना हुआ है। फंड के खाते में करोड़ों रुपए पड़े हैं, लेकिन मजदूरों के विकास और सुविधाओं के लिए फूटी कौड़ी खर्च नहीं हो रही है।

पहचान के अभाव के कारण खान मजदूर बुनियादी सेवाओं एवं आर्थिक सहायता से वंचित हैं। इस कारण उन्हें इस संकट के समय गुजारा करना मुश्किल हो गया है। वहीं कमठा मजदूर श्रमिक भवन एवं संनिर्माण कल्याण बोर्ड से सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
राजस्थान में 25 लाख लोगों को खनन क्षेत्र से मिलता है रोजगार 
राजस्थान में खनन रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें लगभग 33 हजार खनन लीज और क्वारी लाइसेंस हैं। इसमें 56 प्रकार के प्रधान और अप्रधान खनिजों का दोहन होता है। परोक्ष और अपरोक्ष रूप से लगभग पूरे प्रदेश में 25 लाख लोग खनन से रोजगार पा रहे हैं।
बीमारी व लॉकडाउन की आफत, सरकार मदद करे तो बने बात
खान श्रमिक वर्ग जो पहले व्यवसायिक गतिविधियों के परिणामस्वरूप श्वास की गंभीर बीमारियों टीबी और सिलिकोसिस से जूझ रहा है। अब इन श्रमिकों के रोजी-रोटी पर कोविड-19 भी बड़े संकट के रूप में टूट पड़ा है। सरकार को चाहिए कि पंजीकृत खान मालिकों के मार्फत खान मजदूरों को चिह्नित कर सहायता मुहैया कराए।
हालत बहुत दयनीय है

  • हमारा ट्रस्ट लंबे समय से पूरे देश में खान मजदूरों की समस्याओं पर काम कर रहा है। जोधपुर में वैसे ही सिलिकोसिस और टीबी की समस्या है। मजदूरों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही है। अब तो कोविड-19 आने से समस्या बढ़ चुकी है। इनको खाना तक नसीब नहीं हो रहा है। सरकार जल्द से जल्द चुनाव पूर्व घोषणा पत्र के अनुरूप कल्याण बोर्ड की स्थापना कर सुध लें। अन्यथा हालत बिगड़ते चले जाएंगे।

-डॉ. रानासेन गुप्ता, प्रबंध न्यासी एमएलपीसी

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