ये गलत है / काेराेना के डर से एम्स के डॉक्टर्स ने अपने ही नर्सिंग ऑफिसर की पत्नी को नहीं जांचा, गर्भपात हुआ

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  • 6 साल बाद गर्भवती हुई थी, टूट गया मां बनने का सपना

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:53 AM IST

जाेधपुर. डाॅक्टर्स की अनदेखी पति और नर्सिंगकर्मी नरेश कुमार की जुबानी...
17 मई को गर्भवती पत्नी के पेट में दर्द के साथ ब्लीडिंग होने लगी। मैंने तुरंत एम्स के गायनी विभाग में फोन कर इलाज का पूछा, लेकिन घर संक्रमित क्षेत्र कृष्णा नगर में हाेने से डाॅक्टर्स टालते रहे। लेकिन तकलीफ बढ़ी तो मैं पत्नी को एम्स ले आया। सुबह 11 से शाम 5 बजे तक गायनी से लेकर रेडियोलॉजी के हर डॉक्टर्स से सोनोग्राफी की मिन्नतें करता रहा, लेकिन काेविड गाइडलाइन का हवाला देकर वे प्राइवेट में जाने या साेनाेग्राफी बाहर से करवाने की सलाह देते रहे।

उसका दर्द देख मैं प्राइवेट डायग्नोसिस सेंटर गया, लेकिन सब बंद थे, लेकिन एम्स के डॉक्टर बाहर से साेनाेग्राफी पर अड़े रहे। फिर किसी के बताने पर एक निजी अस्पताल गया। वहां कुछ दवाएं देने से ब्लीडिंग रुकी तो पत्नी को घर ले आया, लेकिन घर पर फिर ब्लीडिंग होने लगी तो उसे पाल रोड स्थित क्लीनिक ले गया, जहां भर्ती कर अगले दिन सोनोग्राफी की, जिसमें गर्भ में बच्चा मरा हुआ पाया गया। हम दाेनाें गहरे सदम में डूब गए। मेरी पत्नी ने 6 साल बाद कंसीव किया था। हजाराें सपने देखे थे, सब बिखर गए। एम्स प्रशासन से लिखित में शिकायत की, लेकिन जवाब नहीं आया। नर्सिंग एसोसिएशन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए एम्स प्रशासन से न्याय की मांग की है।

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