सेवा का जज्बा:जोधपुर में सबसे पहले हुए थे संक्रमित, अब कोरोना से जान गंवाने वालों की निशुल्क बनाएंगे फोटो

जोधपुर6 महीने पहले
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महेश उत्तमचंदानी। - Dainik Bhaskar
महेश उत्तमचंदानी।
  • ताकि अपने प्रियजन को गंवाने वाले लोगों को भटकना ना पड़े

जोधपुर में कोरोना कहर बन टूट पड़ा है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवा रहे है। शोक संदेशों से समाचार पत्र भरे पड़े है। वहीं कई लोगों के शोक संदेश भी नहीं आते। बड़ी संख्या में अपनों को गंवाने वाले लोगों को एक अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा रहै। लॉकडाउन के कारण फोटो कलर लैब बंद है। ऐसे में वे अपने प्रियजन को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए एक फोटो तक नहीं बनवा पा रहे है। जोधपुर में सबसे पहले संक्रमित होने वालों में से एक महेश उत्तमचंदानी ने ऐसे लोगों की मदद के लिए पहल की है। फोटो कलर लैब के मालिक महेश ने संकट के इस दौर में जान गंवाने वालों के फोटो नि शुल्क बना कर देने का फैसला किया है। ताकि लोगों को भटकना ना पड़े।

स्पेक्ट्रम डिजिटल फ़ोटो लैब के मालिक महेश ने बताया कि इन दिनों बड़ी संख्या में लोग काल कवलित हो रहे है। हमारी परम्परा है कि दिवंगत आत्मा की शांति के लिए उनकी एक तस्वीर के सामने लोग प्रार्थना करते है। लॉक डाउन में लोगों के लिए अपने प्रियजन की एक तस्वीर तक बनवाना मुश्किल हो गया है। बड़ी संख्या में रोजाना लोगों के फोन आते है और वे एक फोटो बनवाने के लिए विनती करते है।

ऐसे में विचार आया कि पहले से परेशान लोगों की किस तरह से मदद की जा सकती है। इस पर मैने तय किया कि अगले कुछ दिन तक कोरोना के कारण जान गंवाने वाले लोगों की फोटो निशुल्क बना कर देंगे। यह सेवा रोजाना सुबह आठ से दस बजे तक जारी रहेगी। संकट के दौर में यह छोटी सी सेवा है। उन्होंने बताया कि फोटो बनवाने के इच्छुक व्यक्ति बनाया जाने वाला फ़ोटो spectrum86@ymail.com पर किसी भी समय भेजकर मोबाइल नम्बर 9928828888 या 9024259116 पर सूचित कर सकते हैं। फोटो मेल करने के अगले दिन सुबह आठ से दस बजे तक फोटो उपलब्ध करवा दी जाएगी। फिलहाल यह सेवा पंद्रह मई तक जारी रहेगी।

सबसे अनूठा मामला था महेश का

महेश अपने परिवार के साथ रिश्तेदारी में एक शादी समारोह में हिस्सा लेने तुर्की गए थे। वहां से लौटते समय वे कोरोना संक्रमित हो गए। जोधपुर में सबसे पहले उनका परिवार संक्रमित हुआ था। उनकी पत्नी व भतीजा तो चंद दिनों में ठीक होकर घर लौट गए, लेकिन महेश की परेशानियां बहुत लंबी हो गई। करीब पंद्रह बार उनके सैंपल लिए गए। रिपोर्ट कभी पॉजिटिव तो कभी निगेटिव आती रही। काफी दिनों बाद वे इस बीमारी से मुक्त हो पाए। काफी पीड़ी भोग चुके महेश ने अब लोगों की इस तरीके से सेवा करने का बीड़ा उठाया है।