ऐक्सिस हड्‌डी का जोधपुर में पहला सफल ऑपरेशन:मरीज को असहनीय दर्द रहता था, 7 MM लम्बी हड्डी के टुकड़े में 4.5 MM का स्क्रू लगा कर हड्डी को फिक्स किया

जोधपुर2 महीने पहले
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फ्रैक्चर हड्डी जिसे सही किया गया। - Dainik Bhaskar
फ्रैक्चर हड्डी जिसे सही किया गया।

जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के अस्थि विभाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने पहली बार ऐक्सिस हड्‌डी का सफल ऑपरेशन किया है। मस्तिष्क के ठीक नीचे स्थापित यह हड्‌डी रीढ की हड्‌डी का सबसे महत्वपूर्ण जोड़ है। ऐक्सिस हड्‌डी में फ्रैक्चर होने के बाद मरीज को असहनीय दर्द रहता है। गर्दन का मूवमेंट जानलेवा हो सकता है। ऑपरेशन अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर महेश भाटी व स्पाइन सर्जन डॉक्टर महेंद्र सिंह टाक की टीम ने किया।

जैसलमेर निवासी भीमाराम के एक सड़क दुर्घटना में ऐक्सिस हड्डी का फ्रैंक्चर हो गया था। डॉक्टर के अनुसार सामान्य एक्सरे करके देखने पर इस तरह के फ्रैक्चर कई बार नजर नहीं आते हैं। इस मरीज का भी यह फेक्चर नजर नहीं आया। लेकिन मरीज के गर्दन के ऊपरी हिस्से में असहनीय दर्द लगातार बना हुआ था।

एक्सरे में फ्रेक्चर नहीं आता नजर

गर्दन की सीटी स्कैन और MRI करने पर पता चला कि एक्सिस हड्डी का एक ज्वाइंट टूट गया है। जिसे ओडोनटाइड भी कहते हैं। डॉक्टर के अनुसार सिर का हर तरफ का मूवमेंट का केंद्र बिंदु इसी ज्वाइंट पर रहता है। इसी ज्वाइंट के ठीक पीछे स्पाइनल कॉर्ड का सबसे ऊपरी हिस्सा रहता है, जिस पर मामूली दबाव भी जानलेवा हो सकता है। जब तक ऑपरेशन करके इस ज्वाइंट को फिक्स नही किया जाता तब तक गर्दन की कोई भी अवांछित मूवमेंट नस को दबा सकती है। इन सब खतरों को ध्यान में रखते हुए मरीज के सिर में एक खास तरह का खिंचाव यंत्र को पुली की सहायता से लगाया। उस पर वजन लटका कर सिर को स्थिर रखा।

एक्सरे की दो मशीनों में जीरो डिग्री एवम् नब्बे डिग्री पर एक साथ देखते हुए स्क्रू फिट किया

फिर ऑपरेशन के द्वारा गर्दन के मध्य में सर्जिकल चीरा लगाकर, गर्दन की गहराई में , सिर के ठीक निचले हिस्से तक पहुंच कर एक्सरे की दो मशीनों में जीरो डिग्री एवम् नब्बे डिग्री पर एक साथ देखते हुए , विभिन्न कोणों पर सामंजस्य बिठाते हुए स्क्रू लगाया।

बहुत जटिल ऑपरेशन

डॉक्टर ने बताया कि 6 से 7 एमएम की हड्डी के टुकड़े में 4.5 एमएम का स्क्रू लगा कर हड्डी को फिक्स किया। डॅाक्टर के अनुसार इस हड्डी के टुकड़े के चारों तरफ (मस्तिष्क, सांस की नली , ग्रसनी , मस्तिष्क को जाने वाली खून की नस एवम् विभिन्न नसे ) जैसी मानव शरीर के सबसे जटिल सरंचनाए पाई जाती है। इन सब जटिलताओं के चलते यह ऑपरेशन किया गया।

यह थी टीम

सर्जिकल टीम में डॉ. नंदलाल, डॉ. पूनमचंद, डॉ. जयेश थे। एनेस्थीसिया इंचार्ज डॉ सरिता जनवेजा ने बताया की इस तरह के मरीजों को बेहोश करते अत्यंत सावधानी रखनी पड़ती है, गर्दन में किसी भी तरह की मूवमेंट जानलेवा हो सकती है । इसके लिए इन मरीजों में बेहोशी के लिए एक खास तरह के फाइबर ऑप्टिक मशीन का उपयोग किया जाता है। इस टीम में डॉ. फतेहसिंह भाटी , डॉ. गायत्री डॉ. नीलम, डॉ. प्रियमवदा , डॉ. ब्रजमोहन ओटी इंचार्ज इकबाल कायमखानी, अजीत गुरनानी एवम् अर्जुन सिंह सोढा का सहयोग रहा ।

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