दो दिवसीय लोककला और हैंडीक्राफ्ट फेस्टिवल आज से:हैंडीक्राफ्ट की 6 आर्ट के साथ दिखेंगी लोकगीत - संगीत व नृत्य की झलक

जोधपुरएक महीने पहले
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पश्चिमी राजस्थान के टूरिज्म में कल्चरल और हेरिटेज की विविधता को प्रदर्शित करने के लिए यूनेस्को और आरटीडीसी की ओर से दो दिवसीय लोककला एंड हैंडीक्राफ्ट फेस्टिवल जोधपुर में शनिवार से शुरू हो रहा है। इसमें राजस्थान के विभिन्न लोक अंचलों के लोक कलाकारों की ओर से गायन, वाद्य और नृत्य की प्रस्तुति होगी और तीनों का संगम एक ही जगह देखने को मिलेगा।

यूनेस्को की प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटिंग पार्टनर स्नेहा भट्टाचार्य ने बताया कि होटल ग्रांड बसंत में होने वाले इस फेस्टिवल में दर्शक एक ओर यहां की हैंडीक्राफ्ट विरासत से रूबरू हो सकेंगे वहीं लोक संगीत के जरिए यहां की सांस्कृतिक विरासत को भी देख सकेंगे। फेस्टिवल का उद्घाटन शनिवार शाम 4 बजे होगा। इसमें आईआईटी डायरेक्टर प्रो. शांतनु चौधरी, निफ्ट डायरेक्टर जीएस प्रसाद और मेहरानगढ़ के जनरल मैनेजर जगत राठौड़ बतौर मेहमान मौजूद रहेंगे।

शुरुआत शमसू खां के सिंधी सारंगी वादन से होगी और फिर शाम 4:30 बजे कालूनाथ कालबेलिया ग्रुप की ओर से कालबेलिया डांस की परफॉरमेंस होगी। इसके बाद कासम खां लोक संगीत की बारीकियों पर चर्चा करेंगे। दूसरे दिन 23 अक्टूबर शाम 4 बजे मुख्य आकर्षण पपेट शो होगा

जिसमें तीन क्षेत्रों के पपेट आर्टिस्ट शो दिखाएंगे। सूवा देवी और ग्रुप की ओर से कालबेलिया डांस की प्रस्तुति होगी और फिर शाम 5:30 बजे कार्यक्रम का समापन लोक गायक व पद्मश्री अनवर खां मांगणियार की ओर से डेजर्ट म्यूजिक की प्रस्तुति के साथ होगा। विजिटर्स के लिए हैंडीक्राफ्ट फेस्ट भी खास होगा जिसमें छह प्रकार की आर्ट फाॅर्म को प्रदर्शित किया जाएगा। सालावास की दरी, पाटोदी बाड़मेर की जूती, जैसलमेर की कठपुतली, जोधपुर सांगादानी की पोटरी व पोखरण की पोटरी से संबंधित कलाकार अपनी कलाओं को दिखाएंगे।

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