कृषि पर आधारित उद्योग होंगे स्थापित:मथानिया के पास 300 बीघा जमीन पर बनेगा फूड पार्क, जमीन का टाइटल क्लियर

जोधपुर2 महीने पहले
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उर्जा विभाग को मिलेंगे 2 करोड़ 6 लाख रूपए। - Dainik Bhaskar
उर्जा विभाग को मिलेंगे 2 करोड़ 6 लाख रूपए।

अधिकारियों ने जमीन को उपयुक्त माना मथानिया के पास अक्षय ऊर्जा विभाग के सोलर प्लांट की 300 बीघा जमीन पर प्रस्तावित फूड पार्क के लिए जमीन का टाइटल क्लियर हो गया है। फूड पार्क के लिए लिए मंडोर मंडी को अक्षय ऊर्जा विभाग को 2 करोड़ 6 लाख रुपए जमा करवाने होंगे। इसके बाद में जमीन मंडी को हस्तांतरित हो जाएगी। कृषि उपज मंडी समिति मंडोर ने एक प्रस्ताव बनाकर फूड पार्क के लिए ऊर्जा विभाग की जमीन को सबसे उपयुक्त माना है। अब फूड पार्क के लिए जमीन का टाइटल क्लियर होने से कृषि आधारित उद्योग स्थापित होंगे। इसमें 100 से अधिक इंडस्ट्रीज स्थापित होगी।

राज्य सरकार देगी सब्सिडी| फूड पार्क में कृषि आधारित उद्योग लगेंगे, जिसमें केंद्र व राज्य सरकार सब्सिडी देगी। खाद्य पदार्थों की यूनिट स्थापित होने से आसपास के कृषि क्षेत्रों में फसलें भी आसानी से मिलेंगी। फूड पार्क के लिए 50 करोड़ रुपए केंद्र सरकार देगी, बाकी राज्य सरकार वहन करेगी।

मारवाड़ का कृषि हब माने जाने वाले मथानिया में स्थित सोलर प्लांट के लिए वर्ष 1991 में अक्षय ऊर्जा विभाग को आवंटित 600 बीघा जमीन को कृषि विभाग के अधिकारियों ने उपयुक्त मानकर इसका प्रपोजल भिजवा दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में मथानिया एरिया में फूड पार्क बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद मेगा फूड पार्क के लिए कृषि उपज मंडी मंडोर के अधिकारी जेडीए के साथ मिलकर शहर के आसपास जेडीए एरिया में 300 बीघा जमीन की तलाश करने लगे, लेकिन इतनी बड़ी उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई।

इसके पश्चात कृषि उपज मंडी सचिव व अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने मौका देखकर बिजली-पानी सहित संपूर्ण सुविधाओं की रिपोर्ट प्राप्त कर उक्त जमीन को फूड पार्क के लिए उपयुक्त मानते हुए सरकार को प्रपोजल भिजवा दिया।
भूजल स्तर घटने से रोजगार घटा फूड पार्क वरदान साबित होगा
स्थानीय ग्रामीण नेमाराम चौधरी, युवक कांग्रेस के महासचिव अजीत कच्छवाह ने बताया कि फूड पार्क लगने से गांव के साथ ग्रामीणों को फायदा होगा। लगातार गिरते भू-जल स्तर से मजदूरों का पलायन रुकेगा। ट्रांसपोर्टेशन बस-रेल यातायात की सुविधा उपलब्ध है। आसपास कृषि से जुड़े दर्जनों प्रोजेक्ट से किसानों को सुविधा मिलेगी। मंडोर मंडी अनाज के सचिव सुरेंद्रसिंह राठौड़ का कहना है कि फूड पार्क के लिए अक्षय ऊर्जा निगम में राशि जमा करवानी होगी। इसके बाद जमीन मंडी के नाम हो जाएगी। बाद में यहां कृषि आधारित उद्योग स्थापित हो सकेंगे।

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