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पॉल्यूSun city:पहली बार जोधपुर की हवा में धूल के साथ धुआं भी खतरनाक स्तर पर, सफेद कागज 24 घंटे में काला पड़ा

जोधपुर2 महीने पहलेलेखक: मनीष बोहरा
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दो क्षेत्रों में लगाए पेपर के प्रदूषण से ये हाल। - Dainik Bhaskar
दो क्षेत्रों में लगाए पेपर के प्रदूषण से ये हाल।

जोधपुर की हवा में प्रदूषण का जहर तेजी से घुलता जा रहा है। अब तक धूल के कणों के कारण प्रदूषित शहरों की श्रेणी में खड़े हमारे शहर में वाहनों से निकलने वाला धुआं भी मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। दैनिक भास्कर व लाचू कॉलेज के विशेषज्ञों की टीम ने तीन दिनों तक प्रदूषण मापने वाले यंत्र (सैंप्लर) साथ लेकर औद्योगिक क्षेत्र बासनी, जोधपुर-पाली राष्ट्रीय राजमार्ग व सबसे पॉश कॉलोनी शास्त्रीनगर में आबोहवा को जांचा तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।

प्रदूषित हवा में 25 से 30% वाहनों का धुआं और 65 से 70% धूल के कण पाए गए। आशानुरूप बासनी व पाली राेड पर ताे प्रदूषण का स्तर ज्यादा था ही, लेकिन शास्त्रीनगर में भी सुरक्षित स्तर से डेढ़ गुणा अधिक पाया गया। शास्त्रीनगर में पीएम 10- 162.60 और पीएम 2.5- 86.50 और एसपीएम भी करीब 218.44 आंका गया। शास्त्रीनगर सहित अन्य आवासीय कॉलोनी में वायु प्रदूषण का बड़ा कारण नित नए खुल रहे निजी इंस्टीट्यूट व व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ते दायरे को माना गया।

प्रदूषण जांच के लिए भास्कर और विशेषज्ञों की टीम ने एक सफेद पेपर को सैंप्लर मशीन के अंदर रखा। 24 घंटे बाद देखा तो शास्त्रीनगर आवासीय कॉलोनी में रखा पेपर पूरी तरह काला हो चुका था। वहीं पाली रोड पर मशीन में रखा पेपर शास्त्रीनगर के मुकाबले थोड़ा कम काला पाया गया।

  • इलाका पीएम 10 पीएम 2.5 एसपीएम
  • शास्त्रीनगर 162.60 86.50 218.44
  • पाली रोड 163.78 85.34 257.47
  • बासनी 266.76 103.20 266.76

वर्ष 2020 शास्त्रीनगर क्षेत्र में एक्यूआई 173.33 नापा गया, जबकि 2019 में यह 430 के खतरनाक स्तर पर था। सांगरिया पुलिस चौकी के आसपास वर्ष 2020 में एक्यूआई 360 था तो 2019 में 362 रहा। रीको कार्यालय बासनी में वर्ष 2019 में एक्यूआई 316 था जो 2020 में 168 तक पहुंच गया। सूरसागर क्षेत्र का वर्ष 2020 में एक्यूआई 179.33 नापा था, जबकि एक साल पहले यह 404 आया था। जबकि एक्यूआई का सुरक्षित लेवल 100 होता है।

जहर घोल रहा ट्रैफिक नई सड़क पर रोजाना 67 हजार व आखलिया पर 64 हजार वाहन दौड़ रहे
जेडीए की ओर से वर्ष 2050 तक के शहर के ट्रैफिक को लेकर कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान फॉर जोधपुर में शहर के व्यस्ततम सड़कों, चौराहों व आवासीय इलाकों में प्रतिदिन गुजरने वाले वाले वाहनों की गणना की। इस सर्वे में नई सड़क सर्किल पर रोजाना 67 हजार 048, आखलिया सर्किल पर 64 हजार 440 और मंडोर कृषि मंडी सर्किल पर 23 हजार 788 कार-टैक्सी की रेलमपेल आंकी गई। इतने वाहन एक दिन में यहां से गुजरते हुए धुआं उगलते हैं। प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह भी है।

हमारी जांच के बाद सामने आया कि जोधपुर का प्रदूषण स्तर हमेशा उच्च रहता है। अब तक इसकी बड़ी वजह उड़ रही धूल व आैद्योगिक क्षेत्र रहता था, लेकिन अब वाहनों से निकलता जहरीला धुआं भी हवा में घुलता जा रहा है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व यूनिसेफ के आंकड़े भी वाहनाें के प्रदूषण काे मानव जीवन के लिए खतरनाक मान रहे हैं। विशेषज्ञाें का कहना है कि वैसे ताे सर्दियों में प्रदूषण स्तर हमेशा बढ़ता ही है, लेकिन सर्दियों में धूल भरी आंधियां नहीं चलती, इसके बावजूद हवा दूषित रहती है।

हवा की शुद्धता का एक्शन प्लान तैयार, इस पर काम भी शुरू हुआ

  • वाहनों के बढ़ते दबाव का असर पर्यावरण पर पड़ा है। वाहनों का धुआं प्रदूषण बढ़ा रहा है। हवा की शुद्धता के लिए एक्शन प्लान तैयार है, जिस पर हमने काम भी शुरू कर दिया है। - अमित शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, जोधपुर प्रदूषण नियंत्रण मंडल
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