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फलौदी जेल ब्रेक, 60 घंटे बाद भी पुलिस खाली:रेतीले धोरों के बीच छिपे हैं बदमाश; फरार कैदी बचने के लिए ले रहे तस्कर नेटवर्क की मदद

जोधपुर13 दिन पहले
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फलौदी जेल से सोमवार रात भागे 16 कैदी सीसीटीवी में कैद हो गए थे। - Dainik Bhaskar
फलौदी जेल से सोमवार रात भागे 16 कैदी सीसीटीवी में कैद हो गए थे।

जोधपुर जिले के फलौदी जेल से 16 कैदियों के भागने के 60 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ पूरी तरह से खाली है। इतना तय है कि ये सभी कैदी क्षेत्र के रेतीले धोरों में किसी स्थान पर शरण लिए हुए हैं। पुलिस इन तक पहुंच नहीं पा रही है। पुलिस टीमें लगातार क्षेत्र में कई स्थान पर दबिश दे चुकी हैं, लेकिन अभी तक एक भी कैदी पुलिस के हाथ नहीं लगा है।

फलौदी की जेल से सोमवार रात आठ बजे 16 कैदी वहां तैनात गार्डों के साथ मिलीभगत कर भाग निकले थे। सुनियोजित तरीके से भागे इन कैदियों ने पूरी योजना पहले से तैयार कर रखी थी। यहीं कारण रहा कि जेल से बाहर निकलते ही उन्हें ले जाने के लिए एक स्कॉर्पियो जेल से बाहर तैयार खड़ी थी। सभी चंद सेकंड में जेल से निकल इस स्कॉर्पियो में सवार होकर भाग निकले।

इसके बाद इनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस अभी तक न तो किसी कैदी को खोज पाई है और न ही उन्हें भगा कर ले जाने वाली स्कॉर्पियो। मामले की जांच फलौदी पुलिस थाना प्रभारी राकेश ख्यालिया कर रहे हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि उनकी तलाश में बड़ा अभियान शुरू किया गया है। वे सात दिन में पेश नहीं हुए तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।

भागने वाले 16 में से 9 कैदी एक जाति के
जेल से भागे 16 कैदियों में से 9 विश्नोई जाति के हैं। इस जाति का ग्रामीण क्षेत्र में काफी प्रभाव है। जेल से फरार होने वाले कैदियों को अच्छी तरह से मालूम है कि उनके भागते ही पूरे क्षेत्र में जोरदार नाकाबंदी होने के साथ सघन तलाशी अभियान चलेगा। ऐसे में अन्य जिलों की तरफ भागने के बजाय वे रेतीले धोरों में बसी किसी ढाणी में शरण लेकर बैठ गए होंगे। साथ ही वे सभी एक साथ रहने के बजाय अलग होकर अपने स्तर पर शरण ले समय निकाल रहे हैं, ताकि नाकाबंदी में ढिलाई आते ही वे यहां से भाग किसी अन्य स्थान पर जा सके।

काम में ले रहे हैं तस्करी का नेटवर्क
भागने वाले कैदियों में से ज्यादातर नशे की तस्करी के मामलों में पकड़े गए थे। ऐसे में वे सभी तस्करी का काम करते रहे हैं। उनका क्षेत्र में सक्रिय अन्य तस्करों के साथ संपर्क रहा है। जेल से फरार होने में उनके ये संपर्क ही काम आए होंगे। तस्करों के नेटवर्क के सहारे ही वे किसी दूर दराज स्थान पर शरण लेकर बैठे होंगे। तस्करों के इस नेटवर्क के आगे पुलिस का मुखबिरी नेटवर्क अब तक फेल दिख रहा है।

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भौगोलिक परिस्थिति बनी मददगार
फलौदी क्षेत्र रेगिस्तानी इलाका है। मीलों लंबे रेत के समंदर में कई स्थान ऐसे हैं जहां वाहन आसानी से पहुंच नहीं पाते हैं। तस्कर ऐसे स्थानों के अच्छे जानकार हैं। ऐसे में लगता है कि उन्होंने अपने छिपने के लिए ऐसे ही किसी स्थान का चयन किया होगा।

सिर्फ कुछ के ही भागने की थी योजना
सूत्रों का कहना है कि जेल से कुछेक बंदियों के ही भागने की योजना थी। उसी के अनुरूप उन्होंने तैयारी की। इन कैदियों के भागने के दौरान जेल परिसर में मची अफरा-तफरी के माहौल में कुछ अन्य कैदी भी इनके साथ निकल भागे। जेल के बाहर इन लोगों को ले जाने के लिए सिर्फ एक स्कॉर्पियो ही खड़ी थी। यदि सभी 16 कैदी भागने की साजिश में शामिल होते तो जेल के बाहर कम से कम दो वाहन जरूर मंगाते।

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