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कांग्रेस संगठन में बदलाव, एक की जगह दो जिलाध्यक्ष:गहलोत ने कम चर्चित चेहरों पर खेला दांव, सलीम खान व नरेश जोशी को सौंपी अपने घर में पार्टी संगठन की बागडोर

जोधपुर6 महीने पहले
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जोधपुर नार्थ में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद समर्थकों ने सलीम खान को मालाओं से लाद दिया। - Dainik Bhaskar
जोधपुर नार्थ में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद समर्थकों ने सलीम खान को मालाओं से लाद दिया।

डेढ़ दशक के इंतजार के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर जोधपुर में कांग्रेस का नया जिलाध्यक्ष मिल ही गया। और खासियत की बात यह कि इस बार एक नहीं दो जिलाध्यक्ष मिले है। नगर निगम की तर्ज पर कांग्रेस संगठन को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। जोधपुर नार्थ की बागडोर अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व जिलाध्यक्ष सलीम खान को तो जोधपुर साउथ में कांग्रेस संगठन की बागडोर शास्त्री नगर से पार्षद नरेश जोशी को सौंपी गई है। जबकि जोधपुर ग्रामीण में एक बार फिर बिलाड़ा विधायक हीरालाल मेघवाल जिलाध्यक्ष होंगे।

जोधपुर शहर में अपेक्षाकृत बेहत कम चर्चित चेहरों पर गहलोत ने दांव खेल सभी को एक बार फिर चौंका दिया है। यह पहले से तय था कि इस बार नगर निगम की तर्ज पर जोधपुर में पार्टी संगठन को दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा। शुरू से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि गहलोत एक हिस्से की बागडोर किसी ब्राह्मण व दूसरे की जिम्मेदारी ओबीसी या वैश्य समुदाय में से किसी को सौपेंगे। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा था कि सईद अंसारी के रूप में अल्पसंख्यक समुदाय के पास यह पद डेढ़ दशक से अधिक समय तक चला आ रहा है। कई चर्चित चेहरे जिलाध्यक्ष पद की रेस में शामिल थे। गहलोत ने एक बार फिर किसी को भनक तक नहीं लगने दी और कार्यकर्ताओं के बीच से सलीम खान और कैलाश जोशी को उठा कर बागडोर सौंप दी।

ये है सलीम खान

पचास वर्षीय सलीम खान शहरी क्षेत्र में कांग्रेस के बरसों पुराने कार्यकर्ता रहे है। बगैर किसी लाग लपेट के पार्टी संगठन की सेवा में वे हमेशा से तत्पर रहे। उनकी इस नियुक्ति में जोधपुर शहर विधायक मनीषा पंवार की अहम भूमिका मानी जा रही है। सलीम खान को अप्रत्यक्ष रूप से जेडीए के पूर्व चेयरमैन राजेन्द्र सिंह सोलंकी के विरोधी खेमे का माना जाता है। हालांकि दोनों के बीच की यह दूरी सार्वजनिक रूप से खुलकर कभी सामने नहीं आ पाई। इस नियुक्ति को पार्टी के नेता इस नजरिये से भी देख रहे है। बरसों से सलीम की सक्रियता को अब प्रतिफल मिला है।

ये है नरेश जोशी

नरेश जोशी जोधपुर में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष रह चुके है। गहलोत के करीबी माने जाने वाले एडवोकेट काशीनाथ जोशी के भतीजे नरेश कई बरस तक पार्टी में सक्रिय रहने के बाद जालोर स्थित अपने ग्रेनाइट कारोबार के चलते ज्यादा सक्रिय नहीं रह पाए। उनकी इस नियुक्ति के पीछे जालोर कनेक्शन की मुख्य भूमिका मानी जा रही है। गत निगम चुनाव के दौरान नरेश जोशी एक बार फिर सक्रिय हुए और चुनाव लड़ा। चुनाव जीतने के साथ उनकी सक्रियता एक बार फिर बढ़ गई। ऐसा माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति में गहलोत के खास सिपहसालार पुखराज पाराशर की अहम भूमिका रही। नरेश जोशी को सॉफ्ट स्पोकन माना जाता है। सभी को साथ लेकर चलने की उनकी काबिलियत ने भी उन्हें इस पद तक पहुंचाने में काफी मदद की।