राजस्थान में तेल का खेल:असली डीजल की बिक्री 1 साल में 18% घटी, नकली की 35% बढ़ी

जोधपुर2 महीने पहलेलेखक: भंवर जांगिड़
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नकली बायोडीजल से 750 करोड़ वैट का प्रतिवर्ष नुकसान हो रहा है। - Dainik Bhaskar
नकली बायोडीजल से 750 करोड़ वैट का प्रतिवर्ष नुकसान हो रहा है।

पेट्रोलियम कंपनियों की राजस्थान में डीजल की घटती सेल के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। एक साल में डीजल बिक्री 7,80,292 मीट्रिक टन घट गई। गिरावट 3 साल से चल रही है। हैरान करने वाली बात है कि इस दौरान पेट्रोल की बिक्री नहीं घटी। इन्हीं तीन साल में राजस्थान में नकली बायोडीजल का धंधा पनपा, लाइसेंस जारी हुए।

इसी दौरान इंडस्ट्रियल ऑयल की खपत बढ़ती चली गई। इसकी खपत 2019-20 में 5% बढ़कर 6,28,000 मीट्रिक टन और 2020-21 में 35% बढ़कर 8,45,000 मीट्रिक टन हो गई। एचएस कोड 27101940 वालर इंडस्ट्रियल ऑयल जीएसटी मिलाकर 50 रु. ली. पड़ता है जिसे बायोडीजल नाम से बेचा जा रहा है।

डीजल की बिक्री 9.51 लाख मीट्रिक टन घटी, पेट्रोल की स्थिर

...और इंडस्ट्रीयल ऑयल इंपोर्ट? 1137% बढ़ गया!

नकली बायोडीजल के लिए कई तरह का इंडस्ट्रीयल ऑयल इंपोर्ट होता है। जैसे कटिंग ऑयल, हाइड्रोलिक ऑयल व इंडस्ट्रियल व्हाइट आयल। डायरेक्टर जनरल ऑफ फाेरेन ट्रेड के मुताबिक इंडस्ट्रीयल ऑयल का आयात मई 2020 व मई 2021 के दौरान 605% व अप्रैल-मई 2020 व अप्रैल-मई 2021 के दौरान 1137% बढ़ा है। यानी भारी मात्रा में आयात कर इंडस्ट्रियल ऑयल से गुजरात में नकली बायोडीजल बन रहा है। इसे गुजरात सरकार अभियान चलाकर बंद करा रही है लेकिन राजस्थान में यह बेधड़क चल रहा है।

एक साल में नकली बायोडीजल बिकने से 750 करोड़ रु. के वैट का नुकसान

प्रदेश में 2020-21 में डीजल बिक्री 78,02,92 मीट्रिक टन घटी। पिछले साल की तुलना में अप्रैल-मई का लॉकडाउन व जून-जुलाई के अनलॉक की बिक्री का अंतर घटाएं, तब भी 30,76,42 मीट्रिक टन डीजल की घटत हुई। इसे प्रति लीटर 20 रु. वैट से गुणा करें तो 750 करोड़ होता है। यह नुकसान रोज 25 हजार लीटर के 40 टैंकर नकली डीजल के बराबर है।

पंप व वैट के नुकसान को बचाना है तो बायोफ्यूल की सीधी बिक्री रोके सरकार

राजस्थान वैट स्टेयरिंग कमेटी के अध्यक्ष व पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के लीगल एडवाइजर डाॅ. राजेंद्र सिंह भाटी ने 26 अगस्त को ही सीएम को पत्र लिखा। कहा- बायोफ्यूल प्रतिबंधित करना चाहिए। गुजरात-महाराष्ट्र में रोक है। यहां माइनिंग व ट्रांसपोर्टर सस्ती दरों पर डीजल धड़ल्ले से खरीद रहे हैं। मशीनें खराब हो रहीं। पंप संचालक घाटे में हैं।

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