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जोधपुर में 551वां प्रकाश पर्व:गुरु नानक जयंती के मौके पर अखंड पाठ का आज होगा समापन, कोरोना के कारण इस बार कोई बड़ा आयोजन नहीं

जोधपुर2 महीने पहले
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जोधपुर में सोमवार को प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारे में अरदास करते श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
जोधपुर में सोमवार को प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारे में अरदास करते श्रद्धालु।

सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव की जयंती सोमवार को प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जा रही है। कोरोना के कारण 551वें प्रकाश पर्व पर कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं रखा गया। गुरुद्वारों में विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। 28 नवम्बर को रखे गए अखण्ड पाठ साहेब के समापन पर आज सीमित संगत मिलकर कीर्तन कर के देश दुनिया मे फैली इस महामारी से निजात पाने के लिए सामूहिक अरदास करेगी।

28 नवंबर से अखंड पाठ का किया जा रहा आयोजन

जोधपुर के आनंद सिनेमा के पास स्थित गुरुद्वारे सहित सिंधी कॉलोनी स्थित गुरुद्वारे में भी जहां श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए मास्क लगाकर आराधना की तो वही एयरपोर्ट से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में स्थित गुरुद्वारों में पूजा अर्चना की गई। मनमोहन सिंह वालेचा ने बताया कि आनंद सिनेमा के पास स्थित गुरुद्वारे में 28 नवम्बर से अखंड पाठ का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना महामारी के कारण कोई बड़ा आयोजन नहीं रखा गया है. सीमित संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारे पहुंच गुरु नानकदेव के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

गौरतलब है कि सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव का जन्म 30 नवंबर 1469 को हुआ था। उस दिन कार्तिक पूर्णिमा थी। गुरु नानक देव का जन्म पाकिस्तान क्षेत्र में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी गांव के एक हिंदू परिवार में हुआ था। गुरुनानक देव का विवाह 16 साल की आयु में गुरदासपुर जिले के लाखौकी की रहने वाली कन्या के साथ हुआ था। इनका नाम सुलक्खनी था। गुरुनानक देव के दो पुत्र थे। जिनका नाम श्रीचंद और लख्मी चंद था। दोनों पुत्रों के जन्म के बाद ही गुरु नानक देव अपने चार साथियों के साथ घर से निकल गए थे और घूम-घूम कर उपदेश देने लगे थे।

गुरुनानक देव ने तीन यात्राचक्र 1521 तक पूरे किए। इनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के मुख्य स्थान शामिल थे। गुरुनानक देव ने समाज से बुराइयां दूर करने का काम भी किया। वे मूर्तिपूजा के खिलाफ थे। उनका कहना था कि ईश्वर हमारे अंदर है। वह कहीं बाहर नहीं है। इनके ऐसे ही विचारों से समाज में परिवर्तन आया और लोग जाग्रत हुए। उन्होंने ही पाकिस्तान के करतारपुर नामक स्‍थान बसाया था। इनका देवलोक गमन 22 सितंबर 1539 को हुआ।

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