आस्था और अनुशासन:यहां मां के नौ रूपों के मंदिर, हवन में यजमान बनने के लिए 25 साल इंतजार करते हैं भक्त...

जोधपुर20 दिन पहलेलेखक: नरेश कुमार
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​​​​​​​मां के मंदिर तक पहुंचने के लिए 160 सीढ़ियों पर नौ तोरणद्वार भी हैं। ये तोरणद्वार माता के रूप को समान महत्व देने का द्योतक हैं। ( फोटो: ताराचंद गवारिया ) - Dainik Bhaskar
​​​​​​​मां के मंदिर तक पहुंचने के लिए 160 सीढ़ियों पर नौ तोरणद्वार भी हैं। ये तोरणद्वार माता के रूप को समान महत्व देने का द्योतक हैं। ( फोटो: ताराचंद गवारिया )
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नवरात्रि में सच्चियाय माता के मंदिर में भव्य मेला लगता है। चैत्र व आश्विन में देशभर से श्रद्धालु आते हैं। दुर्गाष्टमी के दिन यज्ञ में यजमान बनने के लिए होड़ रहती है। व्यवस्था न बिगड़े इसलिए 35-40 साल पहले यजमान के लिए बुकिंग सिस्टम शुरू हुआ था। बुकिंग के लिए 5 लाख रु. जमा कराने होते हैं जो मंदिर के विकास कार्य पर ही खर्च होते हैं।

मंदिर प्रबंधक शर्मा ने बताया कि अभी विक्रम संवत् 2078 है। चैत्र नवरात्रि के लिए विक्रम संवत् 2087 व आश्विन के शारदीय नवरात्रि की दुर्गाष्टमी के लिए विक्रम संवत् 2103 तक बुकिंग फुल है। यानी आश्विन में दुर्गाष्टमी के यज्ञ के लिए यदि आप आज बुकिंग करते हैं तो सन् 2046 में नंबर आएगा।

मान्यता : प्रसाद में मिले ज्वार सिर पर रखने से आसमानी बिजली नहीं गिरती
घटस्थापना के दिन मंदिर के सामने ज्वार बोए जाते हैं। नौवें दिन ज्वार की बालियां प्रसाद के रूप में गांव-गांव बांटी जाती हैं। मान्यता है कि इस ज्वार को अपने सिर पर रखने से बिजली नहीं गिरती।

कैसे अस्तित्व में आया :

भीनमाल के राजकुमार उत्पल देव पंवार ने मंडोर के प्रतिहारों के यहां शरण ली थी। उन्हें मंडोर से आगे का भूभाग दिया गया। पंवार ने नवलखा तालाब की खुदाई की तो स्वर्ण मुद्राओं का खजाना मिला। मान्यता है कि यहां सच्चियाय माता स्वयं प्रकट हुई थी। बाद में पंवार ने भव्य मंदिर बनाया।

1300 साल पुराना है ओसियां का सच्चियाय माता का मंदिर। यहां मां के नौ रूपों के मंदिर एकसाथ। नवरात्रि में हर दिन अलग-अलग रूप में शृंगार-पूजा होती है।

जोधपुर के ओसियां में सच्चियाय माता का मंदिर जितना पुराना है, उसकी परंपराएं और प्रथाएं उतनी ही अनूठी और अनुशासित हैं। यहां मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की प्रतिमाएं हैं और परिसर में ही उनके लिए अलग से मंदिर भी हैं। यहां सच्चियाय माता महिषा मर्दिनी के रूप में विराजमान हैं, लेकिन नवरात्रि में मां दुर्गा के हर दिन के रूप के अनुसार शृंगार, पूजा व भोग लगाया जाता है। जैसे- पहला दिन शैलपुत्री का होता है। इसलिए मुख्य प्रतिमा लाल कपड़ों से सजती है। फूल व मिठाई भी लाल ही होती हैं।

मां के 9 रूप समान दिखें... इसलिए 9 तोरणद्वार

मां के मंदिर तक पहुंचने के लिए 160 सीढ़ियों पर नौ तोरणद्वार भी हैं। ये तोरणद्वार माता के रूप को समान महत्व देने का द्योतक हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में मंंदिर के सामने उगाए गए ज्वार प्रतिष्ठान या दुकान में रखने पर समृद्धि आती है।

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